प्रिय आत्मन्
क्या आप जानते हैं वर्तमान समय की आज सबसे बड़ी समस्या क्या है ?
वह चाहे भौतिक जगत हो धार्मिक जगत हो या फिर अध्यात्मिक जगत हो । कारण कि एक ही विषय के अनेक गुरु और सभी अपने-अपने अनुभव अनुसार अलग-अलग ज्ञान सबको देते हैं। अब यदि ऐसी स्थिति में सत्य का पता लगाना हो तो हम कैसे लगा सकते हैं ? इन्ही बिंदुओं को लेकर हमने यह कार्यक्रम है प्रारंभ किया है *सत्य की खोज*
आशा करता हूं कि आप सभी इसका लाभ अवश्य लेंगे।
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*👉आज की चर्चा का विषय है प्रेम*
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समाज में प्रेम की परिभाषा को लेकर बड़ा ही द्वंद है ।
समाज के कुछ लोगों ने तो प्रेम को काम अर्थात सेक्स से ही जोड़ दिया है । ऐसी स्थिति में समाज के लोगों की मानसिक स्थिति में और भी विकृति आ गई है ।
ईश्वर का आदेश है कि हमें सबसे प्रेम करना चाहिए । और आज समाज में यह विकृति छाई हुई है कि लोग प्रेम के नाम पर सबके साथ सेक्स करने को तैयार रहते हैं , और छोटे बड़े और जानवरों तक का भी लिहाज नहीं करते ।
क्योंकि प्रेम भक्ति से ही जुड़ा हुआ विषय है अतः हमें प्रेम की सही परिभाषा जाननी आवश्यक है ।
प्रेम को भक्ति से भी ऊपर रखा गया है इसलिए यह एक अनिवार्य विषय है ।
१- प्रेम क्या है?
२- प्रेम क्यों आवश्यक है?
३- जो प्रेम करते हैं उन्हें क्या लाभ है
४- जो प्रेम नहीं करते उन्हें क्या हानि है
५- मोह, प्रेम और सेक्स इन तीनों में क्या अंतर है ? या फिर यह सब एक ही हैं ?
Jai ho prabhu ki sahi h karma theory
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