प्रिय आत्मन्
समाज में प्रत्येक व्यक्ति का बौद्धिक स्तर और जीवन में प्राथमिकता अलग-अलग होती है, इसलिए किसी भी कार्यक्रम में जुड़ने से पहले हमें अपने जीवन में उसकी उपयोगिता समझाना बहुत आवश्यक है ।
कार्यक्रम में आगे बढ़ने से पूर्व कुछ प्रश्न है जो हमारी व्यक्तिगत विचारधारा को दर्शाते हैं , जिनके उत्तर जिज्ञासु शिष्यों को स्वयं खोजना है । यदि इन प्रश्नों के उत्तर स्वयं खोजने में सफल रहे तो कार्यक्रमों का वास्तविक लाभ ले सकते हैं ।
१- आपके लिए लोगों को परखने के मानदंड क्या-क्या है ?
२- सही गलत, धर्म अधर्म, पाप-पुण्य, का निर्णय आप किस आधार पर करते हैं ?
३- समाज में इतनी समस्याएं और संतुलन क्यों है ?
४- वर्तमान समय में ऐसी कौन सी समस्या है जो आपको सबसे ज्यादा प्रभावित करती है ? एवं आप उसे दूर करने के लिए अपनी ओर से क्या उपाय कर रहे हैं ?
५- अध्यात्म के बारे में आप क्या जानते हैं ?
६- मानव जीवन में स्वयं के पूर्ण विकास के लिए किस विषय से संबंधित ज्ञान ग्रहण करना आवश्यक है ?
७- ज्ञान ग्रहण करने के लिए व्यक्ति में कौन से गुण होना आवश्यक है ?
८- भौतिकवादी व्यक्ति और पुरुषार्थी व्यक्ति में क्या अंतर है ?
९- आप आस्तिक विचारधारा का अनुसरण करते हैं या नास्तिक विचारधारा का अनुसरण करते हैं ?
१०- भीड़ और विलासिता पूर्ण जीवन, या ज्ञानयुक्त एकांतिक जीवन इनमें से आपको क्या प्रभावित करता है ?
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"शुद्धिकरण"
👉शुद्धिकरण के बारे में हम सभी को एक बात अवश्य ही समझनी चाहिए कि - "जब शरीर में अशुद्धि के कारण कोई रोग होता है तो हम डॉक्टर के पास जाते हैं , इसी प्रकार यदि हमारे मन में कोई अशुद्धि है तो हमें अपने प्रत्यक्ष गुरु के पास जाना चाहिए।
१- शुद्धिकरण कार्यक्रम क्या है ?
त्रिस्तरीय ( शरीर, मन, बुद्धि ) शुद्धिकरण एक आध्यात्मिक ज्ञान आधारित श्रंखला है। जो की पूर्णतया निशुल्क एवं योग्यता आधारित है । जहां हम चर्चाओं के माध्यम से जीवन के कठिनतम् प्रश्नों के उत्तर जानकर उसे सुलझाने का प्रयास करेंगे ।
२- त्रिस्तरीय ( शरीर, मन, बुद्धि ) शुद्धिकरण की आवश्यकता क्यों है ?
सुखी निश्चिंत जीवन कैसे जिए इसके लिए वर्तमान समय में बहुत से लोग प्रत्यक्ष गुरु से ना जुड़कर सोशल मीडिया से सीख रहे हैं, जिसके कारण वह मानसिक रूप से बुरी तरह उलझ चुके हैं और अपने लक्ष्य वास्तविक लक्ष्य से भटक गए हैं । अतः आज लोगों की वर्तमान में मानसिक स्थिति को देखते हुए इस कार्यक्रम का आयोजन किया है ।
३- इस कार्यक्रम को पूर्ण करने से क्या लाभ होगा और इस कार्यक्रम से हम कैसे जुड़ सकते हैं ?
इस कार्यक्रम पूर्ण करने से सिर्फ शारीरिक मानसिक और बौद्धिक अशुद्धि दूर होने के पश्चात हमें यह स्पष्ट ज्ञात हो जाता है कि हम गलती कहां कर रहे हैं , जिससे हम बिना समय गवाएं अपनी गल्तियों को सुधार कर अपने लक्ष्य तक आसानी से पहुंच सकते हैं । आप में से जिनको आध्यात्मिक विषयों में रुचि है वह अपना "सत्यापन" कार्यक्रम पूर्ण करके इस कार्यक्रम में भाग ले सकते हैं । सभी सुविधाएं ऑनलाइन उपलब्ध रहेगी । इस कार्यक्रम से किसी भी प्रकार के भौतिक लाभ की आशा ना रखें ।
४- शुद्धीकरण' का क्या अर्थ होता है ?
किसी भी प्रकार के विजातीय तत्व से मुक्त होना शुद्धिकरण कहलाता है ।
५- शुद्धिकरण क्यों आवश्यक है ?
सत्य कभी दो नहीं होते सत्य एक ही होता है, हमने अपने शोध कार्य में पाया कि समाजिक लोग किसी भी विषय पर मनमानी बातें करते हैं जिससे वे कभी सत्य क्या है यह नहीं जान पाते, इसीलिए त्रिस्तरीय शुद्धिकरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया है , क्योंकि बिना शुद्धिकरण के सत्य तक पहुंचना संभव नहीं है , मूल तत्व ( स्वभाव ) को जानने के लिए शुद्धिकरण आवश्यक है ।
६- मूल तत्व या मूल स्वभाव को जानना क्यों आवश्यक है ?
मूल तत्व को जाने बिना हमारी गणनाओं में भिन्नता आती है जिससे हम सही परिणाम अर्थात सत्य तक नहीं पहुंच पाते ।
७- शुद्धिकरण कितने स्तर तक करना आवश्यक है ?
शुद्धिकरण निम्न स्तर पर होना आवश्यक है -
शरीर , मन, विचार, भावनाएं, बुद्धि, स्मृति ( कारण शरीर )
८- शुद्धिकरण के कितने मार्ग हैं ?
शुद्धिकरण के कई मार्ग हैं जिनमें से कुछ निम्नलिखित हैं -
योग - जिसके अंतर्गत शरीर शुद्धि के लिए यम , नियम, आसन, प्राणायाम , प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि हैं।
ज्ञान - ज्ञान मार्ग बुद्धि आधारित है और यहां बुद्धि के शुद्धिकरण पर विशेष तौर पर ध्यान दिया जाता है ।
भक्ति - भक्ति मार्ग में साधक समर्पण भाव से अपने ईस्ट आराध्या के नाम जप का स्मरण कर शुद्धिकरण करता है ।
९- अशुद्धियां कैसे हो जाती है ? इन्हें कैसे शुद्ध करें ?
शरीर - मनमाना, इच्छा अनुसार खान-पान एवं आचरण, जिसके कारण शरीर अशुद्ध हो जाता है । इसे दूर करने के लिए ऋतु अनुसार प्राणायाम, आहार-विहार एवं दिनचर्या व्यवस्थित करनी चाहिए ।
मन- मन हमारी इन्द्रियों का राजा है, निरंतर इंद्रियों से संबंधित विषयों का चिंतन करने से मन अशुद्ध हो जाता है, इसे हम ध्यान और अपने इष्ट के नाम का जप द्वारा शुद्ध कर सकते हैं । जब हमारा मन शुद्ध हो जाता है तो विचार और भावनाएं स्वत: ही शुद्ध हो जाएगी ।
बुद्धि - सुनी सुनाई बिना प्रमाणिक बातों का अनुसरण करने से हमारी बुद्धि दूषित हो जाती है । सात्विक आहार ,सत्संग , श्रवण, चिंतन, मनन एवं शंका समाधान से हमारी बुद्धि शुद्ध होती है।
स्मृति- जो अतृप्त वासनाएं, इच्छाएं वर्तमान में पूरी नहीं होती , वे सभी हमारी स्मृति में संचित रहती हैं , यही संचित अतृप्त वासनाएं, इच्छाएं हमें जन्म जन्मांतर तक भटकाती रहतीं हैं, जिसके कारण हमारा मन कभी भी ईश्वर को जानने समझने और उन तक पहुंचने के लिए उत्सुक नहीं रहता । इसलिए यदि सम्भव हो तो बिना नियम तोड़े पहले उन्हें पूरा कर लें ।
१०- उपरोक्त शुद्धिकरण में कितना समय लगेगा ?
यदि आपके जीवन में सद्गुरु हैं तो आपकी अपनी क्षमता अनुसार १ वर्ष से लेकर १२ वर्ष तक का समय लगेगा ।और यदि जीवन में सद्गुरु नहीं है तो छोटी-छोटी इच्छाओं की पूर्ति के लिए अनंत जन्म भटकना पड़ेगा ।
११- शुद्धिकरण की क्या विधि है ?
हमने अपने कार्यक्रम को पूर्ण करने के लिए इसे ५ चरणों में बांटा है -:
श्रवण - विषय से संबंधित जानकारी एकत्र करना
मनन - प्राप्त जानकारी पर मनन करें कि - क्या वह सत्य है या नहीं
प्रयोग - प्राप्त जानकारी को अपने गुरु के सानिध्य में प्रयोग करें ।परिणाम - अनुकूल या प्रतिकूल परिणाम प्राप्त।
सत्यापन - परिणाम अनुकूल हो या प्रतिकूल हो अपने अनुभव के आधार पर उसे सत्यापित करें ।
👉यह कार्यक्रम पूर्णतया स्वेच्छा और योग्यता आधारित है ।
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