प्रिय आत्मन्
किसी भी प्रकार की चर्चा को आगे बढ़ाने के लिए आपके और हमारे बीच संबंध स्थापित होना अनिवार्य है ! जैसे- गुरु शिष्य , वक्ता श्रोता , मित्रों , संबंधियों का समूह आदि । क्योंकि इसके अभाव में कोई भी चर्चा आगे नहीं बढ़ सकती ।
कई बार सामाजिक लोगों से चर्चा के दौरान वे हमें हमारे कर्तव्यों और जिम्मेदारियों से अवगत कराते हैं । क्योंकि जिम्मेवारी और कर्तव्य सिर्फ इक तरफा नहीं रहते, इसलिए ऐसे में उन सभी के लिए मेरा यही संदेश रहता है कि - हमने अध्यात्म से संबंधित प्रारंभिक ज्ञान को लेकर यह पाठ्यक्रम तैयार किया है । आप में से जो भी इस पाठ्यक्रम से जुड़ता है , तो हम भी अपनी जिम्मेवारियां निभाने को आदिकाल से वचनबद्ध हैं ।
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