Saturday, November 2, 2024

संतान

१- वर्णसंकर संतान क्या है ?


वह संतान जो दो भिन्न भिन्न जातियों के स्त्री पुरुष अथवा जो ऐसे स्त्री पुरुष के संयोग से उपत्न्न हुआ हुआ हो, जो धर्मानुसार विवाहित न हों, अर्थात व्यभिचार से उत्पन्न हुआ हो ।

वर्णसंकर संतानें कुल तीन प्रकार की ही होती हैं:-

१- व्याभिचार से अर्थात् पुरूष द्वारा परस्त्री से उत्पन्न संतान को वर्णसंकर कहा जाता है। 

२- सगोत्र विवाह से उत्पन्न संतति को वर्णसंकर कहा जाता है।

३- कोई भी व्यक्ति भले किसी शुद्ध वर्ण में ही उत्पन्न हुआ हो परन्तु यदि वह अपना वर्णधर्म पालन छोड़ देता है तो उसकी संतति वर्णसंकर कहलाती है।

२- पुत्री की परिभाषा क्या है ?

स्वयं में मातृत्व के नैसर्गिक गुणों को समाये हुए किसी के वंश को बढ़ाने की शारीरिक शक्ति के साथ ,सौंपीं गई जिम्मेदारियों को निभाकर अपने कुल परंपराओं को गौरवान्वित करने वाली लक्ष्मी श्रेष्ठ पुत्री कहलाती है ।

३- पुत्र की परिभाषा क्या है ?

जो नर संतान अपने माता-पिता एवं कुल परंपराओं के
गुण ,वैभव, संस्कार, संस्कृति को आगे बढ़ाएं एवं पुन्नाम ['पुत्' नाम] नरक से उन का उद्धार करे , वह पुत्र कहलाने योग्य है ।

४- पुत्र कितनेके प्रकार के होते हैं ?
मनु ने बारह प्रकार के पुत्र कहै हैं—
औरस - विवाहिता सवर्णा स्त्री के गर्भ से जिसकी उत्पत्ति हुई हो वह 'औरस' कहलाता है । औरस ही सबसे श्रेष्ठ और मुख्य पुत्र है ।

क्षेत्रज - जो स्त्री अपने देवर आदि से नियोग द्वारा पुत्र उत्पन्न करे वह 'क्षेत्रज' है ।

दत्तक -  गोद लिया हुआ पुत्र 'दत्तक' कहलाता है । 

कृत्रिम् - किसी पुत्र गुणों से युक्त व्यक्ति को यदि कोई अपने पुत्र के स्थान पर नियत करे तो वह 'कृत्रिम' पुत्र होगा ।

गूढ़ोत्पन्न - जिस स्त्री को किसी स्वजातीय या घर के पुरुष से ही पुत्र उत्पन्न हो, पर यह निश्चित न हो कि किससे, तो वह उसका 'गूढ़ोत्पन्न' पुत्र कहा जायगा ।

अपविद्ध - जिसे माता पिता दोनों ने या एक ने त्याग दिया हो और तीसरे ने ग्रहण किया हो वह उस ग्रहण करनेवाले का 'अपविद्ध' पुत्र होगा । 

कानीन -  जिस कन्या ने अपने बाप के घर कुवारी अवस्था में ही गुप्त संयोग से पुत्र उत्पन्न किया हो उस कन्या का वह पुत्र उसके विवाहिता पति का 'कानीन' पुत्र कहा जायगा । 

सहोढ - पहले से गर्भवती कन्या का जिस पुरुष के साथ विवाह होगा गर्भजात पुत्र उस पुरुष का 'सहोढ़' पुत्र होगा । 

क्रीत - माता पिता को मूल्य देकर जिसे मोल लें वह मोल लेनेवाले का 'क्रीत ' पुत्र कहा जायगा ।

पौनर्भव - पति द्वारा त्यागी जाकर अथवा विधवा या स्वेच्छाचारिणी होकर जो परपुरुष संयोग द्वारा पुत्र उत्पन्न करे वह पुत्र उस पुरुष का 'पौनभर्व' पुत्र होगा ।

स्वयंदत्त - मातृपितृविहीन अथवा माता पिता का त्यागा हुआ यदि किसी से आप आकर कहे कि 'मैं आपका पुत्र हुआ' तो वह 'स्वयंदत्त' पुत्र कहलाता है ।

शौद्घ - विवाहिता शूद्रा और ब्राह्मण से संयोग से उत्पन्न पुत्र ब्राह्मण का 'पार्शव' या 'शौद्र' पुत्र कहलाएगा ।

५- वर्ण शंकर संतान से क्या हानि है ?
वर्णसंकर संतान को पितरों का तर्पण, पिण्डदान करने का अधिकारी नहीं माना गया है क्योंकि इनके द्वारा किया गया तर्पण और पिण्डदान पितर स्वीकार नहीं करते।

६- श्रेष्ठ संतान पाने के लिए सामान्य जानकारियां 
  • गरुड़ पुराण में बताया गया है कि, श्रेष्ठ संतान की प्राप्ति करने के लिए महिला को माहवारी के दिनों में कभी भी संबंध नही बनाने चाहिए. 

  • महिला को माहवारी के 5वें दिन स्नान करने के बाद पूर्णरूप से शुद्ध हो जाना चाहिए. इसके बाद ही स्त्री पुरुष को संबंध बनाना चाहिए.

  • वहीं देवताओं और पितरों की पूजा स्त्री को माहवारी के 7 दिन बाद करनी चाहिए. यदि आप उत्तम चरित्र, गुणवान और श्रेष्ठ संतान की कामना करते हैं तो माहवारी के सातवें दिन के बाद ही गर्भाधारण की कोशिश करें.

पुत्र प्राप्ति के उपाय

  • धार्मिक मान्यता है कि, गर्भधान यदि माहवारी के बाद सम दिनों में किया जाए तो इससे पुत्र रत्न की प्राप्ति होती है, वहीं विषम दिनों में किए गर्भधान से पुत्री की प्राप्ति होती है.

  • गरुड़ पुराण में बताया गया है कि, पुत्र प्राप्ति के लिए स्त्री के मासिक धर्म समाप्त होने के 8वें, 10वें, 12वें, 14वें और 16वें दिन यानी सम दिनों के संबंध बनाने से पुत्र प्राप्ति की संभावना अधिक रहती है. वहीं मासिक धर्म समाप्त होने के विषम दिन जैसे 9वें, 11वें, 13वें, 15वें और 17वें दिनों में मिलन होने से पुत्री प्राप्ति की संभावना अधिक रहती है.

  • जब गर्भधारण की कोशिश करें तो इस दौरान स्त्री और पुरुष दोनों को मन प्रसन्न और शुद्ध होना चाहिए. क्योंकि गर्भधारण के समय स्त्री और पुरुष का चित्त जैसा रहेगा संतान का जन्म भी उसी चित्त जैसा होगा.

गर्भ रक्षा एवं आहार विहार 

प्रयत्नपूर्वक गर्भ की रक्षा करना पति-पत्नी दोनों का संयुक्त दायित्व है। गर्भावस्था में स्त्री को काम, क्रोध, लोभ, मोह से बचना चाहिए। गर्भवती स्त्री को अत्यधिक ऊंचे या नीचे स्थानों पर नहीं जाना चाहिए। गर्भवती स्त्री को कठिन यात्राऐं वर्जित है। गर्भवती स्त्री को कठिन आसन या व्यायाम नहीं करना चाहिए। तीखे, खट्टे, कड़वे अत्याधिक गरम पदार्थों का सेवन करने से या गर्भ पर किसी प्रकार का दबाव पड़ने से गर्भ नष्ट हो जाता है।

लड़ाई, झगड़ा, शोक, कलह और मैथुन/संभोग से स्त्री को बचना चाहिए। गर्भस्थ शिशु का स्वास्थ्य अच्छा रहे, उसके शरीर का समुचित विकास होता रहे तथा गर्भवती स्त्री शारीरिक रूप से इतनी सक्षम हो कि उचित समय पर सर्वगुण संपन्न, सुखी व स्वस्थ शिशु को सुखपूर्वक जन्म दे सके। इस हेतु ‘चरक संहिता’ में महर्षि चरक ने नवमास चिकित्सा का विधान वर्णित किया है।

प्रथम मास: मासिक धर्म का समय आने पर भी जब ऋतुस्राव न हो तथा गर्भ स्थापना के लक्षण प्रकट होने लगे तब प्रथम मास में गर्भवती स्त्री को सुबह शाम मिश्री मिला हुआ ठंडा दूध पीना चाहिए।

द्वितीय मास: द्वितीय मास में दस ग्राम शतावर के मोटे चूर्ण को 200 ग्राम दूध में 200 ग्राम पानी मिलाकर, दस ग्राम मिश्री डालकर धीमी आग पर उबालंे, जब सारा पानी उड़ जाए और दूध ही शेष बचे तो इसे छानकर गुनगुना होने पर घूंट घूंट करके गर्भवती स्त्री पीएं। यह प्रयोग सुबह और रात को सेाने से आधा घंटा पूर्व करेें।

तृतीय मास: इस मास में गर्म दूध को ठंडा करके एक चम्मच शुद्ध घी और तीन चम्मच शहद घोलकर सुबह शाम पीना चाहिए।

चतुर्थ मास: इस मास में दूध के साथ ताजा मख्खन बीस ग्राम की मात्रा में सुबह शाम सेवन करना चाहिए।

पंचम मास: पांचवें मास में सिर्फ दूध व शुद्ध घी का अपनी पाचन शक्ति के अनुरूप सेवन करें।

छठा मास: इस मास में द्वितीय मास की भांति क्षीर पाक (शतावर साधित दूध) का सेवन करना चाहिए।

सप्तम मास: इस मास में छठे मास का प्रयोग जारी रखें।

आठवां मास: इस मास में दूध -दलिया, घी उबालकर शाम के भोजन में भरपेट खाना चाहिए।

नवम मास: नवें मास में शतावर साधित तेल में रुई का फाहा भिगोकर रोजाना रात को सोते समय योनि के अंदर गहराई में रख लिया करें। एक माह तक यह प्रयोग करने से प्रसव के समय अधिक कष्ट नहीं होगा और सुखपूर्वक प्रसव हो सकेगा।

दसवें माह में जब प्रसव वेदना होने लगे तब वचा (वच) की छाल को एरंड के तेल में घिसकर गर्भवती स्त्री की नाभि के आसपास और नीचे पेडू पर मलें। लगाएं ऐसा करने से सुखपूर्वक नार्मल डिलीवरी होगी।


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