*प्रिय आत्मन्*
*मोक्षदा एकादशी के शुभ अवसर पर श्रीमद्भगवत गीता संबंधित ज्ञान चर्चा में शामिल हों ।*
*11 दिसंबर रात्रि 8:30 से*
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१- श्रीमद्भगवत गीता क्या ?
२- श्रीमद्भगवत गीता के ज्ञान की आवश्यकता क्यों है ?
३- श्रीमद्भागवत गीता का मुख्य विषय क्या है ?
४- श्रीमद्भगवत गीता किसके लिए उपयोगी है ?
५- श्रीमद्भगवत गीता से लाभ लेने के लिए क्या योग्यता होनी चाहिए ?
६- श्रीमद्भगवत गीता से दीक्षित व्यक्ति की क्या पहचान है ?
७- श्रीमद्भगवद्गीता गीता का भक्ति योग क्या है, क्या इसके पालन करने से मुक्ति संभव है ? अर्थात इसके नियमों का पालन करके अंत में हम कहां पहुंचते हैं ? यदि कोई वर्तमान में उदाहरण हो तो देकर समझाएं ।
८- श्रीमद्भगवद्गीता गीता का कर्म योग क्या है , क्या इसके पालन करने से मुक्ति संभव है ? अर्थात इसके नियमों का पालन करके अंत में हम कहां पहुंचते हैं ? यदि कोई वर्तमान में उदाहरण हो तो देकर समझाएं ।
९- श्रीमद्भगवद्गीता गीता का ज्ञान योग क्या है , क्या इसके पालन करने से मुक्ति संभव है ? अर्थात इसके नियमों का पालन करके अंत में हम कहां पहुंचते हैं ? यदि कोई वर्तमान में उदाहरण हो तो देकर समझाएं ।
१०- कृष्ण के रावण के और आपके अहंकार में क्या अंतर है ?
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*यदि आप कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाते तो उपरोक्त प्रश्नों के उत्तरों पर आप अपने विचार हमें लिखकर या ऑडियो रिकॉर्ड करके भी भेज सकते हैं ।*
*धन्यवाद 🙏*
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१- सौरभ दुबे
[10/12, 8:22 am] Saurabh Duve: 1 श्री कृष्ण के मुख से निकली हुई भागीरथी गंगा है
[10/12, 8:22 am] Saurabh Duve: 2 संसार में जीने के लिए गीता ज्ञान उतना ही आवश्यक है जितना की जीने के लिए अन्न जल
[10/12, 8:24 am] Saurabh Duve: 3 लोगो के लिए धर्म के मार्ग पर जोड़ना ही भगवत गीता का मुख्य विषय है
[10/12, 8:26 am] Saurabh Duve: 4 शुभ आचरण करने वाले और धर्म के प्रीति आस्था रखने बालो के लिए ही भगवत गीता उपयोगी है
[10/12, 8:26 am] Saurabh Duve: 5 भक्ति और ज्ञान की योग्यता होनी चाहिए
[10/12, 8:29 am] Saurabh Duve: 6 जो भगवत गीता से दीक्षित हो जाता है या गीता जी का अध्ययन कर लेता है तो फिर वह व्यक्ति सीधा परमात्मा से जुड़ जाता है उसे व्यक्ति में अपने और पराए की भावना नहीं रहती संसार के मोह माया से वह अपने आप को दूर कर लेता है और एक भगवान को ही अपना सब कुछ मानता है यही भागवत गीता से दीक्षित व्यक्ति की पहचान है
[10/12, 8:32 am] Saurabh Duve: 7 भगवत गीता के नियमों का पालन करने वाला व्यक्ति स्वर्ग में जाता है एवं कलयुग के दोशों से वह व्यक्ति ग्रसित नहीं होता है और अंत में मोक्ष की प्राप्ति होती है 84 लाख योनियों में भटकना नहीं पड़ता है
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