संदेश〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️
प्रिय आत्मन्
मन सोची होती नहीं
प्रभु सोची तत्काल.
बली मंगत आकाश को
प्रभु दीन्हा पाताल.
संसार में प्रत्येक बुद्धिमान व्यक्ति सुखी दांपत्य जीवन जीने के लिए जो भी संभव हो उसके लिए भरपूर प्रयासरत रहते हैं । इसके लिए हमारे वैदिक पद्धति में पहले से ही बहुत अच्छी व्यवस्था की गई है , जो कि कुंडली मिलान या अष्टकूट मिलान के नाम से विख्यात है । वर्तमान समय में सुखी दांपत्य जीवन एक सपनों की भांति हो गया है, वर्तमान समय में एक समस्या देखने को ज्यादा मिल रही है , कि लोग फर्जी कुंडली ( जिनके जन्म विवरण वास्तविक नहीं रहता ) बनवा कर फर्जी कुंडली मिलान करके सुखी दांपत्य जीवन की आशा रखते हैं । यह बिल्कुल ही गलत है । कई बार देखने में ऐसा भी आया है कि यदि वालों को लड़का या लड़की पसंद आ जाते हैं तो फर्जी कुंडली बनवा कर शादी करवा दी जाती है । यह बिल्कुल भी ठीक नहीं है । यह दोनों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ है । यदि आपके पास लड़के या लड़की की वास्तविक कुंडली नहीं है तो अपने कुलगुरू से इस बारे में विचार विमर्श अवश्य करें । वही आपको सही मार्गदर्शन देंगे ।
उपयोगिता के आधार पर किस की बात मानने योग्य है
१- सद्गुरु - इन्हें अनुभव आधारित ज्ञान प्राप्त होता है, इनकी बात मानने से हमें कोई भी भौतिक लाभ नहीं होता है । इनकी बात मानने से सिर्फ आत्म कल्याण होता है ।
२- गुरु - इन्हें अनुभव आधारित ज्ञान प्राप्त होता है, इनकी बात मानने से हमें ८१% से ९८% लाभ होता है ।
३- विशेषज्ञ - इन्हें अनुभव आधारित ज्ञान प्राप्त होता है, इनकी बात मानने से हमें ४१% से ८०% लाभ होता है।
४- सामाजिक लोग - इन्हें अनुभव आधारित ज्ञान प्राप्त होता है, इनकी बात मानने से हमें ३०% से ४०% लाभ होता है।
५- मनमानी - केवल सुनी सुनाई बातों को आधार मानकर मनमानी किया गया कार्य हमारे पतन का मार्ग खोलता है।
👉किसी भी प्रकार का ज्योतिष परामर्श लेने से पहले कुछ बिंदुओं पर अवश्य ध्यान दें ।
१- क्या आपको ज्योतिष , वास्तु ,अथवा मुहूर्त शास्त्र का प्रारंभिक ज्ञान है ?
२- क्या आप जीवन के प्रत्येक शुभ कार्यों में मुहूर्त का विशेष ध्यान रखते हैं ? या फिर अपनी सुविधा अनुसार कार्य करते हैं,
३- क्या आप जानते हैं कि ज्योतिष अथवा मुहूर्त शास्त्र किस सिद्धांत पर कार्य करता है ?
४- क्या आप जानते हैं कि जो लोग ज्योतिष, वास्तु , मुहूर्त के अनुसार कार्य करते हैं उन्हें क्या लाभ होता है ?
५- क्या आप जानते हैं कि जो लोग ज्योतिष, वास्तु ,मुहूर्त के अनुसार कार्य नहीं करते उन्हें क्या हानि होती है ?
आइये कुछ प्रश्नोत्तरी के माध्यम से समझते हैं कि ज्योतिष अथवा मुहूर्त शास्त्र से मानव जाति को क्या लाभ है
१- ज्योतिष क्या है ?
ज्योति का अर्थ होता है प्रकाश और ज्योतिष का अर्थ होता है ज्योति पिंडों का अध्ययन। ज्योतिष शास्त्र का अर्थ प्रकाश वाले पिंडों की गतिविधियों को बताने वाला शास्त्र। इसमें मुख्य रूप से ग्रह, नक्षत्र आदि के स्वरूप, संचार, परिभ्रमण काल, ग्रहण और स्थिति संबधित घटनाओं का निरूपण एवं शुभाशुभ फलों का कथन किया जाता है |
२- ज्योतिष में जन्म समय जन्म स्थान का क्या महत्व है ?
व्यक्ति के जन्म का जन्म स्थान और जन्म समय यह बिंदु दर्शाता है कि जीवात्मा किन कर्मबीजों,प्रारब्धों व संस्कारों को लेकर किन और कैसे उर्जा -प्रवाहों के मिलन बिंदु के साथ जन्मी है | जन्म का क्षण इस विराट ब्राह्मंड में व्यक्ति को व उसके जीवन को एक विशेष स्थान देता है । यह कालचक्र में ऐसा स्थान होता है जो सदा अपरिवर्तनीय है और इनके मिलन के क्रम के अनुरूप ही सृष्टि, व्यक्ति, जंतु, वनस्पति, पदार्थ, घटनाक्रम इत्यादि जन्म लेते हैं इसी क्रम में उनका विलय-विर्सजन भी होता है ।
३- वास्तु शास्त्र क्या है ?
ज्योतिष शास्त्र की तरह वास्तु शास्त्र का ज्ञान भी हमारे ऋषि मुनियों की देन है । किसी भी प्रकार के भवन, दुकान, कोठी, फ्लैट आदि निर्माण में पांचो तत्वों का विशेष ध्यान रखा जाता है।अग्नि, पृथ्वी, वायु, जल एवं आकाश‘। इन पांचो तत्वों का दिशाओं के अनुसार समन्वय करना ही वैज्ञानिक रूप से ‘वास्तु‘ कहलाता है।
४- मुहूर्त क्या है ?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार किसी कार्य को आरम्भ करने की "शुभ घड़ी" को कहने मुहूर्त कहते हैं। एक मुहूर्त लगभग दो घड़ी के या 48 मिनट के बराबर होता है।
५- सही मुहूर्त में काम क्यों आवश्यक है ?
सही मुहूर्त चुनने से काम ब्रह्मांडीय प्रवाह के साथ जुड़ जाता है, जिससे सफलता की संभावना बढ़ जाती है और बाधाएं कम हो जाती हैं ।
६- एक दिन में कितने मुहूर्त होते हैं ?
सूर्योदय से लेकर अगले दिन सूर्योदय तक के समय को एक दिन माना जाता है, जोकि 24 घंटे का होता है. एक दिन में 30 मुहूर्त होते हैं और हर मुहूर्त 48 मिनट का होता है.
७- शुभ और अशुभ मुहूर्त का ज्ञान कैसे होता है ?
९ ग्रहों की २७ नक्षत्र के अंतर्गत चाल से इन मुहूर्त में शुभ और अशुभ योग का निर्माण होता है ! इसलिए कहा जाता है कि, शुभ मुहूर्त में ही किए कामों से व्यक्ति को सफलता मिलती है ।
८- जो ज्योतिष, वास्तु , मुहूर्त अनुसार कार्य करते हैं उन्हें क्या लाभ है ?
इनके अनुसार काम करके हम एक संभावना पैदा करते हैं की प्रकृति के प्रवाह से जुड़ सके, क्योंकि प्रकृति परमात्मा से जुड़ी है, इस प्रकार हम नियमों का पालन करके परमात्मा से जुड़ सकते हैं ।
९- जो ज्योतिष, वास्तु ,मुहूर्त अनुसार काम नहीं करते अर्थात मनमानी काम करते हैं उन्हें क्या हानि है ?
ऐसे लोग नियति द्वारा स्वचालित हैं और अपने प्रारब्ध की ओर आगे बढ़ रहे हैं , मनमानी किया हुआ कार्य हमें हमारे प्रारब्ध तक पहुंचना है ।
१०- मुहूर्त की सटीक जानकारी कहां से प्राप्त करें ?
पारंपरिक पंडित जी से इस बारे में सटीक जानकारी मिल सकती है ,जो पत्रा और जंत्री अपने पास रखते हो । या फिर
गूगल पर बहुत सी प्रमाणिक साइट उपलब्ध हैं जहां इसका सटीक विवरण मिल जाता है ।
👉 Please copy and open this link- https://www.mpanchang.com/muhurat/choghadiya/
११- पुण्य का नाश क्यों करती है ब्रह्म मुहूर्त की निद्रा ?
सफलता के लिए ब्रह्म मुहूर्त के महत्व को समझना जरूरी है. इसे शुभ मुहूर्त माना गया है, जिसमें किए गए कामों से सफलता मिलती है. मान्यता है कि इस समय वायु में अमृत धारा प्रवाहित होती है ।
१२- ज्योतिष अक्सर विफल क्यों हो जाता है ? क्या मुझे अब भी इस पर विश्वास करना चाहिए ?
ज्योतिष अपने आप में शुद्ध है। समस्या अभ्यासकर्ताओं के साथ है , वे आम तौर पर वेदों से अलग होकर ज्योतिष का अभ्यास करते हैं , जो मेरे दृष्टिकोण में सबसे बड़ा दोष है। ज्योतिष का मतलब भविष्यवाणी करना नहीं है, बल्कि उन संभावनाओं के बारे में बताना है कि कौन सा कर्म किस विधि से किया जाए कि हमें शुभ परिणाम की प्राप्ति हो और किस कर्म को करने के लिए हम कितने स्वतंत्र हैं ।
ध्यान दें कि यदि आपने हमारे द्वारा आयोजित शुद्धिकरण कार्यक्रम नहीं किया है तो हो सकता है कि आप को हमारे द्वारा बताई गई जानकारी से आपकी आशा के अनुसार लाभ न हो ।
अपना कीमती समय निकाल कर लेख पढ़ने के लिए
बहुत -बहुत धन्यवाद । 🙏
👉 शुद्धिकरण कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आवेदन करें । इसमें यदि आपको 50% या उससे अधिक अंक प्राप्त होते हैं तो कार्यक्रम के नियम अनुसार आप शामिल हो सकते हैं ।
👉आवेदन करें
👉 Please Copy and open this link
https://quizzory.in/id/6644a46367ec9f79d80432ff
👉हमारी सशुल्क सेवाएं - यह सेवाएं केवल उनके लिए जिन्होंने हमारे कार्यक्रम किए हैं ।
👉ज्योतिष परामर्श हेतु दी गई लिंक पर क्लिक करें ।
👉 Please Copy and open this Link -
https://guruplusmerafree.blogspot.com/2021/08/blog-post.html
👉विवाह हेतु ज्योतिष परामर्श के लिए दी गई लिंक पर क्लिक करे ।
👉 Please Copy and open this Link -
https://guruplusmerafree.blogspot.com/2024/04/blog-post_15.html
कुंडली मिलान संबंधी सामान्य प्रश्न उत्तर
१- कुंडली ( अष्टकूट मिलान ) मिलान क्या है ?
अष्टकूट मिलान हिंदू ज्योतिष में विवाह के लिए वर-वधू की कुंडलियों का मिलान करने की एक पारंपरिक विधि है। यह गुण मिलान की प्रक्रिया है, जिसमें दो व्यक्तियों की जन्म कुंडलियों के आधार पर उनकी अनुकूलता का आकलन किया जाता है। अष्टकूट मिलान में आठ (अष्ट) कूटों या गुणों का विश्लेषण किया जाता है, और प्रत्येक कूट को निश्चित अंक दिए जाते हैं। कुल मिलाकर 36 गुण होते हैं, और इनके आधार पर विवाह की सफलता का अनुमान लगाया जाता है।
अष्टकूट के आठ गुण:
1. वर्ण (1 अंक)
- यह सामाजिक और आध्यात्मिक अनुकूलता को दर्शाता है।
- वर-वधू के जन्म नक्षत्र के आधार पर उनकी वर्ण श्रेणी (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र) निर्धारित की जाती है।
- उदाहरण: यदि वर-वधू का वर्ण एक ही है या वधू का वर्ण वर से निम्न है, तो पूर्ण अंक मिलते हैं।
2. वश्य (2 अंक)
- यह दर्शाता है कि दोनों में से कौन किस पर प्रभाव डाल सकता है।
- नक्षत्रों के आधार पर राशियाँ पाँच वश्य समूहों में बाँटी जाती हैं: चतुष्पद, मानव, जलचर, वनचर, और कीट।
- यदि दोनों का वश्य समान है या अनुकूल है, तो पूर्ण अंक मिलते हैं।
3. तारा (3 अंक)
- यह दोनों के जन्म नक्षत्रों की तारा अनुकूलता को दर्शाता है।
- नक्षत्रों को नौ ताराओं में बाँटा जाता है (जैसे जन्म तारा, संपत तारा, आदि)।
- अनुकूल तारा होने पर पूर्ण अंक मिलते हैं।
4. योनि (4 अंक)
- यह शारीरिक और यौन अनुकूलता को दर्शाता है।
- प्रत्येक नक्षत्र को एक पशु योनि (जैसे अश्व, गज, सर्प, आदि) से जोड़ा जाता है।
- अनुकूल योनि होने पर पूर्ण अंक मिलते हैं, जबकि शत्रु योनि (जैसे बिल्ली-चूहा) में अंक कम मिलते हैं।
5. ग्रह मैत्री (5 अंक)
- यह राशि स्वामियों (ग्रहों) के बीच मैत्री, शत्रुता, या तटस्थता को दर्शाता है।
- उदाहरण: यदि वर-वधू की राशियों के स्वामी मित्र हैं (जैसे सूर्य-चंद्र), तो पूर्ण अंक मिलते हैं।
- यह दीर्घकालिक संबंधों की अनुकूलता के लिए महत्वपूर्ण है।
6. गण (6 अंक)
- यह स्वभाव और व्यक्तित्व की अनुकूलता को दर्शाता है।
- नक्षत्रों को तीन गणों में बाँटा जाता है: देव, मानव, और राक्षस।
- देव-मानव या समान गण में पूर्ण अंक मिलते हैं, लेकिन राक्षस-देव गण में अंक कम हो सकते हैं।
7. भकूट (7 अंक)
- यह भावनात्मक और आर्थिक अनुकूलता को दर्शाता है।
- वर-वधू की राशियों के बीच संबंध (जैसे 6-8, 5-9) देखा जाता है।
- यदि राशियाँ अनुकूल हैं, तो पूर्ण अंक मिलते हैं; अन्यथा शून्य अंक मिल सकते हैं।
8. नाड़ी (8 अंक)
- यह स्वास्थ्य, संतान, और आनुवंशिक अनुकूलता को दर्शाता है।
- नक्षत्रों को तीन नाड़ियों में बाँटा जाता है: आदि, मध्य, और अंत्य।
- यदि वर-वधू की नाड़ी अलग है, तो पूर्ण अंक मिलते हैं; समान नाड़ी होने पर 0 अंक मिलते हैं, क्योंकि इससे संतान संबंधी समस्याएँ हो सकती हैं।
अष्टकूट मिलान का स्कोर: -
- कुल गुण : 36
- अनुकूलता का स्तर :-
- 18 से कम : विवाह अनुशंसित नहीं।
- 18-24 : औसत अनुकूलता, कुछ दोषों के साथ विवाह संभव।
- 25-32 : अच्छी अनुकूलता, विवाह के लिए उपयुक्त।
- 33-36 :- अत्यंत अनुकूल, विवाह के लिए सर्वोत्तम।
महत्व:-
- अष्टकूट मिलान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वर-वधू के बीच शारीरिक, मानसिक, सामाजिक, और आध्यात्मिक अनुकूलता हो।
- यह विशेष रूप से संतान, स्वास्थ्य, और वैवाहिक सुख के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
- हालांकि, आधुनिक समय में कई लोग इसे केवल एक मार्गदर्शक मानते हैं और अन्य कारकों (जैसे व्यक्तित्व, मूल्य, और प्रेम) को भी प्राथमिकता देते हैं।
सीमाएँ:-
- अष्टकूट मिलान केवल नक्षत्र और राशि पर आधारित होता है, यह व्यक्तियों के वास्तविक स्वभाव या जीवनशैली को पूरी तरह से नहीं दर्शाता।
- कुछ ज्योतिषी अन्य कारकों जैसे मंगल दोष, दशा, और गोत्र मिलान को भी देखते हैं।
- समान नाड़ी या भकूट दोष होने पर भी, यदि अन्य गुण उच्च हैं, तो ज्योतिषी उपाय (दोष निवारण) सुझा सकते हैं।
निष्कर्ष :-अष्टकूट मिलान हिंदू विवाह में कुंडली मिलान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो आठ गुणों के आधार पर वर-वधू की अनुकूलता का आकलन करता है। यह वैवाहिक जीवन की सफलता के लिए एक ज्योतिषीय मार्गदर्शन प्रदान करता है, लेकिन इसे अन्य व्यावहारिक कारकों के साथ संतुलित करना चाहिए।
२-क्या ऑनलाइन राशिफल मिलान सही है?
-जी हां ऑनलाइन कुंडली मिलान का परिणाम शत प्रतिशत भरोसेमंद है । इसके अलावा कुंडली में बहुत से ऐसे लोग होते हैं जिसका विश्लेषण किसी योग्य ज्योतिषी से करवाना अनिवार्य है ।
-कुंडली मिलान में सबसे महत्वपूर्ण मानदंड क्या हैं ?
-हमारे ज्योतिषियों के अनुसार, कुंडली मिलान की बात करें, तो मंगल दोष मिलान और नाड़ी मिलान सबसे महत्वपूर्ण मानदंड
३- कुंडली मिलान के लिए किन बातों का ध्यान रखना अनिवार्य है ?
- लड़के एवं लड़की का जन्म विवरण पूर्ण एवं प्रमाणिक होना चाहिए । यदि आपके पास प्रमाणिक जन्म विवरण नहीं है तो ध्यान दें कि लड़के के चालू नाम से लड़की के चालू नाम का मिलान होना अनिवार्य है , या फिर लड़के के राशि नाम से लड़की के राशि नाम का मिलान होना अनिवार्य है । यह भी ध्यान दें कि सिर्फ व्यक्तिगत लाभ के लिए किसी भी स्थिति में नाम बदलकर कुंडली का मिलान ना करें ।
४- कितने गुण मिलने पर शादी हो सकती है ?
- कुण्डली मिलान की अष्टकूट पद्धति में, गुणों की अधिकतम संख्या ३६ है। वर और कन्या के बीच गुण अगर ३१ से ३६ के मध्य में हो तो उनका मिलाप अति उत्तम होता है। गुण अगर २१ से ३० के मध्य में हो तो वर और कन्या का मिलाप बहुत अच्छा होता है। गुण अगर १७ से २० के मध्य में हो तो वर और कन्या का मिलाप साधारण होता है और गुण अगर ० से १६ के मध्य में हो तो इसे अशुभ माना जाता है।
५-क्या मंगल दोष मिलान भी जरूरी है ?
-हां, मंगल दोष मिलान भी उतना ही महत्वपूर्ण है। यह अनुशंसा की जाती है कि दोनों कुंडली में मंगल दोष का स्तर लगभग बराबर हो।
मांगलिक दोष कैसे देखें ?
कुंडली में जब मंगल प्रथम, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम या द्वादश भाव में विराजमान हो तो व्यक्ति मांगलिक होता है। प्रथम भाव प्रथम भाव व्यक्ति के स्वास्थ्य का, चतुर्थ भाव माता का, सप्तम भाव जीवनसाथी का, अष्टम भाव मृत्यु तुल्य कष्ट का, द्वादश भाव जेल व अस्पताल के खर्चों का होता है। ऐसा मांगलिक दोष वास्तव में विचारणीय होता है।
मांगलिक दोष समाप्त होने के नियम
ज्योतिष के आचार्य द्वारा बताया गया है कि कुछ नियमों के अंतर्गत मांगलिक दोष खुद ही समाप्त हो जाता है।
1) मंगल सूर्य से अस्त हो जाए तो मांगलिक दोष प्रभावहीन हो जाता है।
2) कर्क लग्न एवं सिंह लग्न में मंगल योग कारक होने के कारण मांगलिक दोष समाप्त हो जाता है।
3) मंगल और गुरु का योग हो या गुरु की दृष्टि मंगल पर हो तो भी मांगलिक दोष समाप्त हो जाता है।
4) मंगल और शनि की युति हो या शनि की दृष्टि में होने पर भी मंगल का मांगलिक दोष समाप्त हो जाता है।
5) मंगल मकर राशि में हो तो मांगलिक दोष निरस्त हो जाता है।
मंगल दोष के लक्षण
यदि कोई व्यक्ति मंगल दोष से प्रभावित होता है, तो उसके विवाहित जीवन में निम्नलिखित लक्षण दिखाई दे सकते हैं:
- विवाह में देरी: मंगल दोष वाले व्यक्ति के लिए विवाह की दिनांक में देरी हो सकती है।
- संघटनाएँ और मतभेद: इन व्यक्तियों के विवाहित जीवन में अक्सर संघटनाएँ और मतभेद देखे जा सकते हैं।
- पारिवारिक समस्याएँ: मंगल दोष से प्रभावित व्यक्तियों के पारिवारिक संबंधों में तनाव दिखाई दे सकता है, जिससे कि परिवार के सदस्यों के बीच में मतभेद बढ़ सकते हैं।
मंगल दोष के उपाय
मंगल दोष को दूर करने के लिए विभिन्न उपाय होते हैं, जो निम्नलिखित हैं:
- मंगल की पूजा: मंगल दोष से मुक्ति पाने के लिए मंगल की पूजा करना फायदेमंद हो सकता है।
- कुंडली मिलान: विवाह के लिए कुंडली मिलान करना अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। यह दोष को पहचानने में मदद कर सकता है और उपयुक्त उपायों की सुझाव देने में मदद कर सकता है।
- हर मंगलवा र को रो टी में गुड़ मि ला कर ला ल गा य को खि ला एं।एं इस उपा य को करने से मंगल दोष दूर हो ता है। सा थ ही करि यर और का रो बा र में तरक्की और उन्नति प्रा प्त हो ती है।
- अगर मंगल के चलते आपके घर में कलह की स्थि ति है, तो बड़े भा ई का आशी र्वा द जरूर प्रा प्त करें।रें बड़े भा ई में मंगल का प्रभा व रहता है। इसके लि ए बड़े भा ई का आशी र्वा द जरूर प्रा प्त लें। अगर आप बड़े हैं, तो परि वा र में बड़े व्यक्ति से आशी र्वा द प्रा प्त कर सकते हैं। इस उपा य को करने से भी मंगल दो ष का प्रभा व क्षी ण हो ता है।
- अगर कुंडली में मंगल की स्थि ति ठी क नहीं है। इसके चलते आर्थि क तंगी है, तो हर मंगलवा र को हनुमा न जी के मंदि र में जा कर गुड़, चना और बूंदी के लड्डू भो ग लगा एं।एं सा थ ही हनुमा न जी के सम्मुख हनुमा न चा ली सा का पा ठ करें।
- भा त पूजन: मां गलि क दो ष दूर करने के लि ए भा त पूजन करा या जा ता है. उज्जैन का मंगलना थ स्था न ऐसा एकमा त्र स्था न है जहां भा त पूजन हो ता है. भा त पूजन करा ने के बा द यह दो ष समा प्त हो जा ता है
उपायों का पालन
मंगल दोष से प्रभावित व्यक्तियों को धैर्य और समर्पण के साथ उपायों का पालन करना चाहिए। यह उनके विवाहित जीवन में सुख-शांति और समृद्धि की दिशा में मदद कर सकता है।
*६- क्या नाड़ी दोष को नज़रअंदाज़ किया जा सकता है?*
-अष्टकूट मिलान प्रणाली में नाड़ी को उच्चतम बिंदु (8 अंक) दिया गया है। यदि अंकों की कुल संख्या 18 से अधिक है, तो इसे नाडी दोष होने पर भी सभ्य मिलान माना जाता है।
*७-भागकर की गई शादियां कितने प्रतिशत सफल होती है?*
- हमारी वैदिक पद्धति कर्म और कर्म फल के सिद्धांत पर आधारित है हमारे वैदिक ग्रंथों में सभी कर्मों को मर्यादा में रहकर करना बताया गया है किंतु कुछ कर्म ऐसे होते हैं जिनको दृढ़ कर्मों की संज्ञा दी गई है , इन्हीं में से एक भागकर की गई शादियां भी हैं ।
८-सुखी दांपत्य जीवन जीने के लिए और किन बातों का विचार करना अनिवार्य है ?
सुखी दांपत्य जीवन जीने के लिए सबसे पहले तो उत्तम स्वस्थ होना अनिवार्य है , अर्थात पूर्ण आयु होनी चाहिए। इसके बाद धन के अच्छे योग होना चाहिए , जिससे धन खर्च करने के लिए हमें कभी सोचना ना पड़े । विवाह उपरांत संतान सुख पर भी विचार अनिवार्य है ।
9-क्या दूसरे भाव में स्थित मंगल भी मंगल दोष उत्पन्न करता है ?
उत्तर: नहीं, दूसरे भाव में स्थित मंगल मंगल दोष नहीं बनाता है। कुछ उत्तर भारतीय ज्योतिषी अन्यथा सोचते हैं, लेकिन सच तो यह है कि मंगल यदि अशुभ हो तो वह जिस घर में स्थित होता है, वहां समस्या उत्पन्न कर देता है। तो, सबसे अच्छा तरीका है कि कुंडली का मूल्यांकन कराया जाए और सरल मंगल दोष उपाय किए जाएं।
10-मंगल दोष के बारे में कैसे जानें
मंगल दोष की जांच करने के लिए कुंडली में पहले घर, चौथे घर, सातवें घर, आठवें घर और 12वें घर में मंगल की स्थिति देखनी होगी। मंगल दोष की जांच के लिए हम चंद्र राशि पर विचार करते हैं। आपको मेरी साइट सहित कई ज्योतिष साइटें मिलेंगी जिनमें जांच के लिए कैलकुलेटर उपलब्ध हैं
मांगलिक दोष. इसका उपयोग मांगलिक दोष के बारे में प्रथम दृष्टया जानकारी इकट्ठा करने के लिए किया जा सकता है, लेकिन किसी सक्षम ज्योतिषी से इसकी जांच करवाना हमेशा बेहतर होता है। क्योंकि इसकी क्षमता भिन्न हो सकती है जो उच्च मंगल दोष, निम्न मंगल दोष या अंशिक मंगल दोष का भी निर्णय करती है लेकिन मंगल दोष की किसी भी गलत व्याख्या से बचने के लिए किसी विशेषज्ञ से ही परामर्श लें। मैं आपको फिर से बता रहा हूं कि कुंडली में मांगलिक दोष की जांच करने के विभिन्न तरीके हैं।
11-क्या मंगल/कुजा दोष 28 वर्ष की आयु के बाद समाप्त हो जाता है?
उत्तर: नहीं, 28 वर्ष की आयु के बाद मंगल दोष समाप्त नहीं होता है। दरअसल, यदि किसी कुंडली में कोई दोष मौजूद है तो वह जीवन भर मौजूद रहता है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार, जातक की आयु के 28वें वर्ष के बाद मंगल एक अलग रूप में प्रवेश करता है। 28वें वर्ष के बाद मंगल की उग्रता या ऊर्जा को दिशा मिल जाती है, लेकिन यह विवाह ज्योतिष पर लागू नहीं होता है।
12-क्या कभी मांगलिक दोष से छुटकारा मिल सकता है?
उत्तर: यदि आपकी कुंडली में मंगल दोष मौजूद है तो आपको कभी भी मंगल दोष से छुटकारा नहीं मिल सकता है। लेकिन बस मांगलिक दोष की जांच करवा लें; यह बहुत अच्छी संभावना है कि आपमें यह दोष बिल्कुल भी नहीं है। मेरे कार्यालय में आने वाले अस्सी प्रतिशत वर्गीकृत मांगलिकों के पास दोष नहीं है।
13-क्या मांगलिक/कुजा दोष के कारण विवाह में देरी हो सकती है?
उत्तर: मंगल दोष के प्रभावों में से एक यह है कि यह विवाह में देरी कर सकता है। लेकिन, मंगल पृथक रूप से कार्य नहीं करता है। कोई अन्य ग्रह एकमात्र विलम्बक के रूप में कार्य कर रहा होगा, जबकि मंगल समस्या को बढ़ा सकता है। इसलिए बेहतर होगा कि किसी ज्योतिषी से सलाह लेकर मांगलिक दोष के कुछ उपाय किए जाएं।
१४-क्या कोई मांगलिक गैर-मांगलिक से शादी कर सकता है ?
उत्तर: ओह, यह गलत धारणा मांगलिक दोष के बारे में सभी संदेहों और मिथकों का स्वामी है। लेकिन मैं स्पष्ट कर दूं, हां, एक मांगलिक गैर-मांगलिक से शादी कर सकता है और इसका विपरीत भी। जैसा कि पहले कहा गया है, इस प्रश्न को लेकर अपने मन में कोई आशंका न रखें। सबसे पहले, हो सकता है कि आपके पास मांगलिक दोष बिल्कुल भी न हो; यदि आपके पास यह है तो भी एक मांगलिक निश्चित रूप से एक गैर-मांगलिक से शादी कर सकता है। किसी भी प्रकार की गलत व्याख्या से बचने के लिए मैं यहां अधिक ज्योतिषीय कारण नहीं देना चाहूंगा। ऐसे निर्णय कुंडली-विशिष्ट होते हैं, इसलिए बेहतर होगा कि आप अपनी राय बनाने या किसी भी तरह का निर्णय लेने से पहले किसी अच्छे ज्योतिषी से परामर्श लें।
१५- क्या अष्टकूट मिलान वैवाहिक सुख की गारंटी है ?
उत्तर- अष्टकूट मिलान मानक अष्टकूट मिलान में आठ मानकों के आधार पर मिलान की व्यवस्था है । जहां तारा, योनि, गण एवं नाड़ी का आधार जन्म नक्षत्र है तो वहीं वश्य, वर्ण, ग्रह मैत्री एवं भकूट का आधार जन्म राशि है।
अब प्रश्न है कि क्या मात्र अष्टकूट मिलान के आधार पर वैवाहिक सुख मिलने की उद्घोषणा की जा सकती है ?
शास्त्रों के अनुसार ज्योतिषीय आधार पर जातक/ जातिका के एकल कुंडली के आधार पर भी वैवाहिक सुख मिलने की विवेचना अवश्य की जानी चाहिए , अन्यथा सिर्फ अष्टकूट मिलान के बाद भी वैवाहिक सुख की प्राप्ति मृगतृष्णा ही रहेगी।
कुंडली के कुछ योग ऐसे हैं जो वैवाहिक सुख को प्रभावित करते हैं । कुंडली में विद्यमान संतानहीनता का योग, अल्पायु योग, वैधुर्य या विधवा होने का योग, गंभीर बीमारी से पीड़ित रहने का योग, दरिद्र योग, व्यभिचार योग आदि कुछ ऐसे योग हैं जो वैवाहिक सुख को प्रभावहीन बना देंगे और वर-वधू के जीवन को विवाहोपरांत उनके जीवन में नैराश्य एवं अंधेरा ला देंगे।
१६- जो लोग भाग कर शादी करते हैं उन पर कुंडली के ग्रहों का क्या प्रभाव पड़ता है ?
कर्म रहस्य में कई प्रकार के कर्मों का विवरण मिलता है, जब हम स्वेच्छा से कोई कार्य नहीं करते अर्थात भाव आवेश में आकर किसी के दबाव में आकर किसी के बहकावे में आकर कार्य करते हैं, यह सब
दृढ़ कर्म के अंतर्गत आते हैं , इनका फल तो भोगना ही पड़ता है ।
👉 कुंडली मिलान हेतु फॉर्म ओपन करने के लिए लिंक पर क्लिक करें , और वर वधू का जन्म विवरण एवं पूंछे गए प्रश्नों का उत्तर अपनी समझ अनुसार भरकर सबमिट करें ।
👉 Please copy and open this link tps://surveyheart.com/form/648f2b8a8f714c4b7210bf9f
विवाह संबंधी कुछ आवश्यक सुचनाएं
👍 सिर्फ बायोडाटा देखकर रिश्ते नहीं बनते. बिना गुण कुंडली मिलान के भी विवाह होते हैं क्योंकि यह दर्शाता है की जो नियति में है वही होगा ।
👍 मंगल कभी अमंगल नहीं होता, विवाह शुभ कार्य हैं.
👍 आपकी कन्या स्टार हैं, तो उनका पुत्र सुपरस्टार हैं.
👍 ९० प्रतीशत लोग हमारे जैसे ही हैं सर्व गुण संपन्न कोई नहीं होता.
👍 विवाह योग्य उम्र में विवाह करें, समय थमता नहीं. उम्र बढना ठिक नहीं हैं. बेटर, और बेटर के चक्कर में ना उलझें… हमें बच्चों का लाईफ सेट करना हैं, कोई गॅजेट नहीं खरिदना…
👍 जो हमें सूट करें, उन्हींसे संपर्क करें. जिनकी उम्मीद अधिक हो, उनके लिये अपना अमूल्य समय बर्बाद न करें. याद रहें, अगर उनकी उम्मीदों पर आप खरें उतरते हों, तो वे स्वयं ही आपसे संपर्क करेंगे
👍 रंग, रूप, इनसे अधिक गुणोंपर ध्यान दें. प्रत्येक व्यक्तीमें कुछ खामियां होती ही है. उसके लिये आगे चलके ॲडजस्टमेंट कर सकते है
👍 आपको कॉल करने वाले सज्जनों का सन्मान करें. यदी आपको रिश्ता पसंद न हो, तो योग्य कारण देकर नकारें.
यह सोचें कि आप जिस रिश्ते की तलाशमें हो, शायद वह उनके किसी संबंधी मे से हो सकता हैं
👍 गये वो दिन, जब लडकी वालेही रिश्ता ढूंढने के लिये लडके वालों के पास प्रथम जाते थे. अगर आप लडके वाले हो, और किसी कन्या का बायोडेटा आपको अनुरूप लगे, तो खुद आगे बढें, संपर्क करें, कॉल करें.
👍 अमिताभसे जया की ऊंचाई १२ इंच कम हैं..
👍 सचिन से अंजली तीन सालसे बडी हैं.
👍 ऐश्वर्या मांगलिक थी, अभिषेक नॅान-मांगलिक था.
👍 दुनियांमे कोई भी मिस्टर/मिस परफेक्ट नहीं होता. दुसरोंके दोष ढुंढनेसे बेहत्तर है, अपनी खामियां परखे.
👍 सकारात्मक रहें. समय निकल जाने के बाद पश्चाताप करने से कोई फायदा नहीं होगा
समाज मे परिवर्तन लायें
सुंदर शुभकामनाओं सहित…🙏🏻🙏🏻
https://search.app?link=https%3A%2F%2Fkntiwari.com%2Fmatch-making-astrology%2F%3Fsrsltid%3DAfmBOoq4lzROfwDpin9YbyJBbtZuUU9EcKFtoPamPgJ5i3lwgXctCwO6&utm_campaign=aga&utm_source=agsadl1%2Csh%2Fx%2Fgs%2Fm2%2F4
🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷