प्रिय आत्मन्
जैसा कि आप सभी जानते हैं , मानव जीवन को सुखमय बनाने के लिए समाज में बहुत से विकल्प है ! जैसे- कुछ लोग चमत्कारिक सिद्ध गुरुओं में विश्वास रखते हैं तो कुछ लोग तंत्र मंत्र और टोने- टोटके में विश्वास रखते हैं ! कुछ लोग ज्योतिष वास्तु जैसी विद्या में विश्वास रखते हैं तो वहीं कुछ लोग तामसिक विद्या जैसे तंत्र क्रिया आदि में विश्वास रखते हैं! जिसको जैसी सुविधा वैसा मार्ग अपनाना चाहिए । यदि आप ज्योतिष विद्या से अपने जीवन में अनुकूल परिणाम प्राप्त करना चाहते हैं तो ज्योतिष का प्रारंभिक ज्ञान आवश्यक है । यदि ज्योतिष विषय की प्रारंभिक जानकारी और रुचि नहीं है तो यह सब आपके लिए व्यर्थ है । आपको यहां अपना समय बर्बाद नहीं करना चाहिए । आपको अपने अनुकूल विषयों से जुड़ना ही लिए श्रेष्ठ रहेगा ।
अध्यात्म सागर ज्योतिष वास्तु अनुसंधान केंद्र
🌼〰️🌼〰️🌼〰️🌼〰️🌼
ज्योतिष के माध्यम से अपनी सभी समस्याओं का समाधान पाएं
👉हमारी सेवाएं
अपनी आवश्यकतानुसार अपनी कुंडली बनवाएं मात्र 1100/- रूपये में
👉स्वास्थ्य कुंडली- जब आपके किए हुए सारे उपाय और दवाइयां व्यर्थ हो जाए।
👉धन कुंडली- धन संबंधी समस्याओं के समाधान हेतु ।
👉भाग्य कुंडली - क्यों आपको बार- बार निराशा का सामना करना पड़ता है ? क्यों आप का सही समय पर भाग्य का साथ नहीं मिलता ? क्या कहता है आपका भाग्य ? यह जानने हेतु । 👉विवाह कुंडली- मंगला मंगली दोष निवारण एवं कैसा रहेगा हमारा दांपत्य जीवन ?
👉वर्ष कुंडली - वर्तमान में चल रही समस्याओं के निवारण हेतु जन्म तारीख आने से 2 माह पहले बनाई जाती है।
👉 महादशा कुंडली - वर्तमान में चल रही समस्याओं के समाधान हेतु उपाय सहाब कुंडली बनाएं !
👉प्रश्न कुंडली- अपने किसी भी समस्या के समाधान हेतु ।
👉श्रीमद्भगवद्गीता कोर्स- जीवन के अनसुलझे रहस्यों को जानने के लिए ।
👉ऑनलाइन राम नाम लेखन-अब आपके मोबाइल पर ।
👉 सशुल्क ज्योतिष सलाह हेतु
व्हाट्सएप करें -9752 420 899
〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ 〰️ 〰️ 〰️ 〰️
आप सब की जानकारी के लिए ज्योतिष संबंधी कुछ आवश्यक प्रश्न एवं उनके उत्तर जिन्हें जानन सभी के लिए अनिवार्य है l
1-ज्योतिष विद्या क्या है ?
-ज्योतिष एक प्राचीन भारतीय विद्या है, जिसके अंतर्गत पृथ्वी एवं पृथ्वी पर रहने वाले मनुष्यों पर, ग्रहों और तारों के शुभ तथा अशुभ प्रभावों का अध्ययन किया जाता है। ज्योतिष विद्या के जानकारों का विश्वास है कि खगोलीय पिंडों की चाल और उनकी स्थिति या तो पृथ्वी को सीधे तरीके से प्रभावित करती है या फिर किसी प्रकार से मानवीय पैमाने पर या मानव द्वारा अनुभव की जाने वाली घटनाओं से सम्बद्ध होती है।
2- ज्योतिष विद्या का ज्ञान सभी के लिए क्यों आवश्यक है ?
-ज्योतिषम् नेत्रमुच्यते'- इसका अर्थ होता है कि वेद को समझने के लिए, सृष्टि को समझने के लिए 'ज्योतिष शास्त्र' को जानना आवश्यक है। ज्योतिष को वेदों का नेत्र कहा गया है। कहते हैं कि ऋग्वेद में ज्योतिष से संबंधित 30 श्लोक हैं, यजुर्वेद में 44 तथा अथर्ववेद में 162 श्लोक हैं। ज्योतिष को 6 वेदांगों में शामिल किया गया है। ये 6 वेदांग हैं- 1. शिक्षा, 2. कल्प, 3. व्याकरण, 4. निरुक्त, 5. छंद और 6. ज्योतिष। ज्योतिष निश्चित रूप से विज्ञान है, लेकिन विज्ञान की तरह इसकी भी सीमाएं हैं। विज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों में लगातार अनुसंधान चल रहे हैं जबकि ज्योतिष में ऐसा नहीं है। ज्योतिषी अनुसंधान करने की बजाय इसे धन कमाने का साधन बनाए हुए हैं। इसे अंधविश्वासों से जोड़ कर दुख दूर करने के उपायों के नाम पर लोगों को लूटा जाता है। इसलिए हमारा आप सभी को यह संदेश है कि किसी भी प्रकार के अंधविश्वास में ना पढ़कर शुद्ध ज्योतिष विज्ञान को जाने और उसके सूत्रों को अपने जीवन में अपनाएं।
3-ज्योतिष का हमारे जीवन में क्या उपयोग है ?
-ज्योतिष का उपयोग स्वयं के कर्म चक्र को समझने के लिए किया जाता है। ज्योतिष में सभी चीजें आपस में जुड़ी हुई हैं। हर चीज या जीवन में एक ऊर्जा होती है जो एक दूसरे से संबंधित होती है और अक्सर इसका प्रभाव होता है। कई ज्योतिषी आपके वर्तमान जीवन में हो रही घटना को सही ठहराने के लिए आपके पिछले जन्म के कर्मों के बारे में विश्लेषण करते हैं। आपकी जन्मपत्री यह जानने के लिए एक मार्गदर्शक के रूप में काम करती है कि आपकी ग्रह दशा कैसी है और यह आपके जीवन के प्रत्येक चरण को कैसे प्रभावित करेगी।
ज्योतिष शास्त्र में हर ग्रहों की विशेषताएं बताई गई हैं. कुछ ग्रह योग हानि कराते हैं जबकि कुछ धन लाभ कराते हैं. ग्रहों की स्थिति की प्रभाव राशि के माध्यम से हर व्यक्ति पर पड़ता है. आइए जानते हैं कि ज्योतिष शास्त्र में किन ग्रहों को बेहद लाभकारी माना जाता है। ज्योतिष ग्रहो व नक्षत्रों की गड़नाओ पर आधारित विज्ञान है इसके आधार पर आपको जीवन मे होने वाली अच्छी व बुरी घटनाओं के बारे में पहले से पता चल जाता है। जिससे आपको बुरे समय आने से पूर्व ही सचेत होने का समय मिल जाता है व अच्छे समय का पूर्ण लाभ मिल जाता है ।
4-ज्योतिष के सूत्र हमारे जीवन में कैसे काम करते है ?
-प्राचीन काल में हमारे सिद्धों द्वारा इन श्लोकों का गहन अध्ययन और बोध किया गया है। इसलिए, उनके माध्यम से हमने ब्रह्मांड और हमारे जीवन को प्रभावित करने वाली ऊर्जा तरंगों के बारे में सीखा। उन्होंने हमारे जीवन में ग्रहों की नकारात्मक ऊर्जा को फैलाने और अच्छी ऊर्जाओं का आशीर्वाद पाने के व्यावहारिक तरीके सुझाए। ज्योतिष हमें हमारे ग्रहों द्वारा हमारे लिए निर्धारित जीवन से बेहतर जीवन की तलाश करने के लिए मार्गदर्शन करता है। प्राचीन काल में सिद्धों ने ब्रह्मांडीय ऊर्जा को समझा था और आम आदमी की भलाई के लिए इसके प्रभावों की गणना की थी। ऐसा कहा जाता है कि महर्षि पराशर ने इस प्राचीन वैदिक विज्ञान की भविष्यसूचक ज्योतिष के रूप में व्याख्या प्रदान की है ताकि मनुष्य लाभकारी शक्तियों का आशीर्वाद प्राप्त कर सके और खुद को हानिकारक शक्तियों से बचा सके।
5-ज्योतिषीय उपाय कैसे काम करते हैं ?
ज्योतिषीय उपचारों के पीछे अंतर्निहित विचार यह है कि ज्योतिष में प्रत्येक ग्रह विशिष्ट गुणों से जुड़ा है, और किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में उसकी स्थिति उस व्यक्ति के जीवन में कुछ शक्तियों और कमजोरियों का संकेत दे सकती है। इसलिए, यदि कोई ग्रह चुनौतीपूर्ण स्थिति में है, तो यह माना जाता है कि उस ग्रह के प्रतिकूल प्रभावों को विशिष्ट उपायों के माध्यम से संतुलित या बेअसर किया जा सकता है। हालाँकि, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि ज्योतिषीय उपचारों की प्रभावशीलता मुख्य रूप से विश्वास और विश्वास पर आधारित है। कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण इस विचार का समर्थन नहीं करता है कि ज्योतिषीय उपचार ग्रहों को प्रभावित कर सकते हैं या किसी व्यक्ति के जीवन में घटनाओं के पाठ्यक्रम को बदल सकते हैं। फिर भी, बहुत से लोग इन उपचारों की शक्ति में विश्वास करते हैं और अपनी भलाई बढ़ाने और मानसिक शांति पाने के लिए उनका उपयोग करते हैं। अंततः, ज्योतिषीय उपचारों की प्रभावशीलता व्यक्ति की व्यक्तिगत मान्यताओं और उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की इच्छा पर निर्भर करती है।
6-ज्योतिष विद्या से हम कैसे लाभ ले सकते हैं ?
-जीवन का अधिकतम लाभ उठाने के लिए पहला कदम सचेत जागरूकता पैदा करना है। वैदिक ज्योतिष हमें अपने भीतर से जुड़ने और वर्तमान क्षण को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करता है। अपनी जन्म कुंडली के ब्रह्मांडीय लेंस के माध्यम से अपनी शक्तियों, कमजोरियों और इच्छाओं को समझकर, हम आत्म-जागरूकता की गहरी भावना विकसित करते हैं। सचेत जागरूकता हमें वर्तमान में जीने की अनुमति देती है, हमारे चारों ओर मौजूद सुंदरता और आश्चर्य की सराहना करती है। यह हमें सचेत विकल्प चुनने के लिए सशक्त बनाता है जो हमारी आत्मा के उद्देश्य के अनुरूप होता है, अर्थ और पूर्णता के जीवन को बढ़ावा देता है। आत्म-सुधार के अवसरों की तलाश करके, चाहे वह शिक्षा, कार्यशालाओं या आध्यात्मिक प्रथाओं के माध्यम से हो, हम अपने क्षितिज का विस्तार करते हैं और अपनी वास्तविक क्षमता को उजागर करते हैं। व्यक्तिगत विकास की खोज हमारे आत्मविश्वास को बढ़ाती है और हमें साहस और उत्साह के साथ जीवन के अवसरों को अपनाने के लिए सशक्त बनाती है। ऐसी गतिविधियों में संलग्न होकर जो हमारी अनूठी प्रकृति के अनुरूप हैं और हमें खुशी देती हैं, हम सकारात्मक ऊर्जाओं को चुम्बकित करते हैं जो हमारी आत्माओं को ऊपर उठाती हैं और प्रचुरता को आकर्षित करती हैं। चाहे वह रचनात्मक शौक पूरे करना हो, किसी ऐसे उद्देश्य के लिए स्वेच्छा से काम करना हो जिसके बारे में हम भावुक हैं, या प्रकृति में समय बिताना, सकारात्मक ऊर्जा का विकास हमारी भलाई को बढ़ाता है और हमारे जीवन के अनुभवों में गहराई और समृद्धि जोड़ता है।
-यह अन्य नियम और अपनाएं
एक दिनचर्या विकसित करें:- एक दैनिक दिनचर्या बनाएं जिसमें काम, अध्ययन, व्यायाम, विश्राम और सामाजिक मेलजोल के लिए समय शामिल हो। अच्छी आदतें स्थापित करने के लिए अपनी दिनचर्या पर कायम रहें। योग को अपने अभ्यास में शामिल करना तनाव मुक्त करने वाली तकनीक हो सकती है और उत्पादकता बढ़ाने में मदद कर सकती है।
जरूरत पड़ने पर मदद लें: - साहसी बनें और जरूरत पड़ने पर मदद मांगें। चाहे वह किसी गुरु, शिक्षक या सहकर्मी से हो, सलाह और मार्गदर्शन मांगने से आपको सीखने और बढ़ने में मदद मिल सकती है। मकर राशि के जातकों के लिए यह मुश्किल हो सकता है, जो अपने आवेग के लिए जाने जाते हैं।
सकारात्मक रहें:- सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखें और अपनी ताकत और उपलब्धियों पर ध्यान केंद्रित करें। इससे आपको प्रेरित रहने और बाधाओं पर काबू पाने में मदद मिल सकती है। यह जीवन में सफलता के लिए सबसे अच्छे ज्योतिष उपायों में से एक है।
लगातार सीखें और आगे बढ़ें:- नए कौशल विकसित करने और अपने क्षेत्र में बने रहने के लिए निरंतर शिक्षा और प्रशिक्षण जारी रखें। इससे आपको अपने करियर में आगे बढ़ने और सफलता हासिल करने में मदद मिल सकती है।
7- अनचाही समस्याओं से बचने के लिए अपनी आदतों में क्या सुधार करें?
1.झूठ न बोलें
लाल किताब के अनुसार कुंडली का दूसरा खाना बोलने और तीसरा खाना बोलने की कला से संबंध रखता है। पहला आपके पास क्या है और दूसरा आप उससे क्या कर सकते हैं? इससे संबंध रखता है। यदि आप झूठ बोलते हैं तो दूसरे और तीसरे भाव अर्थात खाने में अपने आप ही गलत असर चला जाता है।
2.झूठी गवाही न दें
झूठी गवाही देने का अर्थ है कि आप भी उन लोगों के पाप के भागी हैं। जरूरी नहीं है कि आपको कोर्ट में ही गवाही देना पड़े। कई बार ऐसा होता है कि आप अपने किसी की मदद करने के लिए झूठी गवाही दे देते हैं, जैसे किसी ने फोन करने पर कहा कि मेरे घर से फोन आए तो कह देना कि मैं तेरे साथ था या रमेश अभी मिलेगा तो तू सुरेश के खिलाफ गवाही दे देना कि हां मैंने देखा था कि सुरेश ने ही तेरे खिलाफ षड्यंत्र रचा है। इस तरह की कई बातें जीवन में घटित हो सकती हैं।
3.मुंह से अपशब्द नहीं निकालें
बहुत से लोग हैं, जो कि हर समय कटु वचन तो बोलते ही रहते हैं साथ ही वे मुंह से गाली भी देते रहते हैं। कहते हैं कि शरीर से कटु वचन और गाली तभी निकलती है जबकि व्यक्ति का मानसिक और शारीरिक बल क्षीण होता है। उसमें सोचने-समझने की शक्ति नहीं होती है।
4.निर्दयी न बनें
निर्दयता या क्रूरता करने से हृदय मर जाता है। किसी जीव व निर्दोष प्राणी के लिए भी मन में दया नहीं रहती है। क्रूर व्यक्ति और हिंसक पशु में कोई फर्क नहीं होता है। क्रूर व्यक्ति का मन खराब और खतरनाक होता है। किसी के लग्न, पंचम या नवम में मंगल या शनि का असर होता है, तो वह मंगल की जगह क्रूर और शनि से कुछ भी नहीं समझने वाला माना जाता है।
5.निश्वरवादी न बनें
लाल किताब के अनुसार ईश्वर पर विश्वास न रखने वाला अनीश्वरवादी और ईश्वरविरोधी होता है। ऐसा व्यक्ति भ्रमित और विरोधाभासी होता है, साथ ही वह किसी पर भी विश्वास नहीं रखने वाला भी होता है। ऐसे व्यक्ति को जीवन में कई प्रकार के दुखों का सामना करना होता है या जीवन के अंत में उसके समक्ष मात्र अंधकार होता है।
6.देवी-देवताओं में रखें श्रद्धा
देवी या देवता ईश्वर के प्रतिनिधि हैं। पराशक्तियां, अलौकिक शक्तियां या अच्छी आत्माएं आपके प्रत्येक कर्म को देख रही हैं। आप सच बोल रहे हैं या झूठ? आप अच्छा कार्य कर रहे हैं या बुरा कार्य? इन सबको देखने और सुनने वाले हैं देवी और देवता। जब आप मंदिर जाते हैं तो काली, दुर्गा, भैरव, शिव, महाकाल, राम, कृष्ण आदि के समक्ष खड़े होकर कुछ मांगते हो या उनकी प्रार्थना पूजा करते हो तब यह नहीं सोचते हो कि ये सभी देवी और देवता मेरे अच्छे और बुरे कर्म को जानते हैं?
7.कभी भी ब्याज का धंधा ना करें
लाल किताब के अनुसार ब्याज का धंधा करने से शनि का प्रकोप प्रारंभ हो जाता है। यह जीवन के किसी भी मोड़ पर दंड देता है। कभी-कभी यह भयंकर परिणाम देने वाला होता है, तो कभी यह संचित कर्म का हिस्सा बन जाता है। हालांकि इसके पीछे एक तथ्य यह है कि ब्याज का धंधा करने वाले को बद् दुआ ज्यादा मिलती है। उसकी बुद्धि रुपयों को लेकर अलग ही तरह की निर्मित हो जाती है। वह अपने परिवार पर भी यदि किसी भी प्रकार का खर्च करना है तो अपने नुकसान के बारे में सोचता है।
8.शाकाहारी बने रहें
वैसे यदि कुंडली में मंगल की स्थिति ठीक नहीं है, तो मांस-मछली नहीं खाना चाहिए। कहते हैं कि खून खराब होने से मंगल खराब हो जाता है। मंगल के खराब होने से जीवन से पराक्रम, कार्य और शांति नष्ट हो जाती है। खून के खराब होने से और भी कई तरह की समस्याएं जन्मती हैं। बद मंगल अपराधी बनाता है और नेक मंगल सेनापति, राजनेता, पुलिस ऑफिसर या बेहतर खिलाड़ी।
9.शराब न पिएं, एवं किसी भी प्रकार का नशा ना करें ।
जिस तरह से मांस खाने से मंगल खराब होता है, उसी तरह शराब पीने से शनि और राहु। राहु हमारे दिमाग की ताकत है, दिमाग नहीं। जैसे बादल में बिजली होती है, जो दिखाई नहीं देती लेकिन जब किसी पर गिरती है, तो जान ले लेती है। चमकी है तो अंधा कर सकती है।
क्या शराब दिमाग पर शासन नहीं करती?
बुध ग्रह हमारी बुद्धि का कारण है, लेकिन जो ज्ञान हमारी बुद्धि के बावजूद पैदा होता है उसका कारण राहु है। जैसे मान लो कि अकस्मात हमारे दिमाग में कोई विचार आया या आइडिया आया तो उसका कारण राहु है। राहु हमारी कल्पना शक्ति है, तो बुध उसे साकार करने के लिए बुद्धि कौशल पैदा करता है। राहु चलता है गुरु के कारण। राहु का खराब होना अर्थात व्यक्ति बेईमान या धोखेबाज होगा। ऐसे व्यक्ति की तरक्की की शर्त नहीं। राहु का खराब होना अर्थात दिमाग की खराबियां होंगी, व्यर्थ के दुश्मन पैदा होंगे, सिर में चोट लग सकती है। व्यक्ति मद्यपान या संभोग में ज्यादा रत रह सकता है। कहते हैं कि शराब जिंदा आदमी को शैतान बना देती है, लेकिन हम कहना चाहेंगे कि वह राहु बना देती है। राहु खराब तो गुरु भी नष्ट समझो।
10.पराई स्त्री के साथ संबंध ना बनाएं
यह कार्य सबसे बुरा है। इससे शुक्र खराब हो जाता है। इससे लक्ष्मी रुष्ट हो जाती है। अंतत: धन, सुख और वैभव नष्ट हो जाता है। यदि आपकी शादी हो गई है और फिर भी किसी अन्य स्त्री के साथ रमण करते हैं तो यह धोखा देने के साथ पाप भी है। यह नियम किसी ऐसी स्त्री पर भी लागू होता है, जो कि पराए मर्द के साथ संबंधों में है। लाल किताब के अनुसार यह सबसे बुरा कर्म होता है जिसके परिणाम व्यक्ति को आज नहीं, तो कल भुगतना ही होते हैं।
इसके अलावा और भी कई नियम हैं जिनका पालन अपने जीवन में अनिवार्य है, जैसे सलीके से कपड़े पहनना जरूरी है। कान और नाक को छिदवाना, नाक को हमेशा साफ रखना, दांतों को साफ रखना, कीकर की दातुन करना, संयुक्त परिवार में रहना, ससुराल से बैर न रखना रखना, कन्या, बहन और बेटी को प्रसन्न रखना और उन्हें मीठी चीजें देना, माता, भाभी और मौसी की सेवा करना। विधवा की सहायता करना, पत्नी की देखभाल करना, मेहतर को रुपए देना, नि:संतान से रुपए नहीं लेना, छत में छेद न करना, कुत्ते को न सताना, कुत्ते को रोटी देना, दक्षिणामुखी मकान में न रहना, घर में कच्ची जगह रखना, अपंगों और अंधों को भोजन खिलाना, चिड़ियों, मुर्गियों और पक्षियों को दाना डालना, बंदरों को गुड़ खिलाना, गाय को रोटी खिलाना, मंदिर में झाडू लगाना, हनुमान चालीसा पढ़ना आदि कई नियम हैं जिनका पालन करने से व्यक्ति पर किसी भी प्रकार का संकट नहीं आता है और उसे दैवीय सहायता मिलती है।
8-कैसे लोग ज्योतिष से लाभ नहीं ले पाते ?
-भविष्यवाणी सुनकर कोई भी कार्य अथवा कर्म ना करना असफलता का सूचक है, आपकी कुंडली में लिखे गए कार्यों को साहस ना होने के कारण केवल सुन के रखना एवं कुछ ना करना प्रमुख कारण है।
1-कार्य के अनुकूल पर्याप्त योग्यता का अभाव होने पर
2-रिस्क लेने की क्षमता ना होने पर, सब कुछ बैठे-बैठे घर में ही प्राप्त हो जाए ऐसी सोच होने पर
3-स्वयं के ऊपर विश्वास ना होने के कारण किसी की भी बताई बात पर विश्वास न करना
4-दिवास्वप्न यानी दिन में सपने देखने पर,
5-आलसी शंकालु होने पर भी ज्योतिष शास्त्र काम नहीं करता है क्योंकि ऐसे लोगों को दुनिया की कोई दवाई काम नहीं करती है।
-अपने जीवन में शुभ परिणाम एवं स्थायित्व के लिए दिनचर्या में यह नियम अवश्य डालें।
आइए जानते हैं कि आखिर किन चीजों को जीवन में अपनाने से ग्रहों की शुभता मिलेगी -
1. सूर्य —
सूर्यदेव की शुभता बढ़ाने और उनकी नाराजगी दूर करने के लिए कभी भी झूठ न बोलें। इस उपाय को करने से सूर्य से संबंधी दोष दूर हो जायेगा और उनके शुभ फल मिलने प्रारंभ हो जाएंगे। ध्यान रहे यदि आप झूठ बोलते हैं, जो कि अस्तित्व में नहीं है तो उस परिस्थिति में आपकी कुंडली से जुड़े सूर्य को उसका अस्तित्व पैदा करना पड़ेगा। ऐसे में सूर्य का काम बढ़ जाएगा और आपके संकट कम होने के बजाय बढ़ जायेंगे।
2. चंद्रमा —
चंद्र देव की शुभता पाने और उनसे जुड़े दोष दूर करने के लिए जितना ज्यादा हो सके साफ-सफाई पर ध्यान दें। न सिर्फ अपने आस-पास की साफ-सफाई रखें, बल्कि स्वयं भी साफ-सुथरे रहें और स्वच्छ कपड़े पहनें। इस उपाय से निश्चित रूप से चंद्र देव की कृपा मिलने लगेगी। ध्यान रहे कि चंद्रमा को सबसे ज्यादा डर राहू से लगता है और राहू अदृश्य ग्रह है। आम जिंदगी में राहू गंदगी का प्रतीक है। वहीं चंद्रमा जो हमारे आपके मन को आकर्षित करता है, राहू से डरता है। ऐसे में यदि आप स्वच्छता पर ध्यान देंगे तो चंद्र देव प्रसन्न होंगे।
3. मंगल —
मंगल ग्रह सूर्य का सेनापति है। हमारे भोजन में वह गुड़ का स्वरूप हैं। जबकि गेहूं सूर्य का प्रतीक है। मंगल ग्रह की कृपा पाने के लिए रविवार के दिन को गेहूं के आटे का चूरमा गुड़ डालकर बनाकर खाएं और दूसरों को भी खिलाएं। इस उपाय से मंगल देवता प्रसन्न होंगे। ध्यान रहे सूर्य गेहूं, मंगल गुड़ और चंद्रमा घी है, और इन तीनों में मित्रता है। ऐसे में जब ये तीनों मित्र मिलकर खुश होंगे तो उनकी प्रसन्नता की कुछ बूंदे तो आप पर भी गिरेंगी ही। कहने का तात्पर्य आपको शुभ परिणाम प्राप्त होंगे।
4. बुध —
बुध ग्रह का रंग हरा है। वह नौ ग्रहों में शारीरिक रूप से सबसे कमजोर और बौद्धिक रूप में सबसे आगे है। बुध ग्रह की शुभता पाने और उससे जुड़े दोष को दूर करने के लिए गाय को हरी घास खिलाएं। विदित हो कि पृथ्वी और गाय दोनों ही शुक्र ग्रह का प्रतिनिधित्व करते हैं, जबकि हरी घास बुध ग्रह का प्रतिनिधित्व करती है। आप तो जानते ही हैं कि अन्य पेड़ पौधों के मुकाबले घास कमजोर है। बिल्कुल वैसे ही, जैसे अन्य ग्रहों के मुकाबले बुध ग्रह कमजोर है। घास यानी बुध और धरती यानी शुक्र। ऐसे में गाय हरी घास खाकर खुश होती है औ आपको भी बुध की कृपा प्राप्त होती है।
5. बृहस्पति —
बृहस्पति को प्रसन्न करने के लिए तोते को चने की दाल खिलाने का उपाय काफी कारगर साबित होता है क्योंकि तोता बुध ग्रह का प्रतीक है और चने की दाल बृहस्पति ग्रह का। आप तो जानते हैं कि पारिवारिक विवाद के चलते बृहस्पति अपनी पत्नी तारा से नाराज रहते हैं। यह बात बुध को पसंद नहीं आती और वे इसे लेकर अपने पिता बृहस्पति से दुखी रहते हैं। ऐसे में जब आप यह उपाय करेंगे तो बुध स्वरूप तोता चने की दाल खाकर पेट भरेगा और खुश होगा तो बृहस्पति अपने आप प्रसन्न हो जाएंगे और आप पर अपनी कृपा बरसायेंगे।
6. शुक्र —
यदि आप शुक्र ग्रह के दोष से पीड़ित हैं तो आपको गाय को रोटी खिलाना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि सूर्य गेहूं है और शुक्र गाय है। कहते हैं न कि किसी बलवान व्यक्ति को स्वयं के अलावा किसी और को बड़े पद पर आसीन होना नहीं रास आता, उसी तरह शुक्र को भी सूर्य के अधीन रहना पसंद नहीं है। इसलिए जब आप उसके शत्रु सूर्य यानी गेहूं को गाय यानी शुक्र को खिलाएंगे तो निश्चित रूप से उनका गुस्सा खत्म हो जाएगा और आप पर उनकी कृपा बरसनी शुरु हो जायेगी।
7. शनि —
शनि न्याय के देवता हैं। श्रम के पुजारी हैं। ऐसे में यदि हम किसी मेहनत-मजदूरी करने वाले को तन, मन और धन से उचित सम्मान प्रदान करते हैं, उसकी मदद करते हैं तो शनिदेव प्रसन्न होंगे। उनकी कृपा से वो सभी दोष दूर हो जाएंगे जिनके कारण आपको परेशानी झेलनी पड़ रही है।
8. राहू —
राहु छाया ग्रह है, जो भोज देने से बहुत जल्दी शांत होता है। ऐसे में यदि आप राहु से संबंधित व्यक्ति जैसे कुष्ठ रोगी, निर्धन व्यक्ति, सफाई कर्मचारी आदि को भोजन आदि देकर प्रसन्न करते हैं तो आपको राहु की कृपा अवश्य मिलेगी। इस भोज में आप गरीब व्यक्ति को वनस्पति घी में बनी बड़ी साइज की पूड़ियां, गुड़ का हलवा, सब्जी के लिए छाछ के आलू और मूली का लच्छा रखें। निश्चित रूप से लाभ होगा।
9. केतु —
केतु ग्रह के दोष के कारण अक्सर व्यक्ति भ्रम का शिकार होता है। जिसके कारण उसे तमाम परेशानियां झेलनी पड़ती है। केतु के दुष्प्रभाव से बचने के लिए सबसे पहले आप अपने बड़े-बुजुर्ग की सेवा करना प्रारंभ कर दें। साथ ही कुत्ते को मीठी रोटी खिलाएं। इस उपाय से निश्चित रूप से सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे।
नोट - हमारी ज्योतिष सेवाएं प्राप्त करने के लिए नीचे दी गई लिंक को ओपन करके पूछे गए प्रश्नों का अपनी समझ अनुसार उत्तर लिखकर सबमिट करें l
https://surveyheart.com/form/64832f0e4b5a0e53efb244ba
भाग-2 विवाह
*संदेश*
〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️
*प्रिय आत्मन्*
*संसार में प्रत्येक बुद्धिमान व्यक्ति सुखी दांपत्य जीवन जीने के लिए जो भी संभव हो उसके लिए भरपूर प्रयासरत रहते हैं । इसके लिए हमारे वैदिक पद्धति में पहले से ही बहुत अच्छी व्यवस्था की गई है , जो कि कुंडली मिलान या अष्टकूट मिलान के नाम से विख्यात है । वर्तमान समय में सुखी दांपत्य जीवन एक सपनों की भांति हो गया है, वर्तमान समय में एक समस्या देखने को ज्यादा मिल रही है , कि लोग फर्जी कुंडली ( जिनके जन्म विवरण वास्तविक नहीं रहता ) बनवा कर फर्जी कुंडली मिलान करके सुखी दांपत्य जीवन की आशा रखते हैं । यह बिल्कुल ही गलत है । कई बार देखने में ऐसा भी आया है कि यदि वालों को लड़का या लड़की पसंद आ जाते हैं तो फर्जी कुंडली बनवा कर शादी करवा दी जाती है । यह बिल्कुल भी ठीक नहीं है । यह दोनों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ है । यदि आपके पास लड़के या लड़की की वास्तविक कुंडली नहीं है तो अपने कुलगुरू से इस बारे में विचार विमर्श अवश्य करें । वही आपको सही मार्गदर्शन देंगे ।_*
*कुंडली मिलान संबंधी सामान्य प्रश्न उत्तर*
*१- कुंडली मिलान क्या है ?*
-कुंडली मिलान की पूरी प्रक्रिया को वैदिक ज्योतिष में अष्टकूट मिलन कहा जाता है। यहाँ अष्ट का अर्थ है 8 और कूट श्रेणियां हैं। मापदंडों की ये आठ श्रेणियां जीवन के विभिन्न पहलुओं को दर्शाती हैं। इन 8 मापदंडों को दूसरे व्यक्ति के साथ एक की अनुकूलता को मापने के लिए माना जाता है। इनमें से प्रत्येक पैरामीटर में कुछ बिंदु होते हैं, जो कुल मिलाकर 36 गुण बनाते हैं। जितना अधिक गुण मेल खाते हैं, आप अपने जीवन में दूसरे व्यक्ति के साथ उतने ही अधिक अनुकूल होते हैं।
*२-क्या ऑनलाइन राशिफल मिलान सही है?*
-जी हां ऑनलाइन कुंडली मिलान का परिणाम शत प्रतिशत भरोसेमंद है । इसके अलावा कुंडली में बहुत से ऐसे लोग होते हैं जिसका विश्लेषण किसी योग्य ज्योतिषी से करवाना अनिवार्य है ।
-कुंडली मिलान में सबसे महत्वपूर्ण मानदंड क्या हैं?
-हमारे ज्योतिषियों के अनुसार, कुंडली मिलान की बात करें, तो मंगल दोष मिलान और नाड़ी मिलान सबसे महत्वपूर्ण मानदंड
*३- कुंडली मिलान के लिए किन बातों का ध्यान रखना अनिवार्य है ?*
- लड़के एवं लड़की का जन्म विवरण पूर्ण एवं प्रमाणिक होना चाहिए । यदि आपके पास प्रमाणिक जन्म विवरण नहीं है तो ध्यान दें कि लड़के के चालू नाम से लड़की के चालू नाम का मिलान होना अनिवार्य है , या फिर लड़के के राशि नाम से लड़की के राशि नाम का मिलान होना अनिवार्य है । यह भी ध्यान दें कि सिर्फ व्यक्तिगत लाभ के लिए किसी भी स्थिति में नाम बदलकर कुंडली का मिलान ना करें ।
*४- कितने गुण मिलने पर शादी हो सकती है?*
- कुण्डली मिलान की अष्टकूट पद्धति में, गुणों की अधिकतम संख्या ३६ है। वर और कन्या के बीच गुण अगर ३१ से ३६ के मध्य में हो तो उनका मिलाप अति उत्तम होता है। गुण अगर २१ से ३० के मध्य में हो तो वर और कन्या का मिलाप बहुत अच्छा होता है। गुण अगर १७ से २० के मध्य में हो तो वर और कन्या का मिलाप साधारण होता है और गुण अगर ० से १६ के मध्य में हो तो इसे अशुभ माना जाता है।
*५-क्या मंगल दोष मिलान भी जरूरी है?*
-हां, मंगल दोष मिलान भी उतना ही महत्वपूर्ण है। यह अनुशंसा की जाती है कि दोनों कुंडली में मंगल दोष का स्तर लगभग बराबर हो।
*६- क्या नाड़ी दोष को नज़रअंदाज़ किया जा सकता है?*
-अष्टकूट मिलान प्रणाली में नाड़ी को उच्चतम बिंदु (8 अंक) दिया गया है। यदि अंकों की कुल संख्या 18 से अधिक है, तो इसे नाडी दोष होने पर भी सभ्य मिलान माना जाता है।
*७-भागकर की गई शादियां कितने प्रतिशत सफल होती है?*
- हमारी वैदिक पद्धति कर्म और कर्म फल के सिद्धांत पर आधारित है हमारे वैदिक ग्रंथों में सभी कर्मों को मर्यादा में रहकर करना बताया गया है किंतु कुछ कर्म ऐसे होते हैं जिनको दृढ़ कर्मों की संज्ञा दी गई है , इन्हीं में से एक भागकर की गई शादियां भी हैं ।
*८-सुखी दांपत्य जीवन जीने के लिए और किन बातों का विचार करना अनिवार्य है ?*
सुखी दांपत्य जीवन जीने के लिए सबसे पहले तो उत्तम स्वस्थ होना अनिवार्य है , अर्थात पूर्ण आयु होनी चाहिए। इसके बाद धन के अच्छे योग होना चाहिए , जिससे धन खर्च करने के लिए हमें कभी सोचना ना पड़े । विवाह उपरांत संतान सुख पर भी विचार अनिवार्य है ।
9-क्या दूसरे भाव में स्थित मंगल भी मंगल दोष उत्पन्न करता है?
उत्तर: नहीं, दूसरे भाव में स्थित मंगल मंगल दोष नहीं बनाता है। कुछ उत्तर भारतीय ज्योतिषी अन्यथा सोचते हैं, लेकिन सच तो यह है कि मंगल यदि अशुभ हो तो वह जिस घर में स्थित होता है, वहां समस्या उत्पन्न कर देता है। तो, सबसे अच्छा तरीका है कि कुंडली का मूल्यांकन कराया जाए और सरल मंगल दोष उपाय किए जाएं।
10-मंगल दोष के बारे में कैसे जानें
मंगल दोष की जांच करने के लिए कुंडली में पहले घर, चौथे घर, सातवें घर, आठवें घर और 12वें घर में मंगल की स्थिति देखनी होगी। मंगल दोष की जांच के लिए हम चंद्र राशि पर विचार करते हैं। आपको मेरी साइट सहित कई ज्योतिष साइटें मिलेंगी जिनमें जांच के लिए कैलकुलेटर उपलब्ध हैं
मांगलिक दोष. इसका उपयोग मांगलिक दोष के बारे में प्रथम दृष्टया जानकारी इकट्ठा करने के लिए किया जा सकता है, लेकिन किसी सक्षम ज्योतिषी से इसकी जांच करवाना हमेशा बेहतर होता है। क्योंकि इसकी क्षमता भिन्न हो सकती है जो उच्च मंगल दोष, निम्न मंगल दोष या अंशिक मंगल दोष का भी निर्णय करती है लेकिन मंगल दोष की किसी भी गलत व्याख्या से बचने के लिए किसी विशेषज्ञ से ही परामर्श लें। मैं आपको फिर से बता रहा हूं कि कुंडली में मांगलिक दोष की जांच करने के विभिन्न तरीके हैं।
11-क्या मंगल/कुजा दोष 28 वर्ष की आयु के बाद समाप्त हो जाता है?
उत्तर: नहीं, 28 वर्ष की आयु के बाद मंगल दोष समाप्त नहीं होता है। दरअसल, यदि किसी कुंडली में कोई दोष मौजूद है तो वह जीवन भर मौजूद रहता है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार, जातक की आयु के 28वें वर्ष के बाद मंगल एक अलग रूप में प्रवेश करता है। 28वें वर्ष के बाद मंगल की उग्रता या ऊर्जा को दिशा मिल जाती है, लेकिन यह विवाह ज्योतिष पर लागू नहीं होता है।
12-क्या कभी मांगलिक दोष से छुटकारा मिल सकता है?
उत्तर: यदि आपकी कुंडली में मंगल दोष मौजूद है तो आपको कभी भी मंगल दोष से छुटकारा नहीं मिल सकता है। लेकिन बस मांगलिक दोष की जांच करवा लें; यह बहुत अच्छी संभावना है कि आपमें यह दोष बिल्कुल भी नहीं है। मेरे कार्यालय में आने वाले अस्सी प्रतिशत वर्गीकृत मांगलिकों के पास दोष नहीं है।
13-क्या मांगलिक/कुजा दोष के कारण विवाह में देरी हो सकती है?
उत्तर: मंगल दोष के प्रभावों में से एक यह है कि यह विवाह में देरी कर सकता है। लेकिन, मंगल पृथक रूप से कार्य नहीं करता है। कोई अन्य ग्रह एकमात्र विलम्बक के रूप में कार्य कर रहा होगा, जबकि मंगल समस्या को बढ़ा सकता है। इसलिए बेहतर होगा कि किसी ज्योतिषी से सलाह लेकर मांगलिक दोष के कुछ उपाय किए जाएं।
१४-क्या कोई मांगलिक गैर-मांगलिक से शादी कर सकता है?
उत्तर: ओह, यह गलत धारणा मांगलिक दोष के बारे में सभी संदेहों और मिथकों का स्वामी है। लेकिन मैं स्पष्ट कर दूं, हां, एक मांगलिक गैर-मांगलिक से शादी कर सकता है और इसका विपरीत भी। जैसा कि पहले कहा गया है, इस प्रश्न को लेकर अपने मन में कोई आशंका न रखें। सबसे पहले, हो सकता है कि आपके पास मांगलिक दोष बिल्कुल भी न हो; यदि आपके पास यह है तो भी एक मांगलिक निश्चित रूप से एक गैर-मांगलिक से शादी कर सकता है। किसी भी प्रकार की गलत व्याख्या से बचने के लिए मैं यहां अधिक ज्योतिषीय कारण नहीं देना चाहूंगा। ऐसे निर्णय कुंडली-विशिष्ट होते हैं, इसलिए बेहतर होगा कि आप अपनी राय बनाने या किसी भी तरह का निर्णय लेने से पहले किसी अच्छे ज्योतिषी से परामर्श लें।
१५- क्या अष्टकूट मिलान वैवाहिक सुख की गारंटी है ?
उत्तर- अष्टकूट मिलान मानक अष्टकूट मिलान में आठ मानकों के आधार पर मिलान की व्यवस्था है । जहां तारा, योनि, गण एवं नाड़ी का आधार जन्म नक्षत्र है तो वहीं वश्य, वर्ण, ग्रह मैत्री एवं भकूट का आधार जन्म राशि है।
अब प्रश्न है कि क्या मात्र अष्टकूट मिलान के आधार पर वैवाहिक सुख मिलने की उद्घोषणा की जा सकती है ?
शास्त्रों के अनुसार ज्योतिषीय आधार पर जातक/ जातिका के एकल कुंडली के आधार पर भी वैवाहिक सुख मिलने की विवेचना अवश्य की जानी चाहिए , अन्यथा सिर्फ अष्टकूट मिलान के बाद भी वैवाहिक सुख की प्राप्ति मृगतृष्णा ही रहेगी।
कुंडली के कुछ योग ऐसे हैं जो वैवाहिक सुख को प्रभावित करते हैं । कुंडली में विद्यमान संतानहीनता का योग, अल्पायु योग, वैधुर्य या विधवा होने का योग, गंभीर बीमारी से पीड़ित रहने का योग, दरिद्र योग, व्यभिचार योग आदि कुछ ऐसे योग हैं जो वैवाहिक सुख को प्रभावहीन बना देंगे और वर-वधू के जीवन को विवाहोपरांत उनके जीवन में नैराश्य एवं अंधेरा ला देंगे।
https://surveyheart.com/form/648f2b8a8f714c4b7210bf9f
🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷
No comments:
Post a Comment