Monday, May 13, 2024

आवेदन

प्रिय आत्मन् 
पुण्य कर्मों से सुख की प्राप्ति होती है, तथा आध्यात्मिक ज्ञान से सुख-दुःख दोनों की निवृत्ति होती है ! आपको यदि केवल सुख चाहिए तो पुण्य कर्म करो तथा यदि सुख-दुःख दोनों से छूटना है तो आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करो !

👉आवेदन करने से पहले यह आवश्यक जाने कि आध्यात्मिक ज्ञान क्या है  ? और आप इसे क्यों अपनायें ?

पाठ्यक्रम का क्रम - 
१- प्रथम चरण - आध्यात्मिक ज्ञान 
- द्वितीय चरण - धार्मिक ज्ञान 
३- तृतीय चरण - भौतिक विज्ञान

👉प्रश्नोत्तरी

१- आध्यात्मिक ज्ञान क्या है ?
आध्यात्मिक ज्ञान वह ज्ञान है जिसके द्वारा हम जीवन रहस्य को सुलझाते हैं ।

२- आध्यात्मिक ज्ञान की आवश्यकता क्यों है ?
यदि हम साधारण रूप में समझे तो जो व्यक्ति जहां है उसका जीवन सुख पूर्वक या दुःखी होकर चलता रहता है, किंतु जब बात वहां से निकलने की आती है तब आध्यात्मिक ज्ञान ही हमारा सहारा बनता है । अतः साधारण भाषा में हम समझ सकते हैं कि कहीं से भी निकलने के लिए आध्यात्मिक ज्ञान बहुत आवश्यक है ।

३- जिन्हें आध्यात्मिक ज्ञान है उन्हें क्या लाभ है ? 
लोगों को आध्यात्मिक ज्ञान होने से संसार की नश्वरता का ज्ञान हो जाता है , और वह कभी किसी के प्रति आसक्त नहीं रहते । और अपने कर्तव्य निभाते हुए आनंदपूर्वक अपना जीवन जीते हैं ।

४- जिन्हें आध्यात्मिक ज्ञान नहीं है उन्हें क्या हानि है ?
वर्तमान समय में प्रत्येक परिवार में हम कलह क्लेश का वातावरण स्पष्ट रूप से देख सकते हैं । जो कि आध्यात्मिक ज्ञान के अभाव के कारण है । आध्यात्मिक ज्ञान के अभाव में व्यक्ति का जीवन उलझकर रह जाता है । वह नहीं समझ पाता कि सही क्या है गलत क्या है क्या करें क्या ना करें । ना तो उसे अपने कर्तव्यों का ज्ञान रहता है ! और ना ही अधिकारों का । इच्छाएं भी अनियंत्रित रहती हैं और ऐसी हालत में यदि व्यक्ति को सही मार्गदर्शन नहीं मिले तो कई लोग डिप्रेशन का शिकार होते हैं और कई लोग तो आत्महत्या भी कर लेते हैं ।

४- आध्यात्मिक होना क्यों आवश्यक है ?
आध्यत्मिक होना वैसे ही आवश्यक है जैसे किसी छोटे से बीज को जल और खाद की । आध्यत्मिक का अर्थ ही होता है कि अपने को अपनी आत्मा की ओर अग्रसर करना। संसार में रहकर भी हम अपने को इस प्रकार बना ले कि हमारे कर्म निः स्वार्थ होकर मानव कल्याण मे लग जाए, जिससे हम उस परम दिव्य शक्ति के निकटता को प्राप्त कर ले । जब हम किसी के दुःख से दुखी और सुख से प्रसन्न होते हैं, तथा दुसरो पर चाहे वो मानव हो या कोई भी जीव हो उस पर दया, प्रेम और परोपकार की भावना ही हमारी आत्मा को उन्नति की ओर ले जाती हैं। यही से हम वास्तव में एक इंसान, एक सर्व श्रेष्ठ मानव बनते हैं। यह केवल अध्यात्म से ही संभव है, जो हमे ईश्वर के समीप और समीप करता है।हमारे संस्कार, गुण तथा हमारे कर्म अध्यात्म से ही निखरते है।

५- क्या आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त किया जा सकता है ?
अध्यात्मिक ज्ञान कहीं से प्राप्त नहीं किया जा सकता I दूसरों का ज्ञान आपके लिए उधार का ज्ञान ही साबित होगा l आध्यात्मिकता का अर्थ ही होता है आत्मा का अध्ययन l इस सृष्टि में कितनी आत्माएं विद्यमान है आप उसका अंदाज तक नहीं कर सकते l सभी आत्माओं के सफर का रास्ता तय करने वाला परम परमेश्वर है, जिसकी अपनी सत्ता है और उसकी सत्ता उसके निर्धारित नियमों के अनुसार ही चलती है l आप ज्यादा से ज्यादा सिर्फ अपनी आत्मा के संभाव को जानने का प्रयत्न कर सकते हैं, इस सृष्टि में विद्यमान आत्माओं के सफर का नहीं l अपनी आत्मा के संभाग को जानने के लिए भी आपको नितांत अकेला होना पड़ेगा l उसके बाद ज्ञान प्राप्ति के लिए योग ही आपका सहायक बनेगा ।

👉कार्यक्रम संबंधी सामान्य नियम

-बताये गए 40 दिनो तक प्रतिदिन सूर्योदय से पहले जागे एवं रात्रि को अनावश्यक जागरण ना करें ।

-प्रतिदिन प्रातः काल स्नान आदि से निवृत होकर घी का दीपक जलाकर दुर्गा चालीसा का पाठ करें । 

-अपनी जिज्ञासा शंका समाधान के लिए बताये गए समय अनुसार आप जुड़ सकते हैं ।
सोमवार और शनिवार रात्रि 9 से 10

यदि आपको उपरोक्त लेख समझ में आ गया हो और आप हमारे इस 45 दिवसीय कार्यक्रम का हिस्सा बनना चाहते हैं तो दिए गए फॉर्म में पूछे गए प्रश्नों के उत्तर अपनी समझ अनुसार भरकर सबमिट करें ।



https://surveyheart.com/form/66095d10b8cda656175f2eb7

-सहयोग राशि मात्र १००१ /- रूपए
 टेलीग्राम पर कक्षा प्रारंभ प्रत्येक गुरुवार
 रात्रि 8:30 से 9: 30 तक

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