प्रिय आत्मन्
पूर्वकाल की दिनचर्या प्रकृति के अनुरूप थी । दिनचर्या जितनी अधिक प्रकृति के अनुरूप, उतनी ही वह स्वास्थ्य के लिए पूरक होती है । आज वह ऐसी नहीं है, इसलिए मनुष्य नाना प्रकार की व्याधियों से त्रस्त हो गया है ।
अतः हम सभी को यह ध्यान में रखना चाहिए कि ‘विज्ञान द्वारा निर्मित सुख-सुविधाओं से नहीं, अपितु अध्यात्म के आधार पर ही मनुष्य वास्तव में सुखी जीवन व्यतीत कर सकता है ।
दिनचर्या क्या है -
प्रातः उठने से लेकर रात को सोने तक किए गए कृत्यों को एकत्रित रूप से ‘दिनचर्या’ कहते हैं । इसी के अंतर्गत नित्य कर्म आते हैं । ‘नित्यकर्म’ वे हैं, जिन्हें करने से कोई पुण्य की प्राप्ति नहीं होती परंतु न करने से पाप का संचय होता है । प्रारंभ में हम दिनचर्या के कुछ नियम डालेंगे जैसे समय से उठाना , नित्य प्राणायाम , सादा और सुपाच्य भोजन , ईष्ट के मंत्रों का जाप और सत्संग शामिल है ,समय से सोना ।
संतुलित दिनचर्या क्यों आवश्यक है-
दिनचर्या के नियमों का पालन करना ही अध्यात्म की नींव है । नियम के पालन से हम प्रकृति के करीब आकर प्रकृति से जुड़ते हैं और प्रकृति हमें परमात्मा से जोड़ती है ।
दिनचर्या से लाभ-
जब हम कोई भी काम प्रतिदिन नियमित करते हैं नियमित रूप से करते हैं तो उसे एक ऊर्जा बनती है और यही ऊर्जा हमारे काम आती है दिनचर्या पालन करने से हमारा मनोबल हमेशा बढ़ा हुआ रहता है । हम ऊर्जा से भरे रहते हैं और एक अच्छा जीवन जीते हैं किसी भी काम को लेकर मानसिक दबाव नहीं रहता यदि कोई विपरीत परिस्थिति आ जाए तो उसमें हम हिम्मत नहीं हारते ।
जो दिनचर्या का पालन नहीं करते उन्हें हमेशा शारीरिक आलस्य घेरे रहता है जिसके कारण वह कभी भी समय पर अपना कोई काम नहीं कर पाते और अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाते ।
एक संतुलित दिनचर्या में क्या-क्या होना चाहिए ?
संतुलित दिनचर्या में वह सभी कर्म सम्मिलित हैं जिनसे हमारा संपूर्ण विकास हो । जैसे- शरीर को स्वस्थ रखने के लिए व्यायाम एवं उचित खान-पान आवश्यक है । मन को स्वस्थ रखने के लिए प्राणायाम और बुद्धि को स्वस्थ रखने के लिए सत्संग जप , तप, स्वाध्याय होना चाहिए । ध्यान दें कि यदि हमारी दिनचर्या संतुलित नहीं होगी तो जीवन में हमें कोई सुख संतुलित रूप से और समय पर प्राप्त नहीं होगा ।
👉 समाज में दो प्रकार के लोग पाए जाते हैं ! एक दिनचर्या का अनुसरण करने वाले जिन्हें हम ऋषि कहते हैं । जो विश्व कल्याण के लिए सदैव कार्यरत रहते हैं ।
दूसरे दिनचर्या का अनुसरण ना करने वाले जिन्हें मर्यादाओं का कोई ज्ञान नहीं है और ना ही यह जीवन में कोई नियम मानते हैं, इन्हें हम भौतिकवादी लोग कहते हैं ।
उपरोक्त दोनों में स्पष्ट रूप से हमें अंतर ज्ञात होना चाहिए जिससे हमें आगे अध्ययन में समस्या ना हो । अपना मूल्यांकन स्वयं करें कि आप किस श्रेणी के अंतर्गत आते हैं । वैसे तो जो जहां है ठीक है, हम किसी भी श्रेणी में हो इसमें कोई बुराई वाली बात नहीं है किंतु हमारा लक्ष्य क्या है यह जानना आवश्यक है
नोट- दिए गए लेख को अच्छी तरह पढ़े ! अपनी जिज्ञासा शंकाओं के समाधान के लिए चर्चाओं में शामिल हों । इसके बाद प्रश्न पत्र में पूछे गए प्रश्नों का उत्तर अपनी समझ अनुसार भरकर सबमिट करें । इसके लिए आपको 2 दिन का समय मिलेगा
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