Tuesday, August 15, 2023

कुछ प्रश्न जो आपके ज्ञान को दर्शाते हैं

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कुछ प्रश्न गृहस्थ भक्तों और साधकों के लिए

*👉यह प्रतियोगिता आज से 3 दिन तक ही मान्य।*
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प्रिय आत्मन  
अभी तक समाज के शोध और अध्ययन से जो श्रेणी प्राप्त हुई हैं तो इस प्रकार है। इसमें सबसे ऊपर भक्तों की श्रेणी को रखा गया है दूसरे नंबर पर गृहस्थ लोग हैं, और अंत में तीसरे नंबर पर साधक है। इससे भी अलग कोई श्रेणी हो तो उस विषय पर अपने विचार अवश्य रखें। और यदि दी गई श्रेणी में आप नहीं आते तो अपनी श्रेणी अवश्य बताएं। 
दी गयी श्रेणी में अपने श्रेणी को चुने एवं उसी के अनुसार अपने प्रश्नों के उत्तर भरकर सबमिट करें। प्रश्नावली अनदेखा करने वाले को  (- 50 अंक ) दिए जाएंगे!  एवं प्रयास करने वाले को पूर्ण अंक प्राप्त होंगे।  धन्यवाद

👉-भक्तों के लिए

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👉2-गृहस्थ लोगों के लिए

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👉 3-साधकों के लिए

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Saturday, August 5, 2023

कुछ प्रश्नों के माध्यम से साधकों के अनुभव

Ishwa spiritual motivation
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👉"मेरे अनुभव मेरे विचार"
सिर्फ साधकों के लिए
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प्रिय आत्मन् 
वर्तमान समय में सत्य जानने के लिए हमारे पास सिर्फ दो ही साधन हैं। 1- अपरोक्ष अनुभव 2-  तर्क 
जैसा कि आप सभी जानते हैं कि समाज में प्रत्येक व्यक्ति अपने अनुभव को ही सत्य मानता है, और यदि वह अनुभव कई अन्य लोगों के अनुभवों से मेल खाता है, तब यह संभावना बन जाती है कि वह वास्तविक सत्य हो l किंतु जब तक कोई अनुभव तर्क की कसौटी पर नहीं कसा जाता तब तक उसे सत्य ना माने l आइए कुछ प्रश्नों के माध्यम से जानते हैं कि हमारे अनुभव सत्य के कितने करीब हैं l देखें प्रश्न इस प्रकार हैं

१ - क्या- पूछने पर परिभाषा बतानी चाहिए l

२ - क्यों- पूछने पर कारण बताना चाहिए l

३ - कैसे- पूछने पर प्रक्रिया बतानी चाहिए l

४- कब- पूछने पर समय बताना होगा ।

५ - कहाँ - पूछने पर स्थान बताना चाहिए l

६ - कौन- पूछने पर व्यक्ति बताना चाहिए l

*👉दी गई लिंक को ओपन करें एवं पूछे गए प्रश्नों का उत्तर अपनी समझ अनुसार भरकर सबमिट करें ।*

                 ( भाग- 1) 
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                 ( भाग- 2 ) 

https://surveyheart.com/form/64c898effbcfb165e7df50df

                 ( भाग- 3 ) 
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Tuesday, August 1, 2023

ज्ञान के प्रकार

*समाज में ज्ञान के प्रकार*
*1- स्वयं के पेट भरने का ज्ञान-* _जैसा कि हम अक्सर देखते हैं यह गुण  ज्यादातर पशुओं में ही पाया जाता है किंतु कभी-कभी यह भी देखा गया है कि कुछ मनुष्यों में भी यह गुण पाए जाते हैं ।_
*2-स्वयं की इच्छा पूर्ति का ज्ञान-* _ऊपर लिखे पहले गुण के साथ-साथ हमें अपनी इच्छा पूर्ति कैसे करनी है यह गुण भी इस स्तर के मनुष्यों में  पाया जाता है । इस स्तर के लोग इच्छा पूर्ति के लिए सही गलत में भेद नहीं करते । यह समाज में किसी की कोई फिक्र नहीं करते और अपनी इच्छाओं को ही अधिक महत्व देते हैं ।_
*3-समाज व्यवहारिकता एवं रिश्तेदारी निभाने का ज्ञान -* _इस स्तर पर लोगों की मानसिक स्थिति में बहुत बदलाव आ जाता है , यह अपनी जाति समाज और मित्र जनों के साथ कैसा व्यवहार करना है यह सीख लेते हैं और उसी के अनुसार कार्य करते हैं ।_
*4-मुक्ति का ज्ञान-* _संसार की भीड़ से हटकर कुछ महापुरुष ऐसे भी होते हैं जो इस विषय का ज्ञान रखते हैं और उनसे विनय पूर्वक पूछने पर वह समाज कल्याण के लिए यह ज्ञान लोगों में भी बांटते हैं ।_
*5-ज्ञान से भी मुक्ति-* _इन्हें हम मुक्त पुरुष भी कह सकते हैं, यह बालवत रहते हैं अर्थात इनका स्वभाव एक अबोध बालक की तरह होता है । यह सभी प्रकार के ज्ञान अज्ञान से मुक्त रहते हैं । इनको समझ पाना हर संसारी व्यक्ति के लिए संभव नहीं है ।_

kundali gyan

प्रिय आत्मन् 
आपकी प्रसन्नता के लिए यह विश्लेषण आपको भेज रहा हूं । यदि आप इस फल कथन से संतुष्ट हो तो ही आगे कार्य करें अन्यथा स्वविवेक से निर्णय लें।मानव जीवन को सुखमय बनाने के लिए समाज में बहुत से विकल्प हैं । कुछ लोग चमत्कार में विश्वास रखते हैं तो कुछ लोग सिद्ध स्थानो में । कुछ लोग ज्योतिष में यकीन रखते हैं। कुछ लोग टोने टोटके और कुछ तंत्र क्रिया में विश्वास रखते हैं । कुछ लोग चमत्कारिक शक्तियों में एवं कुछ लोग सिद्ध गुरुओं में ! जिनको जैसी सुविधा वैसा मार्ग अपनाते हैं । यदि आप ज्योतिष विद्या से अपने जीवन में अनुकूल परिणाम प्राप्त करना चाहते हैं तो ज्योतिष का प्रारंभिक ज्ञान होना आवश्यक है l ज्योतिष एक गूढ़ विद्या है और ज्योतिष विद्या से अपने अनुकूल परिणाम प्राप्त करने के लिए ज्योतिष के बहुत से नियमों का पालन करना आवश्यक है जिसे कोई भी व्यक्ति ज्योतिष के सूत्रों को समझे बिना नहीं कर सकता । यदि ज्योतिष विषय की प्रारंभिक जानकारी (ज्योतिष विद्या के नियम और सिद्धांतों पर कार्य करती है ) नहीं है ,और रुचि नहीं है ,तो यह सब व्यर्थ है  l हमें यहां अपना समय बर्बाद नहीं करना चाहिए  l अपने अनुकूल विषयों से जुड़ना ही हमारे लिए श्रेष्ठ रहेगा l 

👉आप की जानकारी के लिए एक बात और बताना चाहूंगा कि हम जो फल कथन करते हैं वह मुख्य कुंडली एवं लग्न कुंडली के द्वारा ही करते हैं जिससे सटीक फल कथन संभव होता है वर्ना तो एक जन्म समय में एक राशि के बहुत से लोग पैदा होते हैं सिर्फ राशि से फल कथन करना इतना संभव नहीं होता है और हमें सटीक परिणाम भी प्राप्त नहीं होते हैं ।_

राशिफल क्या होता है?

किसी भी राशि के लिए ग्रह-नक्षत्रों की चाल से मिलने वाला शुभ-अशुभ फल राशिफल कहलाता है। यह दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक, मासिक या फिर वार्षिक रूप में होता है। राशिफल के माध्यम से व्यक्ति अपने भविष्य की घटनाओं का अनुमान लगा सकता है।

दैनिक राशिफल

दैनिक राशिफल या आज का राशिफल, दैनिक भविष्यवाणी होती है और यह भविष्यवाणी चंद्र ग्रह की गणना पर आधारित होती है। क्योंकि चंद्रमा का राशि परिवर्तन एक-दो दिनों के भीतर होता है। दैनिक राशिफल सबसे लोकप्रिय राशिफल है। इसकी लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अखबारों में सबसे ज्यादा पढ़ा जाने वाला दैनिक राशिफल होता है।

ज्योतिष क्या है?

ज्योतिष एक विज्ञान है, जिसे ज्योतिष शास्त्र या ज्योतिष विज्ञान के नाम से जाना जाता है। यह वेदों के छह अंगों शिक्षा, कल्प, व्याकरण, ज्योतिष, छन्द और निरूक्त में से एक है। ज्योतिष विज्ञान में ग्रहों और नक्षत्रों का अध्ययन कर भविष्य में होने वाली घटनाओं का अध्ययन किया जाता है। मनुष्यों के कल्याण के लिए ज्योतिष शास्त्र की महत्वपूर्ण भूमिका है।

राशि क्या है?

ज्योतिष विज्ञान के अनुसार, आकाश मंडल में एक कल्पित राशिचक्र हैं, जिसमें 12 राशियां (मेष, वृष, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु, मकर, कुंभ, मीन) हैं। इन 12 राशियों के अपने स्वभाव, गुण एवं दोष होते हैं। किसी व्यक्ति की लग्न राशि, चंद्र राशि, सूर्य राशि, नाम राशि हो सकती है। जन्म कुंडली में जो राशि पहले भाव में होती है उसे लग्न राशि कहते हैं। वहीं जिस राशि सूर्य बैठा हो वह सूर्य राशि और इसी प्रकार चंद्रमा जिस भी राशि में स्थित हो वह चंद्र राशि कहलाती है। नाम के पहले अक्षर से निकलने वाली राशि नाम राशि होती है।

कुंडली मिलान क्या है?

कुंडली मिलान एक ज्योतिषीय प्रक्रिया है, जिसे वर-कन्या के विवाह से पूर्व किया जाता है। इसमें वर-वधु की कुंडली के बीच की सामंजस्यता को देखा जाता है। कुंडलियों को देखकर दोनों के बीच 36 गुणों को मिलाया जाता है। यदि दोनों के बीच 36 में से 18 या इससे अधिक गुण मिल जाते हैं तो ही दोनों के बीच विवाह का विचार किया जाता है और उसे सफल माना जाता है।


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प्रथम चरण

"पूर्ण जीवन, जीवन सार, जीवन की यात्रा"
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प्रिय आत्मन
अपने अभी तक के जीवनकाल को अनुभव अनुसार इसे निम्न बिंदुओं में बांटा है । आप  अपनी सुविधा अनुसार इस क्रम को आगे पीछे कर सकते हैं । हो सकता है मुझसे कोई महत्वपूर्ण बिंदु छूट गये हो इसलिए आप अपने अनुभव अनुसार वह बिंदु इसमें जोड़ सकते हैं । एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि आप अपनी परिभाषाएं आने के लिए सदैव स्वतंत्र हैं ।

हम सब का यह अनुभव रहा है कि हमें बाहर के लोगों की बाहर की दुनिया की बहुत जानकारी होती है किंतु हमें स्वयं के बारे में कोई जानकारी नहीं होती । तो आईए इस कार्यक्रम के माध्यम से जानते हैं कि हमें स्वयं के बारे में कितनी जानकारी है ?

*स्वयं का जीवन दर्शन*- जैसा कि हम सभी जानते हैं हमारी जीवन यात्रा हमारी जन्म से प्रारंभ होकर पूर्ण ज्ञान प्राप्ति तक चलती है ।
जब तक पूर्ण ज्ञान नहीं हो जाता तब तक जन्म मरण का चक्र यूं ही शतत् चलता रहता है।

निम्न बिंदुओं के अंतर्गत अपने अनुभव के आधार पर व्याख्या करें । व्याख्या क्या आधार पांच प्रश्न रहेंगे - कब, क्यों, कैसे, कहां ,कितना
१-जन्म -
२-शिक्षा -
३-काम/ धंधा या व्यापार-
४-विवाह-
५-वैराग्य या जिज्ञासा-
६- सत्य की खोज-
७-गुरु / साधन-
८-साधना एवं उपासना-
९-पूर्ण ज्ञान की प्राप्ति -
१०-अपनी क्षमता अनुसार समाज में सहयोग-
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वर्तमान समय की सबसे बड़ी समस्या: दोषारोपण की प्रवृत्ति

प्रणाम मित्रो वर्तमान समय में मनुष्य की सबसे बड़ी समस्या यह है कि वह अपने जीवन में उत्पन्न होने वाली अधिकांश समस्याओं और विकृतियों के लिए स्...