Monday, April 8, 2024

लोगों की श्रेणी

१-भौतिकवादी लोग -
जो व्यक्ति अपने को शरीर मानता है वह भौतिक पदार्थों में आनंद को खोजता है । भौतिकवादी शरीर को ही आराम देना चाहते हैं और इससे आगे उनकी बुद्धि नहीं चलती । 
इनका सारा ध्यान भौतिक वस्तुओं पर हो. भौतिकवादी व्यक्ति नैतिक या आध्यात्मिक मामलों में कम रुचि रखते हैं और धन और भौतिक संपत्ति की इच्छा रखते हैं. भौतिकवादी लोग जुनूनी रूप से पैसे पर ध्यान केंद्रित करते हैं और विलासिता की वस्तुओं के मालिक होने की गहरी परवाह करते हैं.

२-अध्यात्म वादी लोग-
कुछ लोग पूर्णतया अध्यात्मवाद को महत्व देते हैं ! आप जो भी कार्य करते हैं, अगर उसमें सभी की भलाई निहित है, तो आप आध्यात्मिक हैं। अगर आप अपने अहंकार, क्रोध, नाराजगी, लालच, ईष्र्या और पूर्वाग्रहों को गला चुके हैं, तो आप आध्यात्मिक हैं। बाहरी परिस्थितियां चाहे जैसी हों, उनके बावजूद भी अगर आप अपने अंदर से हमेशा प्रसन्न और आनंद में रहते हैं, तो आप आध्यात्मिक हैं। जो अपने को आत्मा मानता है वह भगवान में आनंद को खोजता है। आनंद की प्राप्ति करना ही हमारा वास्तविक लक्ष्य है जोकि आध्यात्मिक पथ पर चलने से ही प्राप्त हो सकेगा ।

आध्यात्मिक व्यक्ति के कुछ लक्षण ये हैं:
हमेशा खुश रहते हैं और दूसरों के प्रति दयालु होते हैं.
लोगों को नीचा दिखाना या आलोचना करना पसंद नहीं करते.
दुनिया को बेहतर जगह बनाने की उम्मीद में हमेशा प्रेरक और दयालु शब्द पेश करते हैं.
अपने अहंकार, क्रोध, नाराज़गी, लालच, ईर्ष्या, और पूर्वाग्रहों को गला चुके होते हैं.
बाहरी परिस्थितियां कैसी भी हों, उनसे प्रभावित नहीं होते.
सभी मानुषों और जीव जंतुओं को एक नज़र से, एक समान देखते हैं.
प्रेममयी हो जाते हैं.
धर्म, मजहब, जाति, देश, काल से ऊपर उठकर, समस्त ब्रह्मांड की भलाई के लिए तत्पर रहते हैं.
भौतिक वस्तुओं के प्रति कोई मोह नहीं रहता.
पैसा, नाम, शोहरत उन के लिए मायने नहीं रखते.
संसार रूपी कीचड़ में कमल के समान निरलेप हो जाते हैं. 

३-धार्मिक व्यक्ति वह होता है जिसका किसी ईश्वर या देवी-देवताओं में दृढ़ विश्वास होता है. धार्मिक व्यक्ति की पहचान ये है: वह बुराई रहित जीवन जीता है.
वह किसी का अहित नहीं करता.
वह किसी के प्रति कोई बुरी अवधारणा नहीं पालता.
उसका मन हमेशा करुणा से भरा रहता है.
वह दूसरों की बहुत मदद करता है. 

धार्मिक व्यक्ति: वह व्यक्ति जो की अपनी उन्नति के लिये, अपने परिवार, तथा अपने पूरे परिवार, तथा जिस समाज, मोहल्लें, या सोसाइटी मैं वो रह रहा है, उसकी उनत्ति के लिये पूरी निष्ठा व् इमानदारी से कार्यरत रहता है वो धार्मिक व्यक्ति है! ऐसा करते हुए वो समाज मैं प्रगती भी कर सकता है व् घन अर्जित भी कर सकता है ! यहाँ यह स्पष्टीकरण आवश्यक है कि निष्ठा व् इमानदारी से कार्यरत रहने का यह भी आवश्यक मापदंड है कि वह व्यक्ति समस्त नकरात्मक सामाजिक बिंदुओं का भौतिक स्थर पर विरोध करेगा , जैसे कि भ्रष्टाचार, कमजोर वर्ग तथा स्त्रीयों पर अत्याचार, पर्यावाह्रण को दूषित करना या नष्ट करना, आदी, ! ऐसा व्यक्ति सत्यम शिवम सुन्दरम जैसी पवित्र शब्दावली मैं सत्यम है!


सांसारी लोग -
एक संसारी व्यक्ति केवल भौतिक ज्ञान ही विद्यालय में क्रम से ग्रहण करता है । बाकी यदि धार्मिक और आध्यात्मिक ज्ञान की चर्चा की जाए तो यह इनके पास केवल सुना- सुनाया, रटा-रटाया ही रहता है ! जो की स्वप्रमाणित भी नहीं रहता । शिकायतों भरा जीवन, अव्यवस्थित दिनचर्या, लक्ष्य रहित जीवन इनकी मुख्य पहचान है। इनकी एक और खास पहचान है कि ईश्वर और ईश्वर संबंधी विषयों को जानने के लिए उनके पास समय नहीं रहता। प्रारंभ में यह कितने भी सभ्य और संस्कारी दिखे किंतु विपत्ति काल में इनका वास्तविक रूप सामने आ जाता है । अध्यात्म और आध्यात्मिक कामों के लिए समय नहीं रहता। स्वयं की योग्यता बढ़ाने की बजाय सिस्टम में कमी निकालते हैं।

साधक -
यदि साधकों की बात की जाए तो भौतिक ज्ञान के साथ-साथ धार्मिक और आध्यात्मिक ज्ञान भी गुरु सानिध्य में रहकर ग्रहण करते हैं! और चरणबद्ध तरीके से अनुभवों को अपने जीवन में उतारते हुए आगे बढ़ते हैं । जो किसी से भी कोई शिकायत किए बिना अपनी साधना में लगे हुए हैं ! इन्होंने यह स्वीकार कर लिया है कि उनकी वर्तमान स्थिति में तकलीफ या सुखद एहसास उनके ही कर्म की फल हैं। विपरीत परिस्थितियों मैं भी ईश्वर से कोई शिकायत नहीं करते ।


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