संसारी व्यक्ति - मनमानी तरीके से काम करने वाला , केवल भौतिक लाभ के लिए काम करने वाला।
साधक - जो गुरु सानिध्य में अपने लक्ष्य प्राप्ति हेतु साधना कर रहा है ।
लक्ष्य -भौतिक सुख सुविधा प्रताप, सिद्धियां प्राप्ति , आत्म ज्ञान प्राप्ति , ईश्वर प्राप्ति, एक सड़क का इनमेंस कोई भी लक्ष्य हो सकता है।
मार्ग - ज्ञान मार्ग, भक्ति मार्ग , क्रिया योग, कर्म योग, हठयोग, राजयोग
अनुभव - इन सभी मार्गों में होने वाले अनुभव ।
ध्यान दें कि कभी भी सांसारिक लोगों को ज्ञान नहीं देना चाहिए, क्योंकि ज्ञान का संबंध जिज्ञासुओं से है । एक सामाजिक व्यक्ति स्वयं में सुधार करने की वजाय आप में ही कमियां निकालेंगे , इसके लिए पहले साधक और सांसारिक लोगों में अंतर अवश्य समझें , इसके बाद कार्यक्रमों में आगे बढ़े ।
👉संसारी और साधक में अंतर
👉Please copy and open link -
https://guruplusmerafree.blogspot.com/2024/12/blog-post_12.html
👉ज्ञान ग्रहण करने का उद्देश्य - आपके ज्ञान ग्रहण करने के पीछे कई उद्देश्य हो सकते हैं, जैसे -
१- मात्र जानकारी एकत्र करना
२- विद्वान बनाना
३- आत्म कल्याण
👉कार्यक्रम विवरण
१- मूल्यांकन - हम यह जान सके हमें क्या चाहिए और कौन सा मार्ग अपनाना है , इसके लिए पहले स्वयं का मूल्यांकन आवश्यक है ।
२- सत्यापन - स्वयं के मूल्यांकन के बाद सत्यापन भी आवश्यक है क्योंकि इसी के आधार पर हम स्वयं को व्यक्त कर सकते हैं
३- शुद्धिकरण - मूल्यांकन और सत्यापन के बाद यदि कोई अशुद्धि है तो पहले हम उसे दूर करेंगे, तभी जाकर हमें ज्ञान का पूर्ण लाभ होगा ।
४- सत्संग - जिसने भी सत्य संग का मतलब जाना है उसका पतन हमेशा के लिए रोक दिया गया है। किंतु बिना शुद्धिकरण के आज तक कोई भी सत्य का संग नहीं कर पाया अतः शुद्धिकरण पहले आवश्यक है ।
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