प्रिय आत्मन्,
आज मैं आपके समक्ष एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा करना चाहता हूँ। जब भी मैं आपके कल्याण हेतु किसी विषय के अंतर्गत कुछ चरणबद्ध बिंदुओं को प्रस्तुत करता हूँ, तो मेरा उद्देश्य आपको एक स्पष्ट मार्ग दिखाना होता है। अतः मेरा आप सभी से यही आग्रह है कि बताए गए मार्ग का पूर्ण निष्ठा के साथ पालन करें। जब आप इन चरणों को बिना किसी व्यवधान के पार करेंगे, तभी आप अपने वास्तविक लक्ष्य को प्राप्त करने में समर्थ होंगे।
१. विकल्प और मार्ग का अंतर- मेरा आप सभी से यही आग्रह है कि बताए गए मार्ग का पूर्ण निष्ठा के साथ पालन करें। जब आप इन चरणों को बिना किसी व्यवधान के पार करेंगे, तभी आप अपने वास्तविक लक्ष्य को प्राप्त करने में समर्थ होंगे।
साधारणतः- मनुष्य की प्रवृत्ति होती है कि वह सुलभ मार्ग खोजता है। जब आपको कई बिंदु बताए जाते हैं, तो आप उन्हें 'विकल्प' समझने की भूल कर बैठते हैं। आपको यह समझना होगा कि ये बिंदु चयन करने के लिए नहीं, बल्कि अनुगमन करने के लिए हैं। इनमें से किसी एक का चुनाव करना आपकी यात्रा को अधूरा छोड़ सकता है।
२. क्रमबद्धता की अनिवार्यता :- इन बिंदुओं को एक श्रेणी के रूप में देखें। जैसे ऊँचे शिखर पर पहुँचने के लिए प्रत्येक पायदान को पार करना आवश्यक होता है, वैसे ही मेरे द्वारा बताए गए इन सूत्रों को एक-एक करके पार करना अनिवार्य है।
यदि आप अपनी सुविधा के अनुसार किसी एक बिंदु को चुनेंगे, तो आप अपने गंतव्य से भटक जाएंगे। लक्ष्य तक पहुँचने के लिए प्रथम चरण से अंतिम चरण तक की यात्रा अखंड होनी चाहिए।
३. सुविधा बनाम अनुशासन :- अक्सर हम अपनी सुविधा को प्रधानता देते हैं और कठिन चरणों को त्याग देते हैं। किंतु स्मरण रहे अनुशासन ही सफलता की आधारशिला है। जब आप इन चरणों को क्रमानुसार पार करते हैं, तब आप केवल आगे ही नहीं बढ़ते, बल्कि स्वयं को आंतरिक रूप से सुदृढ़ भी करते हैं। अंत में आप सब से मैं यही कहना चाहूंगा कि इन सूत्रों को चुनने की वस्तु न समझें, बल्कि इन्हें एक अखंड मार्ग के रूप में स्वीकार करें।
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