प्रणाम मित्रों 🙏
जैसा कि आप सभी जानते हैं विपरीत विचारधारा के लोगों के साथ किसी भी प्रकार से जुड़ना संभव नहीं रहता है, फिर भी यदि आवश्यक हो और किसी विषय पर चर्चा करनी हो तो विद्वान जन कहते हैं कि समय निकाल लेना चाहिए ।
चर्चा के महत्वपूर्ण बिंदु - क्यों कि समाज और सामाजिक कार्यों में अधिक समय न देने के कारण वर्तमान समय में ना तो हमारे पास धन है और ना ही समाज में कोई विशेष पहचान , इसलिए राजेश्वरी और उनसे जुड़े लोगों ने हमें नालायक समझ लिया । इसलिए यह आवश्यक है कि कुछ विषय हैं जिन पर स्पष्ट रूप से चर्चा हो सके, और यदि कोई हमारी नहीं सुनेगा तो फिर हमें यह भी ज्ञात है कि हमें क्या करना है ?
आप सभी से हमारी यही शिकायत है कि -
- आप लोग हमसे कुछ सीखना नहीं चाहते हैं, ना ही हमारे विषयों में जिज्ञासा है ना ही रुचि है ।
- हमारे द्वारा पूछे गए प्रश्नों का उत्तर आपके पास नहीं है ।
- मानव जीवन का लक्ष्य और उडदेशय आपको ज्ञात नहीं ।
- मनुष्य जीवन, स्त्री पुरुष के शरीर का महत्व ज्ञात नहीं है ।
आपको यह ज्ञात नहीं कि एक स्त्री को किस मूल्य के बदले कौन सा सुख मिलता है । और शायद यह भी ज्ञात नहीं कि एक पुरुष को किस मूल्य के बदले कौन सा सुख मिलता है ।
- आपका मुख्य विषय है व्यक्तिगत स्वतंत्रता और इच्छा पूर्ति । इसके अलावा एक परिवार मैं संतुलन कैसे बनाया जा सकता है ? एक परिवार का समाज में क्या योगदान है ? हमारा स्वयं का परिवार कहां जा रहा है ? इससे आपको कोई मतलब नहीं । सब अपने मनमानी दिशा में दौड़ते हुए मनमाना कार्य करने में लगे हुए हैं ।
- सीधे-सीधे हमें रूढ़िवादी नहीं कह सकते, इसलिए बेचारी अपनी मां को रूढ़िवादी कहकर अपनी भड़ास निकालते हैं ।
- हमारी बताई गई बातों का विरोध हो रहा है यह सब आपकी बातों से स्पष्ट पता चलता है कि जब भी आप लोगों को मौका मिलता है तो हमें ट्रोल करते हैं,
उपरोक्त लक्षण विरोधियों के होते हैं ना कि सहयोगियों के या फिर परिवार के सदस्यों के। इसलिए अपने अपने जीवन में जो भी ज्ञान अर्जन किया हो उसी के आधार पर कुछ समस्याएं यहां पर दी गई है । अपने अनुसार इनका समाधान निकाले और हमें भी बताएं की इन में संतुलन आप कैसे बनाएंगे ?
क्योंकि अभी तक हमने तो अपने हिस्से की हर चीज हर छोटी बड़ी इच्छा को एक साइड रखकर सहयोग की भावना से काम किया । और हमारी इस सहयोग के लिए धन्यवाद देने की बजाय घर के लोग हम में ही कमियां निकालने में लगे हैं ।
इसलिए यह जरूरी है कि कुछ तर्कसंगत फैसला हो क्योंकि हमें भी अपने बुढ़ापे के लिए कुछ करना है । यहां तो हमारे किसी से विचार मैच करते नहीं है तो बुढ़ापे में तो यहां हमारी दुर्गति ही होगी ।
१- निशपक्ष न्याय के लिए कितने विषयों का ज्ञान अवशयक है ?
२- आप आस्तिक हैं या नआस्तिक ?
३- आप आस्तिक या नास्तिक ईश्वर को खोजकर बने या ईश्वर को बिना खोजे ?
४- हर व्यक्ति अपने गुंण स्वभाव और आयु अनुसार ही अपने जीवन और समाज में प्रगति करता है, और यदि पति-पत्नी के बीच में आयु का अंतर अधिक हो तो समाज में सफलता मुश्किल हो जाती है । दोनों में आयु के अंतर में जो असंतुलन है उसे आप कैसे संतुलित करेंगे ?
५- एक साधक और संसारी के विचारों में बहुत अंतर होता है और वह उन्ही विचारों से प्रेरित होकर कार्य भी करते हैं। जहां साधक ईश्वर को महत्व देता है , वहीं संसारी व्यक्ति सांसारिक वस्तुओं को । ऐसे में आप दोनों में संतुलन कैसे बनाएंगे ?
६- स्त्री और पुरुष के विचारों में बहुत अंतर होता है। जहां पुरुष हर चीज को जल्दी से जल्दी समेटना चाहता है वही स्त्री हर चीज का फैलाव ( पसारा ) करती है । ऐसे में दोनों के बीच संतुलन कैसे बनाएंगे ?
कुछ विषयों पर हमें भी आप से स्पष्टीकरण चाहिए । शेष सबके लिए यहां हमारे कुछ लेख है आप इन्हें अवश्य पढ़े ।
👉 वर्तमान पीढ़ी और उनकी आधुनिक सोच
https://guruplusmerafree.blogspot.com/2025/08/blog-post_28.html
👉 हमारी परंपराएं और मनमाना अनुसरण
https://guruplusmerafree.blogspot.com/2025/09/blog-post_29.html
👉 कहीं हम रूढ़िवादी तो नहीं
https://guruplusmerafree.blogspot.com/2024/05/blog-post_53.html
👉 अपनी-अपनी विचारधारा के बीच सत्य कैसे जाने
https://guruplusmerafree.blogspot.com/2025/08/blog-post_54.html
👉 समन्वयवाद ही क्यों श्रेष्ठ है ।