Wednesday, August 29, 2018

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👉धन वृद्धि के आसान उपाय

गणपति के वक्रतुंडादि स्वरूप से आशय उनके अष्ट रूप से है, जो इस प्रकार है वक्रतुंड, एकदन्त, महोदर, गजानन, लम्बोदर, विकट, विघ्नराज, और धूम्रवर्ण। लक्ष्मी की उपासना हेतु सुरैया साधना में लाल वस्त्र धारण करके कमला बीज श्रीं और माया बीज ह्रीं का जप, ऋग्वेद के श्री सूक्त और शंकराचार्य द्वारा रचित कनकधारा स्तोत्र का पाठ उत्तम माना गया है।

लक्ष्मी के मंत्रजप के दौरान सादे पान पर केसर से जपे जाने वाले मंत्र को लिखकर उसे मुख में रखकर किया हुआ जप बेहद प्रभावी माना गया है।

टिप्स-
गणपति के पूजन में मोदक, खीर और दूर्वा का प्रसाद और आहुति सम्पत्ति प्रदायक, त्रिमधु (घृत, मधु, और दुग्ध) मिश्रित तिल की आहुति आकर्षण, और बिल्व पत्र, बेल फल और मीठे केले की आहुति धन प्रदायक मानी गयी है।

शंख पर रोली से लक्ष्मी बीज का लेखन कठिन आर्थिक स्थिति के निराकरण में महती भूमिका का निर्वहन करता है, ऐसा मान्यताएं कहती हैं।

प्रश्न: धन संपत्ति के लिए लक्ष्मी उपासना हेतु क्या दीवाली से भी बेहतर कोई पर्व है? -अनुज कक्कड़

उत्तर: सद्गुरुश्री कहते हैं कि भौतिक उन्नति के लिए सही दिशा में अनवरत सटीक कर्म से बेहतर कोई उपाय नहीं है। आध्यात्मिक मान्यताओं के अनुसार धरती में समाहित जिन चमकदार तत्वों को हम धन कहते हैं, उनके नियंता 17 तत्वों के शरीर में निवास करने वाले यक्ष और यक्षिणी हैं। कुबेर यक्ष हैं और लक्ष्मी यक्षिणी। इनकी साधना के लिए राधाअष्टमी यानि भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी से, कृष्ण पक्ष की अष्टमी तक के 16 दिवस दीपावली से भी बेहतर माने जाते हैं। यह काल आत्मशक्ति के विकास के लिए सर्वश्रेष्ठ है। आत्मिक उन्नति के द्वारा धनार्जन सहज हो जाता है। उत्तर और पूर्वी भारत में यह पर्व सुरैया साधना के नाम से प्रख्यात है। सुरैया, जीवन को सुर में ढालने वाली उपासना कही गई है। पारंपरिक अवधारणों के अनुसार यह अर्चना आर्थिक अभाव को नष्ट करके सुख, समृद्धि और आनंद का सूत्रपात करने वाली मानी जाती है। इस काल में 16 दिनों के उपवास, मंत्र जाप के साथ लक्ष्मी पूजन का विशेष महत्व कहा गया है।

प्रश्न: क्या लक्ष्मी उपासना कभी भी की जा सकती है, या इसका कोई विशिष्ट समय है? -सुषमा भोंसले

उत्तर: सद्गुरुश्री कहते हैं कि सामान्य रूप से प्रातःकाल को आराधना के लिए उपयुक्त माना गया है, क्योंकि सुबह की बेला शांत, स्निग्ध, मृदु और स्वच्छ वायु से सराबोर होती है, जिससे हम अर्चना में अपनी आत्मिक ऊर्जा से आसानी से जुड़ पाते हैं। पर आध्यात्मिक मान्यताएं यक्षिणी लक्ष्मी की प्रार्थना का काल रात्रि में मानती हैं, जब लोग अपने व्यावसायिक कर्म से निवृत्त होकर वंदना को अधिक सार्थक बना सकते हैं। एक और मान्यता के अनुसार यक्ष और यक्षिणी जो हमारी भौतिक संपदा के स्वामी-स्वामिनी कहे जाते हैं, का उत्कर्ष काल रात्रि में माना जाता है। इसलिए लक्ष्मी उपासना रात्रि में ज्यादा उत्तम मानी गई है।

प्रश्न: विघ्नेश्वर को नैवेद्य में क्या अर्पित करना चाहिए? -अजय शुक्ला

उत्तर: मोदकै: पृथुकेर्लाजै:सक्तुभिश्चेक्षुपर्वभि:।
नारिकेलैस्तिलै: शुद्धै: सुपक्वै: कदलीफलै:।
अष्ट द्रव्याणी विघ्नस्य कतिथानि मनिषिभि:।
सद्गुरुश्री कहते हैं कि शारदातिलकम के त्रयोदश पटल यानि गणपति प्रकरण के उपरोक्त उल्लेख के अनुसार विघनेश्वरबक नैवेद्य अष्टद्रव्य है। अष्ट द्रव्य यानि मोदक, चिउड़ा, लावा, सत्तू, गन्ने का टुकड़ा, नारियल, शुद्ध तिल और पके हुए केले को विघ्नेश्वर का नैवेद्य माना गया है।

प्रश्न - कब से करें प्रारंभ....?
उत्तर - किसी भी शुक्ल पक्ष के प्रथम शुक्रवार से

प्रश्न: धन समृद्धि में इजाफे के लिए कौन सी सुगंध बेहतर है? -अनिता भतवाल
उत्तर: सद्गुरुश्री कहते हैं कि मान्यताओं के अनुसार चमेली की सुगंध को आकर्षण के लिए बेहतर कहा गया है। आकर्षण धन अर्जित करने के आवश्यक कारकों में से एक है। इसके अलावा गुलाब की महक शक्ति संचरण और विकास के लिए श्रेष्ठ मानी गई है। शक्ति हासिल करने से धनार्जन सुगम हो जाता है।

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