Tuesday, October 8, 2024

आध्यात्मिक चर्चाओं में भाग न लेने का कारण

प्रणाम मित्रों 
आध्यात्मिक चर्चाओं में भाग न लेने का कारण 
यह एक सार्वभौमिक सत्य है कि वास्तव में सत्य क्या है यह कोई नहीं जानना चाहता । वह सिर्फ अपनी मान्यताओं का प्रमाण ही खोजता है । जहां उसे प्रमाण मिल जाए वह उसे सही मानता है और बाकी सब को गलत की श्रेणी में रखता है 

सामाजिक लोगों के अध्यात्मिक ज्ञान का स्तर उनके ही क्रियाकलापों से ज्ञात हो जाता है जैसे - 

1- चर्चाओं में भागना लेना पड़े इसलिए सूचनाओं को अनदेखा करते हैं। एवं स्वयं को बहुत ही व्यस्त दर्शाते हैं।

२- बहुत से लोगों को विषय का ज्ञान नहीं होता, मनोबल इतना मजबूत नहीं होता और अपने विचार सबके सामने व्यक्त करने में बहुत ही संकोच रहता है, जिसके कारण वे चर्चाओं में भाग लेने से कतराते हैं l 

३- कुछ लोग मान्मयताओं एवं मत मतान्तरों में फंसे हुए हैं । उन्हें अपनी ही विचारधारा सही लगती है इस कारण वे अन्य किसी विचारधारा को स्वीकार नहीं कर पाते और चर्चाओं में भाग नहीं लेते।

४- कुछ लोगों ने तो अपना पुराण अलग से ही बना रखा है, वह उसके आगे किसी की नहीं मानते और यहीं से इस सूत्र का पता चलता है कि हर व्यक्ति सिर्फ स्वयं के अनुभव को ही  सत्य मानता है और उसे ही अपने जीवन में महत्व देता है।

5- चर्चाओं में भाग न लेने का कारण पूछने पर कुछ लोग यह कहते पाए गए हैं कि अभी हम संसार में हैं और सांसारिक जिम्मेदारियों को पूरा करना है, यह ईश्वर, अध्यात्म की बातें तो सांसारिक जिम्मेवारी पूरी करने के बाद ही हो सकती हैं।

६-  लोगों को लगता है कि भगवान केवल अपनी इच्छा पूरी करवाने का साधन है। जिनके सामने कुछ दान ,दक्षिणा फूल , फल की रिश्वत देकर अपनी इच्छा को पूरा करवा सकते है। और यही परम सत्य है। ऐसी मान्यताएं लोगो में फैली हुई है।

आईए जानते हैं कि आप किस कारण से आध्यात्मिक चर्चाओं में भाग नहीं ले पाते l दी गई लिंक ओपन करें एवं पूछे गए प्रश्नों का उत्तर अपनी समझ अनुसार भरकर सबमिट करें l

https://surveyheart.com/form/64db2fe31fb091352115ee2d

No comments:

Post a Comment

वर्तमान समय की सबसे बड़ी समस्या: दोषारोपण की प्रवृत्ति

प्रणाम मित्रो वर्तमान समय में मनुष्य की सबसे बड़ी समस्या यह है कि वह अपने जीवन में उत्पन्न होने वाली अधिकांश समस्याओं और विकृतियों के लिए स्...