प्रिय आत्मन्
अभी भारत देश में लोगों को बौद्धिक रूप से पूर्ण विकसित होने में कई हजार वर्षों का समय लगेगा ! करण की वह अभी अहम् भाव , राग और द्वेष से मुक्त नहीं हुआ है , अपनी ही बनाई हुई मान्यताओं और अंधविश्वास में बंधा हुआ है , उसकी बुद्धि भौतिक लाभ और चमत्कार से ऊपर कुछ सोच ही नहीं पाती , इस कारण उसे अन्य विषयों का ना तो ज्ञान है और ना ही उनमें रुचि । यही कारण है कि कई बार मेरी कही हुई बातें लोगों की समझ में नहीं आती और फिर भी मुझसे दोबारा नहीं मिलते ।
अपना कीमती समय निकाल कर लेख पढ़ने के लिए धन्यवाद 🙏
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