Thursday, December 19, 2024

Ganesh

प्रणाम मित्रों 🙏
समाज में दो प्रकार के लोग पाए जाते हैं-  एक वे जो किसी न किसी का अनुसरण करते हैं, और दूसरे वे जो किसी का भी अनुसरण नहीं करते अर्थात अपने मन मर्जी जीवन जीते हैं । वैसे यदि सूक्ष्म रूप में समझा जाए तो प्रत्येक व्यक्ति किसी न किसी का अनुसरण तो करता ही है, भले ही चाहे वह अपने मन का ही क्यों ना हो । हमारी इस चर्चा का केवल एक ही उद्देश्य है यह जानना कि आप जिसका भी अनुसरण करते हो , क्या आप उसे पूर्ण रूप से जानते हो या नहीं । या फिर केवल अंधविश्वास या कुछ भौतिक लाभ के लिए अनुसरण करते हो । नीचे कुछ विषय दिए जा रहे हैं अपनी समझ अनुसार इनका व्याख्यान करें ।

१- स्वयं, 
२- साधक, 
३- सद्गुरु,
४- ईश्वर 
५- नैतिक ज्ञान और संस्कार 
६- आस्तिक और नास्तिक 
७- भाग्य और कर्म
८- धर्म और राजनीति 
९- विज्ञान और अध्यात्म 
१०- अंधविश्वास और ज्ञान 
११- भक्ति और कर्म
१२- सबके लिए एक नियम या श्रेणी अनुसार सबके लिए अलग-अलग नियम 
१३- वैदिक संस्कृति या पाश्चात्य संस्कृति
१४- वैदिक संस्कृति में किस संप्रदाय का अनुसरण करते हैं
 १५- पाश्चात्य संस्कृति में किस संप्रदाय का अनुसरण करते हैं   
                       
            ऋषि Agyey ~🧘‍♂️ 
Spiritual guide and motivator"

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१   मैं एक सा माजिक प्राणि हूं मैं दूसरो का दुःख देखकर दुःखी हो जाता हुं लेकिन किसी का सुख देखकर कभी दुःखी नही हुआ मुझे आप एक सज्जन पुरुष कह सकते हो

२  साधक वो होता है जो साधना करता है वह साधना के द्वारा अपना जीवन सुधारता है वह गुरु के द्वारा दिखए गये मार्ग पर चलता है
३ सद्गुरु वह होता है जो हमे इश्वर से मिलाने का सही रास्ता दिखता हैं
४ ईश्वर हमारे आस पास सभी जगह मौजूद होते है ईश्वर अपने भक्तों की हमेशा रक्षा करते हैं व हमारे द्वावारा किये अच्छे -बुरे कर्मो का फल देते है  
५ हमारे पास नैतिक ज्ञान का होना अति आवश्यक है जो हमे षिष्टाचार सिखाता है और हमारे संस्कार में होना चाहिए कि हम सदा बड़ों का सम्मान करे व सभी के साथ अच्छा आचरण करें
६ आस्तिक व्यक्ति वह होता है जो ईश्वर  को मानता है व पूजा पाठ करता है उसका ईश्वर पर अटूट विश्वास होता है और नास्तिक वह होता है जो ईश्वर को नही मानता और वह संसार के भोग विला. मे लगा रहता है
७ भाग्य हमारे लिए भगवान द्वारा पहले से जो अच्छा बुरा लिखा गया होता है हमें वही मिलता है और हम इस भाग्य को अपने कर्मों के द्वारा बदल सकते है
८ हर इन्सान का एक धर्म होता है जैसे हम हिन्दू धर्म के हैं तो हम किसी एक या इसससे अधिक इश्वरो की आराधना करते हैं और इसी प्रकारराजनीति में बहुत सी पर्टियां होती हैं लेकिन हम किसी एक से ही जुड़ सकते हैं जिस पार्टी के कार्य हमें सही लगते है हम उसी पार्टी को  सपोर्ट करते हैं
९विज्ञान= वि+ ज्ञान इ इसका यह अर्थ होता है कि विषेष ज्ञान विज्ञान के द्वारा आजा हमारा जीवन सुगम ' हो गया है आज सभी क्षेत्र मे विज्ञान .........

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