प्रिय आत्मन्
इच्छाओं के बिना जीवन संभव नहीं है , कोई भी इच्छा अच्छी या बुरी नहीं होती । उसको पूरा करने का मार्ग अवश्य ही अच्छा या बुरा हो सकता है , भौतिक, धार्मिक और आध्यात्मिक यह सभी इच्छाएं हमारे जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। किंतु हमें जीवन में सही इच्छा के चुनाव का क्रम आवश्य ज्ञात होना चाहिए। यदि हम अपने गंतव्य तक पहुंचे बिना ही इच्छाहीन जीवन व्यतीत कर रहे हैं, तो इसका नुकसान यह हो सकता है कि लोग हमारे समय और धन का दुरुपयोग करेंगे ।
👉भौतिक इच्छाएं
भौतिक इच्छाएं हमारे शारीरिक और मानसिक सुख के लिए संबंधित होती हैं। ये इच्छाएं हमारे दैनिक जीवन में संतुष्टि और सुख प्रदान करती हैं। उदाहरण के लिए:
- धन और संपत्ति प्राप्त करना
- एक अच्छा घर और परिवार होना
- स्वस्थ और सुखी जीवन जीना
- यात्रा और नए अनुभव प्राप्त करना
- एक अच्छी नौकरी या व्यवसाय होना
भौतिक इच्छाएं हमारे जीवन को सुखी और संतुष्ट बनाने में मदद करती हैं, लेकिन ये इच्छाएं हमेशा स्थायी नहीं होती हैं और समय के साथ बदलती रहती हैं।
👉धार्मिक इच्छाएं
धार्मिक इच्छाएं हमारे आध्यात्मिक और नैतिक मूल्यों से संबंधित होती हैं। ये इच्छाएं हमें अपने धर्म और समाज के प्रति जिम्मेदार और समर्पित बनाने में मदद करती हैं। उदाहरण के लिए:
- अपने धर्म के अनुसार जीवन जीना
- दान और सेवा करना
- अपने समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाना
- अपने धर्म के प्रति समर्पित और जिम्मेदार होना
- अपने जीवन में नैतिकता और सदाचार को बढ़ावा देना
धार्मिक इच्छाएं हमें अपने जीवन में अर्थ और उद्देश्य प्रदान करती हैं और हमें अपने समाज और धर्म के प्रति जिम्मेदार बनाने में मदद करती हैं।
👉आध्यात्मिक इच्छाएं
आध्यात्मिक इच्छाएं हमारे आत्म-ज्ञान और आत्म-साक्षरता से संबंधित होती हैं। ये इच्छाएं हमें अपने जीवन में अर्थ और उद्देश्य प्रदान करती हैं और हमें अपने आत्मा के साथ जुड़ने में मदद करती हैं। उदाहरण के लिए:
- आत्म-ज्ञान प्राप्त करना
- अपने जीवन में अर्थ और उद्देश्य प्राप्त करना
- अपने आत्मा के साथ जुड़ना
- शांति और आनंद प्राप्त करना
- अपने जीवन में आध्यात्मिक विकास करना
आध्यात्मिक इच्छाएं हमें अपने जीवन में अर्थ और उद्देश्य प्रदान करती हैं और हमें अपने आत्मा के साथ जुड़ने में मदद करती हैं। ये इच्छाएं हमें अपने जीवन में शांति और आनंद प्राप्त करने में मदद करती हैं।
अपनी इच्छा पूर्ति के लोग अक्सर यह ५ मार्ग अपनाते हैं-:
१- कृपा - कृपा का आधार प्रेम है, जो हमसे प्रेम करता है वह हम पर कृपा करने में जरा भी संकोच नहीं करेगा । जब हम उसकी भक्ति करते हैं , तो वह हमें मनोवांछित फल देने की कृपा करता है । ध्यान दें कि इस मार्ग का अनुसरण करने से हमारी हमेशा उन्नति ही होगी ।
२- परिश्रम - परिश्रम का आधार है स्वयं पर विश्वास , जब हम पर किसी की कृपा नहीं होती , तब हम अपनी इच्छा पूर्ति परिश्रम करके पूरी करते हैं । इस मार्ग का अनुसरण करने से ना ही उत्थान होता है और ना ही पतन । हम जहां हैं वहीं रहेंगे
३- जुगाड़ - जब स्वयं में योग्यता ना हो तब लोग इस मार्ग का अनुसरण करते हैं । हो सकता है कि इस मार्ग का अनुसरण करने पर कुछ समय के लिए आपके अनुकूल परिस्थितियों हो जाएं किंतु इस मार्ग में स्थायित्व नहीं है । आपकी स्थिति कभी भी विपरीत हो सकती है ।
४- छल - जब स्वयं में योग्यता ना हो तब लोग इस मार्ग का अनुसरण करते हैं । छल का आधार है अतृप्त इच्छाएं, जब हम पर किसी की कृपा ना हो और हम परिश्रम करने को भी तैयार ना हो , तब हम अपनी इच्छा पूर्ति छल से पूरी करते हैं । ध्यान दें कि इस मार्ग का अनुसरण करने से हमारा पतन होगा ।
५- बल द्वारा - इसका आधार अनियंत्रित इच्छाएं होने के साथ-साथ अनियंत्रित शक्ति होना है । इससे समाज का शोषण होने के साथ-साथ स्वयं का पतन भी होता है ।
Q- किसी की कृपा कैसे प्राप्त हो ?
यह कार्य बड़ा ही मुश्किल है , किसी की कृपा प्राप्त करने के लिए उसे जुड़ना अनिवार्य है और जुड़ने के लिए उससे प्रेम और उसके प्रति समर्पण अनिवार्य है , इसके पश्चात उसके आयाम के नियमों का अनुसरण करना अनिवार्य है , तब जाकर वे आप से जुड़ते हैं और अपनी कृपा बरसाते हैं । अब यह हम पर निर्भर करता है कि अपने जीवन में हमें क्या चाहिए और हम किससे जुड़ना चाहते हैं । जीवन के जिस उम्र में यह सूत्र समझ में आ जाए उसके बाद ही वास्तविक उन्नति संभव होगी ।
चाहे भौतिक जगत हो या आध्यात्मिक जगत, हर जगह यही नियम लागू होते हैं ।
👉कुछ लोग अपने इगो ( अहम् ) के कारण समर्पण भाव नहीं रखते इसलिए उनकी उन्नति नहीं होती ।