Sunday, December 8, 2024

2025 में विवाह संबंधी आवश्यक प्रश्नोत्तरी

प्रिय आत्मन् 

         मन सोची होती नहीं
         प्रभु सोची तत्काल.
         बली मंगत आकाश को
         प्रभु  दीन्हा पाताल.

संसार में प्रत्येक बुद्धिमान व्यक्ति सुखी दांपत्य जीवन जीने के लिए जो भी संभव हो उसके लिए भरपूर प्रयासरत रहते हैं । इसके लिए हमारे वैदिक पद्धति में पहले से ही बहुत अच्छी व्यवस्था की गई है , जो कि कुंडली मिलान या अष्टकूट मिलान के नाम से विख्यात है । वर्तमान समय में सुखी दांपत्य जीवन एक सपनों की भांति हो गया है, वर्तमान समय में एक समस्या देखने को ज्यादा मिल रही है , कि लोग फर्जी कुंडली ( जिनके जन्म विवरण वास्तविक नहीं रहता ) बनवा कर फर्जी कुंडली मिलान करके सुखी दांपत्य जीवन की आशा रखते हैं । यह बिल्कुल ही गलत है । कई बार देखने में ऐसा भी आया है कि यदि वालों को  लड़का या लड़की पसंद आ जाते हैं तो फर्जी कुंडली बनवा कर शादी करवा दी जाती है । यह बिल्कुल भी ठीक नहीं है । यह दोनों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ है । यदि आपके पास लड़के या लड़की की वास्तविक कुंडली नहीं है तो अपने कुलगुरू से इस बारे में विचार विमर्श अवश्य करें । वही आपको सही मार्गदर्शन देंगे ।

सुखी वैवाहिक जीवन के लिए ज्योतिषीय कुंडली मिलान
ज्योतिष में सुखी दांपत्य जीवन के लिए कुंडली मिलान एक महत्वपूर्ण पद्धति है। 

नाम राशि या जन्म राशि आधारित मिलान: यह राशि पर आधारित होता है, लेकिन इसकी सटीकता कम होती है।

जन्म विवरण आधारित मिलान: जन्म तिथि, समय और स्थान से किया गया मिलान अधिक सटीक होता है, क्योंकि इसमें ग्रह स्थिति और अष्टकूट मिलान (वर्ण, वश्य, तारा, योनि, ग्रह मैत्री, गण, भकूट, नाड़ी) का विश्लेषण होता है।

महत्वपूर्ण: सटीक परिणाम के लिए जन्म विवरण (जन्म तिथि, समय, स्थान) प्रमाणित होना चाहिए।

१- प्रीति षडाष्टक योग की राशियाँ कौन-कौन सी हैं ?
प्रीति षडाष्टक में वे राशियाँ आती हैं जिनके स्वामी एक ही ग्रह या मित्र ग्रह होते हैं। यह स्थिति रिश्ते में सामंजस्य और आकर्षण को बढ़ावा देती है:

• मेष - वृश्चिक: दोनों का स्वामी मंगल है।

• वृषभ - तुला: दोनों का स्वामी शुक्र है।

• मिथुन - मकर: बुध और शनि मित्र हैं।

• कर्क - धनु: चंद्र और बृहस्पति के बीच मैत्रीपूर्ण संबंध है।

• सिंह - मीन: सूर्य और बृहस्पति मित्र हैं।

• कन्या - कुम्भ: बुध और शनि आपस में मित्र ग्रह हैं।

२- मृत्यु षडाष्टक योग की राशियाँ कौन-कौन सी हैं ?

मृत्यु षडाष्टक में वे राशियाँ आती हैं जिनके स्वामी ग्रह आपस में शत्रु होते हैं:

• मेष - कन्या: मंगल और बुध में शत्रुता है।

• वृषभ - धनु: शुक्र और बृहस्पति का संबंध प्रतिकूल है।

• मिथुन - वृश्चिक: बुध और मंगल में असहमति है।

• कर्क - कुम्भ: चंद्र और शनि में स्वाभाविक विरोध है।

• सिंह - मकर: सूर्य और शनि में शत्रुता है।

• तुला - मीन: शुक्र और बृहस्पति आपस में शत्रु हैं।

३- प्रीति षडाष्टक और मृत्यु षडाष्टक का अंतर क्या है ?

प्रीति षडाष्टक और मृत्यु षडाष्टक के बीच का मुख्य अंतर उनके ग्रह स्वामियों के संबंध से है:

प्रीति षडाष्टक में दोनों राशियों के ग्रह स्वामी या तो एक जैसे होते हैं या आपस में मित्र होते हैं। इस स्थिति में, भले ही मतभेद हों, प्रेम और आकर्षण की वजह से रिश्ते में सामंजस्य बना रहता है और व्यक्ति एक-दूसरे के साथ दीर्घकालिक संबंध स्थापित कर सकते हैं।

मृत्यु षडाष्टक में ग्रह स्वामी एक-दूसरे के शत्रु होते हैं, जिससे रिश्ते में तनाव और असंतोष उत्पन्न होता है। शुरुआत में आकर्षण हो सकता है, लेकिन समय के साथ यह घटता जाता है, जिससे संबंधों में दरार आ सकती है।

४- षडाष्टक दोष के निवारण कैसे करें ?

षडाष्टक दोष के नकारात्मक प्रभाव को कम करने के लिए कुछ उपाय किए जा सकते हैं:

ग्रह पूजा: जिस ग्रह से दोष उत्पन्न हो रहा है, उसकी पूजा करने से कुछ हद तक राहत मिल सकती है, हालांकि इससे दोष पूरी तरह समाप्त नहीं हो सकता।

विशेष अनुष्ठान: कुछ विशेष अनुष्ठानों का पालन करके और संबंधित ग्रह से जुड़े रत्न पहनने से नकारात्मक ऊर्जा को कम किया जा सकता है।

अगर दोनों राशियों के ग्रह स्वामी मित्र हों, या दोनों का राशि चक्र समान हो, तो भी षडाष्टक दोष को समाप्त किया जा सकता है।

५- वैवाहिक कार्यक्रम में त्रिबल शुद्धि क्या है ?

त्रिबल शुद्धि हिंदू विवाहों में एक महत्वपूर्ण ज्योतिषीय विचार है। विवाह के मुहूर्त का निर्धारण करते समय वर और वधू की जन्मपत्रिका के अनुसार सूर्य, चंद्रमा और बृहस्पति (गुरु) ग्रहों की स्थिति का विश्लेषण किया जाता है। इस विश्लेषण को ही त्रिबल शुद्धि कहते हैं।

६- क्यों महत्वपूर्ण है त्रिबल शुद्धि ?

शुभ मुहूर्त: यह सुनिश्चित करता है कि विवाह का मुहूर्त ग्रहों की शुभ स्थिति में हो।

वैवाहिक जीवन: माना जाता है कि त्रिबल शुद्धि से वैवाहिक जीवन सुखमय और सफल होता है।

दोष निवारण: विवाह में आने वाले कुछ संभावित दोषों को दूर करने में मदद मिलती है।

७- त्रिबल शुद्धि में क्या देखा जाता है ?

सूर्य: वर के लिए सूर्य का बल देखा जाता है।

बृहस्पति: वधू के लिए बृहस्पति का बल देखा जाता है।

चंद्रमा: वर और वधू दोनों के लिए चंद्रमा का बल देखा जाता है।

इन तीनों ग्रहों की जन्मपत्रिका और गोचर में स्थिति को देखकर यह निर्धारित किया जाता है कि विवाह के लिए मुहूर्त शुभ है या नहीं।

८- त्रिबल शुद्धि के क्या लाभ हैं ?

सुखमय वैवाहिक जीवन: माना जाता है कि त्रिबल शुद्धि से वैवाहिक जीवन सुखमय और सफल होता है।

दोष निवारण: विवाह में आने वाले कुछ संभावित दोषों को दूर करने में मदद मिलती है।

मन की शांति: विवाह से पहले होने वाली चिंता को कम करने में मदद मिलती है।

९- त्रिबल शुद्धि की गणना कैसे की जाती है ?

त्रिबल शुद्धि की गणना एक जटिल ज्योतिषीय प्रक्रिया है, जिसे एक कुशल ज्योतिषी ही सही तरीके से कर सकता है। यह गणना वर और वधू की जन्मपत्रिकाओं का गहन अध्ययन करके की जाती है।

मुख्य रूप से निम्नलिखित कारकों पर ध्यान दिया जाता है:

सूर्य, चंद्रमा और बृहस्पति की स्थिति: इन तीनों ग्रहों की वर और वधू की जन्म राशियों से स्थिति का विश्लेषण किया जाता है।

चतुर्थ, अष्टम और द्वादश भाव: इन भावों को अशुभ माना जाता है। अगर ये ग्रह इन भावों में स्थित हैं तो यह शुभ नहीं माना जाता।

गोचर: वर्तमान समय में ग्रहों की स्थिति का भी ध्यान रखा जाता है।

१०- कैसे की जाती है गणना ?

जन्मपत्रिका का विश्लेषण: सबसे पहले वर और वधू की जन्मपत्रिकाओं का विस्तृत विश्लेषण किया जाता है।

ग्रहों की स्थिति: सूर्य, चंद्रमा और बृहस्पति की जन्म राशियों और गोचर में स्थिति का अध्ययन किया जाता है।

भावों का विश्लेषण: इन तीनों ग्रहों की स्थिति उपरोक्त बताए गए अशुभ भावों में है या नहीं, यह देखा जाता है।

शुभ और अशुभ फल: ग्रहों की स्थिति के आधार पर शुभ और अशुभ फल का आकलन किया जाता है।

११- क्यों जरूरी है त्रिबल शुद्धि ?

शुभ मुहूर्त: यह सुनिश्चित करने के लिए कि विवाह का मुहूर्त ग्रहों की शुभ स्थिति में हो।

वैवाहिक जीवन: माना जाता है कि त्रिबल शुद्धि से वैवाहिक जीवन सुखमय और सफल होता है।

दोष निवारण: विवाह में आने वाले कुछ संभावित दोषों को दूर करने में मदद मिलती है।

ध्यान रखें: त्रिबल शुद्धि एक ज्योतिषीय विचार है और इसका वैज्ञानिक आधार नहीं है। त्रिबल शुद्धि की गणना एक जटिल प्रक्रिया है और इसे स्वयं करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। किसी कुशल ज्योतिषी से संपर्क करना सबसे अच्छा विकल्प है।

अन्य महत्वपूर्ण बातें:

त्रिबल शुद्धि के अलावा भी विवाह मुहूर्त निर्धारित करने के लिए कई अन्य कारकों पर ध्यान दिया जाता है।

त्रिबल शुद्धि एक ज्योतिषीय विचार है और इसका वैज्ञानिक आधार नहीं है।

विवाह एक पवित्र बंधन है और इसे केवल ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित नहीं करना चाहिए।

अनुभवी ज्योतिषी से परामर्श लें और अपने वैवाहिक जीवन को सुखमय बनाएं!

16 जनवरी 2025 से 14 मई 2025 तक 
कन्या के चालू नाम एवं राशि नाम से 2025 में विवाह निकल रहा है।
१-८, २-९, ३-१०, ४-११, ५-१२, ६-१, ७-२, ८-३, ९-४, 
मेष  ✓
कर्क 
कन्या 
वृश्चिक 
मकर 
16 जनवरी से 14 फरवरी 2025 में वर की राशि अनुसार विवाह निकलता है । 
मेष 
सिंह 
वृश्चिक √
मीन
जनवरी 2025 के लिए विवाह के शुभ मुहूर्त:  16, 17, 18, 19, 20, 21, 23, 24, 26 और 27 तारीख को विवाह के शुभ मुहूर्त.

15 फरवरी 15 मार्च 2025 में वर की राशि अनुसार विवाह निकलता है ।
मेष 
वृष
कन्या 
धनु 
फरवरी 2025 में विवाह के लिए शुभ मुहूर्त: 2, 3, 6, 7, 12, 13, 14, 15, 16, 18, 19, 21, 23 और 25 तारीख को विवाह के शुभ मुहूर्त.

15 मार्च 15 अप्रैल 2025 में वर की राशि अनुसार विवाह निकलता है ।
वृष
मिथुन 
तुला 
मकर
मार्च 2025 में विवाह के लिए शुभ मुहूर्त: 1, 2, 6, 7 और 12 तारीख को विवाह के लिए शुभ मुहूर्त.

16 अप्रैल 15 मई 2025 में वर की राशि अनुसार विवाह निकलता है ।
मिथुन 
कर्क 
वृश्चिक 
कुंभ 
अप्रैल 2025 में विवाह के लिए शुभ मुहूर्त: 14, 16, 18, 19, 20, 21, 25, 29 और 30 तारीख को विवाह के लिए शुभ मुहूर्त.

16 मई 2025 से 8 जून 2025 तक कन्या की राशि अनुसार 2025 में विवाह निकल रहा है।
१-८, २-९, ३-१०, ४-११, ५-१२, ६-१, ७-२, ८-३, ९-४, 
वृष 
सिंह 
तुला 
धनु 
कुंभ 
16 मई 8 जून 2025 में वर की राशि अनुसार विवाह निकलता है 
कर्क 
सिंह 
धनु 
मीन
मई एवं जून 2025 में विवाह के लिए शुभ मुहूर्त: 1, 5, 6, 8, 10, 14, 15, 16, 17, 18, 22, 23, 24, 27 और 28 तारीख को विवाह के लिए शुभ मुहूर्त. । जून 2025 में विवाह के लिए शुभ मुहूर्त: 2, 4, 5, 7 और 8 तारीख को विवाह के लिए शुभ मुहूर्त.

1 नवम्बर 2025 से 6 दिसंबर 2025 तक कन्या की राशि अनुसार 2025 में विवाह निकल रहा है।
१-८, २-९, ३-१०, ४-११, ५-१२, ६-१, ७-२, ८-३, ९-४, 
मिथुन 
सिंह 
तुला √
मकर 
मीन 
1 नवंबर 2025 से 15 नवंबर 2025 तक वर की राशि अनुसार विवाह 
वृष √
सिंह 
धनु 
मकर 
16 नवंबर 2025 से 6 दिसंबर 2025 तक वर की राशि अनुसार विवाह 
मिथुन 
कन्या 
मकर 
कुंभ
नवंबर 2025 में विवाह के लिए शुभ मुहूर्त: 2, 3, 6, 8, 12, 13, 16, 17, 18, 21, 22, 23, 25 और 30 तारीख को विवाह के लिए शुभ मुहूर्त. 
दिसंबर 2025 में विवाह के लिए शुभ मुहूर्त: 4, 5 और 6 तारीख को

👉https://www.abplive.com/lifestyle/religion/vivah-muhurat-2025-shubh-muhurat-wedding-january-to-december-marriage-dates-tithi-2835248

👉 https://hindi.astroyogi.com/blog/vivah-muhurat-2025.aspx 

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