यहां एक बात समझना अनिवार्य है कि गुरु और शिष्य एक ही सिक्के के दो पहलू हैं, एक योग्य शिष्य को ही योग्य गुरु प्राप्त होते हैं और एक युग गुरु ही योग्य शिष्यों का निर्माण करता है , अतः हम में जब तक एक योग्य शिष्य के गुण विकसित नहीं होते तब तक हमें योग्य गुरु नहीं मिलेगा ।
१- पूर्ण ज्ञान क्या है ?
जिस ज्ञान के बाद कुछ और जानने की आवश्यकता और आकांक्षा शेष नही रह जाती, पूर्ण ज्ञान कहलाता है।
२- किसी भी विषय का पूर्ण ज्ञान कैसे होगा ?
सबसे पहले विषय से संबंधित पूरी जानकारी एकत्रित करें । फिर उसे प्रयोग द्वारा अनुभव में लायें । जब विषय से संबंधित जैसा विवरण मिला वैसे ही अनुभूति हो जायें तो समझिए कि पूर्ण ज्ञान हो गया है । जैसा की अपरोक्त चित्र में आम का उदाहरण दिया गया है ।
३- पूरी जानकारी कैसे प्राप्त करें ?
इसके लिए हम प्रश्न शास्त्र की सहायता ले सकते हैं !
४- प्रश्न शास्त्र क्या है ?
प्रश्न शास्त्र एक ऐसा शास्त्र है जिसमें प्रश्नों का वर्गीकरण किया गया है, साथ ही इसमें यह भी विस्तार से समझाया गया है कि प्रश्नो का उपयोग करके हम किसी भी विषय की पूरी जानकारी कैसे प्राप्त कर सकते हैं ।
५- प्रश्न शास्त्र कहां से प्राप्त करें ?
किसी भी श्रोत्रिय ब्रह्मनिष्ठ गुरु के पास से । यदि उनकी कृपा हुई तो सब संभव है ।
६- प्रश्न कैसे पूछे ?
किसी से भी कोई भी प्रश्न पूछने या मार्गदर्शन प्राप्त करने से पहले यह सुनिश्चित करें कि मुझे मार्गदर्शन ( ज्ञान ) चाहिए या जानकारी । किसी से भी मार्गदर्शन लेने से पूर्व कुछ बातें अवश्य ध्यान रखें ! जैसे - आपका उस व्यक्ति से गुरु शिष्य या प्रेम, विश्वास ,श्रद्धा ,भक्ति के आधार पर संबंध स्थापित होना चाहिए । वह व्यक्ति आपके मार्ग का हो अर्थात आपके गुण और विचार उससे मिलना चाहिए । आपको चाहिए कि आप सामने वाले व्यक्ति की बातों पर पूर्ण विश्वास करते हो और उनका दृढ़ता से पालन करने की इच्छा रखते हो । तभी हमारे जीवन में सकारात्मक परिणाम प्राप्त होंगे । अन्यथा सिर्फ जानकारी के लिए हम सबके पास गूगल बाबा है , वहां आपको हर प्रकार की जानकारी मिल जाएगी ।
उपयोगिता के आधार पर किस की बात मानने योग्य है
१- सद्गुरु - इन्हें अनुभव आधारित ज्ञान प्राप्त होता है, इनकी बात मानने से हमें कोई भी भौतिक लाभ नहीं होता है । इनकी बात मानने से सिर्फ आत्म कल्याण होता है ।
२- गुरु - इन्हें अनुभव आधारित ज्ञान प्राप्त होता है, इनकी बात मानने से हमें ८१% से ९८% लाभ होता है ।
३- विशेषज्ञ - इन्हें अनुभव आधारित ज्ञान प्राप्त होता है, इनकी बात मानने से हमें ४१% से ८०% लाभ होता है।
४- सामाजिक लोग - इन्हें अनुभव आधारित ज्ञान प्राप्त होता है, इनकी बात मानने से हमें ३०% से ४०% लाभ होता है।
५- मनमानी - केवल सुनी सुनाई बातों को आधार मानकर मनमानी किया गया कार्य हमारे पतन का मार्ग खोलता है।
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