"पूर्ण जीवन, जीवन सार, जीवन की यात्रा"
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प्रिय आत्मन
अपने अभी तक के जीवनकाल को अनुभव अनुसार इसे निम्न बिंदुओं में बांटा है । आप अपनी सुविधा अनुसार इस क्रम को आगे पीछे कर सकते हैं । हो सकता है मुझसे कोई महत्वपूर्ण बिंदु छूट गये हो इसलिए आप अपने अनुभव अनुसार वह बिंदु इसमें जोड़ सकते हैं । एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि आप अपनी परिभाषाएं आने के लिए सदैव स्वतंत्र हैं ।
हम सब का यह अनुभव रहा है कि हमें बाहर के लोगों की बाहर की दुनिया की बहुत जानकारी होती है किंतु हमें स्वयं के बारे में कोई जानकारी नहीं होती । तो आईए इस कार्यक्रम के माध्यम से जानते हैं कि हमें स्वयं के बारे में कितनी जानकारी है ?
*स्वयं का जीवन दर्शन*- जैसा कि हम सभी जानते हैं हमारी जीवन यात्रा हमारी जन्म से प्रारंभ होकर पूर्ण ज्ञान प्राप्ति तक चलती है ।
जब तक पूर्ण ज्ञान नहीं हो जाता तब तक जन्म मरण का चक्र यूं ही शतत् चलता रहता है।
निम्न बिंदुओं के अंतर्गत अपने अनुभव के आधार पर व्याख्या करें । व्याख्या क्या आधार पांच प्रश्न रहेंगे - कब, क्यों, कैसे, कहां ,कितना
१-जन्म -
२-शिक्षा -
३-काम/ धंधा या व्यापार-
४-विवाह-
५-वैराग्य या जिज्ञासा-
६- सत्य की खोज-
७-गुरु / साधन-
८-साधना एवं उपासना-
९-पूर्ण ज्ञान की प्राप्ति -
१०-अपनी क्षमता अनुसार समाज में सहयोग-
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Tuesday, August 1, 2023
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