Thursday, May 23, 2024

नैतिक शिक्षा

१- नैतिक शिक्षा क्या हैं ? 
नैतिक शिक्षा को समझने के लिए सबसे पहले आपको नैतिक शब्द का अर्थ पता होना चाहिए। नैतिक या नैतिकता का अर्थ वह अच्छा व्यवहार या कर्तव्य जिसकी हम हमेशा दुसरो से अपेक्षा करते है। अगर हम यह चाहते है की हमारे साथ सब लोग अच्छे से अच्छा व्यवहार करे उसके लिए सबसे पहले आपको बदलना होना। जब आप दुसरो के साथ अच्छा व्यवहार करना शुरू करते है कुछ समय बाद आपके साथ भी अच्छा व्यवहार होने लगता है। इस तरह के अच्छे व्यवहार या कर्म का समाज में आदान प्रदान नैतिकता कहलाता है। 

२- नैतिकता के मुख्य मूल तत्व कौन-कौन से है ?
  • बुद्धिमत्ता
  • ईमानदारी
  • सत्य को अपनाना
  • संवेदनशीलता
  • निस्वार्थ क्षमा
  • निष्काम कर्म
  • निस्वार्थ दान
  • निस्वार्थ सहायता आदि है। 

नैतिकता को समझने के लिए हमारे पूर्वजो और ऋषियों द्वारा नीतिशास्त्र का निर्माण और उसपर जोर दिया जाता रहा है। 

अगर हम अपने बच्चो को अच्छा इंसान बनाना चाहते है। तो इसके लिए उन्हें नैतिक कर्तव्य का ज्ञान होना अति आवश्यक है। ऐसा संभव नहीं है की आप बच्चो को दुसरो के लिए बुरा बनाये और वो आपके लिए अच्छे रहे। इसलिए नैतिकता इस मानव जीवन का अभिन्न अंग है। अगर किसी व्यक्ति में नैतिकता न हो वो व्यक्ति निश्चित ही चोर, दम्भी, अहंकारी, बलात्कारी, कपटी इंसान बनेगा। जिसे हम अनैतिक व्यक्ति कहते है।  ऐसे लोगो का पतन निश्चित होता है। इन लोगो को समाज की तो छोडो परिवार के लोग भी साथ नहीं देते। 

३- नैतिक शिक्षा की आवश्यकता क्यों है ?

नैतिक शिक्षा व्यक्ति के चरित्र-निर्माण का एक माध्यम है क्योंकि चरित्र ही मनुष्य के जीवन का मूल आधार है। इसलिए चरित्र की रक्षा करना नैतिक शिक्षा का मूल उद्देश्य है। नैतिक शिक्षा को स्वीकार किए बिना मनुष्य जीवन में वास्तविक सफलता तक नहीं पहुँच सकता।

४- आज की शिक्षा व्यवस्था में नैतिक मूल्यों पर जोर क्यों नहीं दिया जाता ?
नैतिकता किसी भी समाज या देश का मुख्य आधार होता है। जब मनुष्य अंदर से मृत हो जाता है , तब समाज में नैतिकता का पतन हो जाता है।

आज हर तरफ लोग बस इसी कोशिश में लगे हैं कि सामने वाले को कैसे लुटा जाए, नीचा दिखाया जाए, जलील किया जाए। 

प्यार, मोहब्बत, बड़ों का आदर, किसी जरूरतमंद की मदद ये सब समाज से गायब हो चूका है। जब समाज ही अनैतिक हो गया है तो शिक्षा में नैतिक कैसे रहेगा।

५- शिक्षा वयवस्था में नैतिक मूल्य क्यों नहीं है :

भारत में शिक्षा आज व्यवसायीकरण हो गया है। आज बच्चे न गुरु की इज्जत करते हैं और न गुरु बच्चे को शिष्य समझते हैं। आज का शिक्षक स्कूल में कम पढ़ाता है ताकि बच्चे उसके ट्यूशन join कर सके।
भारत शिक्षा वयवस्था का दुर्भाय यह है कि सिलेबस से नैतिक शिक्षा को ही हटा दिया।
इंडोनेशिया मुस्लिम देश है फिर भी वहां भगवत गीता पढ़ाया जाता है
जापान में बच्चे अपने स्कूल की सफाई खुद करते हैं। भारत में गलती से अगर कोई स्कूल में शिक्षक बच्चों से स्कूल की सफाई करवा ले, माता पिता खुद शिक्षकों की क्लास ले लेंगे
इस देश में शिक्षा और नैतिकता दोनों का स्तर बहुत गिर गया है

६- नैतिक मूल्यों का हमारे जीवन में क्या महत्व है ?

नैतिकता का सम्बंध मानव जीवन की अभिव्यक्ति से हैं। मानव जीवन में नैतिक मूल्यों की आवश्यकता, महत्त्व अनिवार्यता व अपरिहार्यता जरुरी हैं, ताकि वह अपने परिवार के साथ -साथ सामाजिक और देश के प्रति दायित्व को भी निभा सके। नैतिकता सामाजिक जीवन को सुगम एवं विस्तृत बनाती हैं । सनातन धर्म के वैदिक मन्त्रों में नैतिकता को विशेष महत्व दिया जाता हैं ।

७- नैतिक शिक्षा से हमें क्या सीख मिलती है ?
वर्तमान परिवेश में बच्चों को उच्च शिक्षा तो दी जा रही है, लेकिन उनकी नैतिक शिक्षा की ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। नैतिक शिक्षा बच्चों को न सिर्फ संस्कारवान बनाता है, बल्कि उन्हें अनुशासित जीवन जीने की सीख भी देता है। जो उसके समुचित विकास के लिए जरूरी है।

८- नैतिक शिक्षा प्रदान करने के लिए सबसे उत्तम साधन कौन-कौन से है ?
नैतिक शिक्षा के लिए सबसे उत्तम साधन योगवासिष्ठ , विवेक चूड़ामणि और कर्मयोग इत्यादि ग्रंथ शामिल है।

नैतिकता से लाभ 

नैतिक मूल्य बच्चे के पालन-पोषण का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। बच्चों को नैतिक मूल्य सिखाने से उन्हें जिम्मेदार और दयालु वयस्क बनने में मदद मिल सकती है। 

हालाँकि, कई माता-पिता इस बात से अवगत नहीं हैं कि बच्चे नैतिक मूल्यों से क्या सीख सकते हैं। इसलिए, हम बच्चों को नैतिक मूल्य सिखाने के कुछ सबसे महत्वपूर्ण लाभों का पता लगाएंगे , जो उन्हें सफल और पूर्ण जीवन जीने में मदद करते हैं।

-उन्हें सही और गलत की मजबूत समझ विकसित करने में मदद करना

 बच्चों को नैतिक मूल्य सिखाने से उन्हें सही और गलत के बीच अंतर समझने में मदद मिलेगी। इससे उन्हें बेहतर विकल्प चुनने और ऐसी गलतियाँ करने से बचने में मदद मिलेगी जिनके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।

 -उन्हें जिम्मेदार बनना सिखाएं

 बच्चों को नैतिक मूल्य सिखाने का सबसे महत्वपूर्ण लाभ उन्हें अधिक जिम्मेदार वयस्क बनने में मदद करेगा। जिम्मेदारी एक महत्वपूर्ण मूल्य है जिसे बच्चों को छोटी उम्र से ही सिखाया जाना चाहिए।

 -उन्हें सहानुभूति विकसित करने में मदद करना

सहानुभूति एक और महत्वपूर्ण नैतिक मूल्य है जो माता-पिता को अपने बच्चों को सिखाना चाहिए । सहानुभूति दूसरे व्यक्ति की भावनाओं को समझने और साझा करने की क्षमता है। यह एक मूल्यवान कौशल है जो उन्हें व्यक्तिगत संबंधों से लेकर काम तक, उनके जीवन के सभी पहलुओं में मदद करेगा।

-दूसरों के प्रति सम्मान विकसित करने में उनकी मदद करना

 सम्मान एक और महत्वपूर्ण नैतिक मूल्य है जो सभी माता-पिता को अपने बच्चों को सिखाना चाहिए। दूसरों का सम्मान करने में उनके साथ दयालुता और विचारपूर्वक व्यवहार करना और उनकी राय और भावनाओं को महत्व देना शामिल है।

-उन्हें आत्म-मूल्य की भावना विकसित करने में मदद करना

आत्म-मूल्य की भावना एक महत्वपूर्ण कौशल है जो सभी माता-पिता को अपने बच्चों को सिखाना चाहिए। यह मूल्य बच्चों को यह समझने में मदद करता है कि वे मूल्यवान हैं और प्यार और सम्मान के पात्र हैं।

-उन्हें स्वतंत्र विचारक बनने में मदद करना 

बच्चों को नैतिकता और मूल्य सिखाने का एक और सबसे महत्वपूर्ण लाभ यह है कि इससे उन्हें स्वतंत्र विचारक बनने में मदद मिलेगी। यह नैतिक मूल्य बच्चों को अपने बारे में सोचने और स्वयं निर्णय लेने में मदद करता है।

-उन्हें जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने में मदद करना

जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण एक महत्वपूर्ण कौशल है जो सभी माता-पिता को अपने बच्चों को सिखाना चाहिए। इससे बच्चों को लोगों और परिस्थितियों में अच्छाई देखने और जीवन में सुंदरता की सराहना करने में मदद मिलती है।

 -उनमें चरित्र की मजबूत भावना विकसित करने में मदद करना

चरित्र की मजबूत समझ एक ऐसा कौशल है जो सभी माता-पिता को अपने बच्चों को जल्दी सिखाना चाहिए। यह कौशल बच्चों को स्वयं के प्रति सच्चा होने और वे जिस चीज़ में

 विश्वास करते हैं उसके लिए खड़े होने में मदद करता है। 

-उन्हें वैश्विक नागरिक बनने में मदद करना

बच्चों को नैतिकता और मूल्य सिखाने से उन्हें वैश्विक नागरिक बनने में मदद मिल सकती है। इससे उन्हें सभी लोगों के परस्पर जुड़ाव और दुनिया को सभी के लिए एक बेहतर जगह बनाने के लिए मिलकर काम करने के महत्व को समझने में मदद मिल सकती है।

 

-उन्हें सीखने के प्रति प्रेम विकसित करने में मदद करना

सीखने के प्रति प्रेम एक और महत्वपूर्ण नैतिक मूल्य है जो सभी माता-पिता को अपने बच्चों को सिखाना चाहिए। इससे बच्चों को जिज्ञासु और खुले विचारों वाला बनने और आजीवन सीखने के लिए प्रेरित होने में मदद मिलती है।

९- नैतिक संकट क्यों पैदा होता है ?

- ज्ञान का अभाव : सही और गलत को ना समझना अथवा गलत कार्यों को भी अपने स्वार्थ बुद्धि से सही मानकर अनैतिक, अनुचित कार्यों को करना तथा समर्थन देना कभी परंपराओं के नाम पर तो कभी रीति-रिवाज के नाम पर जैसे सती प्रथा जैसी कुरीति का पालन उस समय लोग अज्ञानतावश इस धारणा से करते रहे कि वह सामाजिक परंपराओं का पालन कर रहे हैं परंतु वह मात्र अज्ञानता के अतिरिक्त कुछ नहीं था। जैसे ही कुछ विलान, चिंतकों, समाज सुधारकों ने इस और प्रयास कर लोगों में चेतना जगाई और समाज से ऐसी कुरीतियां समाप्त हुईं अर्थात सही गलत के अंतर को ना पहचाना व भेड़ चाल चलना भी समाज के लिए हानिकारक होता है

-धार्मिक कट्टरता : समाज में विशेष धर्म के प्रति कट्टरता के कारण अनैतिक कार्यों व धारणा को नैतिक मानकर स्वयं अनुचित कार्य करना व दूसरों को अनुचित कार्य व्यवहार के लिए उकसाना भी समाज को क्षति पहुंचाता है ।

-अनैतिक आचरण में रुचि : अधिकतर मनुष्यों को सही गलत का ज्ञान तो होता है किंतु अनैतिक अनुचित आचरण कार्य व्यवहार में स्वत: रुचि होने के कारण मनुष्य जानते हुए भी गलत कार्यों को ही करना पसंद करता है। गलत कार्यों का ही चयन करता है। जैसे : दुर्योधन, उसे सही गलत का ज्ञान तो होता था किंतु गलत कार्यों में रुचि व जिद्द के कारण वह अनुचित कार्यों ही करता था।

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