Wednesday, July 31, 2024

हनुमान चालीसा सिद्धि


१- हनुमान चालीसा क्या है ?
चालीसा यानी चालीस पदों का समूह। चालीसा में 4 छंद होते हैं या कहें कि 40 चौपाइयां होती हैं इसीलिए इसे चालीसा कहते हैं। यह चालीसा महान रामभक्त गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा लिखी एक काव्यात्मक कृति है ! जिसमें प्रभु श्री राम के सर्वोत्तम भक्त हनुमान जी के गुणों एवं कार्यों का वर्णन है।

२- हनुमान चालीसा का पाठ करना क्यों अनिवार्य है ?
यह कोई निश्चित नियम नहीं है कि हर किसी व्यक्ति को हनुमान चालीसा का पाठ करना अनिवार्य हो । किंतु यहां एक नियम ध्यान देने योग्य है कि जो भी भक्ति मार्गी है उनके लिए
यदि वे लग्नेश , पंचमेश एवं भाग्येश से संबंधित देव की उपासना करते हैं तो उसके फलित होने की अधिक संभावना रहती है। 

३- सिद्धि क्या है ? यह कैसे काम करती है ?
सरल भाषा में यदि बात की जाए तो सिद्धि अर्थात ब्रह्मांड में फैली ऊर्जा को एकत्रित करके किसी शुभ कार्य करने के योग्य बनाना और जब वह ऊर्जा हमारे अनुकूल होकर काम करने लगे तो यह समझना चाहिए कि वह मंत्र या सिद्धी सिद्ध हो गई है । जैसे - 
जब तक हम किसी वाहन को चलाना नहीं सीखते तब तक उससे दुर्घटना होने का भय रहता है , किंतु जब हम वाहन को अपने प्रयास और परिश्रम से चलाना सीख जाते हैं अर्थात उस पर अपना काबू पा लेते हैं तब वह हमारे लिए बहुत ही लाभदायक रहता है । उससे हम किसी की भी सहायता कर सकते हैं ।

५- हनुमान चालीसा कैसे सिद्ध करें ?

समय - यह साधना साधक श्रीराम नवमी, हनुमान जयन्ती अथवा शुक्लपक्ष के पहले मंगलवार की रात्रि को शुरु कर सकता है तथा समय १० बजे के बाद का रहेगा। सर्वप्रथम साधक स्नान आदि से निवृत्त होकर लाल या भगवे वस्त्र धारण करके लाल आसन पर बैठ जाए। सकाम और निष्काम दोनों ही कार्यों में दिशा उत्तर ही रहेगी।

आसन- कंबल या कोई भी विद्युत का कुचालक आसान होना चाहिए । यदि लाल रंग का आसान हो तो और भी शुभ रहेगा ।

भोग - भुने हुए चने गुड़ एवं तुलसी पत्र ।

अन्य समग्री - भगवान के आसन के लिए एक पटा, लाल कपड़ा, कलश स्थापना के लिए एक नारियल, कलश, कलवा
यदि व्यवस्था हो तो दीपक के लिए गाय का शुद्ध घी, या फिर चमेली के तेल , सुगंध के लिए गुलाब की धूप बत्ती ।

विधि - साधक अपने समीप ही किसी पात्र में 108 भुने हुए चने तुलसी पत्र और गुड़ या 108 तिल की रेवड़ियाँ रख ले। अब साधक अपने सामने किसी बाजोट पर लाल वस्त्र बिछा कर उस पर हनुमानजी का चित्र या यन्त्र या विग्रह और साथ ही भगवान गणपतिजी का विग्रह या प्रतीक रूप में एक सुपारी स्थापित करे। उसके बाद दीपक और धूप-अगरबत्ती जलाए।

फिर साधक भगवान गणपतिजी का सामान्य पूजन करे और ॐ वक्रतुण्डाय हुम् मन्त्र का एक माला जाप करे। तत्पश्चात साधक भगवान गणपतिजी से साधना की निर्विघ्न पूर्णता एवं सफलता के लिए प्रार्थना करे। फिर साधक सामान्य गुरु पूजन करे एवँ गुरु की आज्ञा ले एवँ सफलता के लिए पार्थना करे।

इसके बाद साधक भगवान हनुमानजी का सामान्य पूजन करे। उन्हें सिन्दूर से तिलक करे और फिर धूप-दीप अर्पित करे। साधक को आक के पुष्प या लाल रंग के पुष्प समर्पित करना चाहिए।

इस क्रिया के बाद साधक "हं" बीज मंत्र का उच्चारण कुछ देर करे तथा उसके बाद अनुलोम-विलोम प्राणायाम करे। प्राणायाम के बाद साधक हाथ में जल लेकर संकल्प करे तथा अपनी मनोकामना बोले। अगर कोई विशेष इच्छा के लिए साधना की जा रही हो तो साधक को संकल्प लेना चाहिए कि मैं अमुक नाम का साधक अमुक गोत्र अमुक गुरु का शिष्य होकर यह साधना अमुक कार्य के लिए कर रहा हूँ। भगवान हनुमान मुझे इस हेतु सफलता के लिए शक्ति तथा आशीर्वाद प्रदान करे।

इसके बाद साधक राम रक्षा स्तोत्र का एक पाठ या "रां रामाय नमः" का यथासम्भव जाप करे। अब जो 108 भुने हुए चने या तिल की रेवड़ियाँ आपने ली थी, वे अपने सामने एक कटोरी में रख लें तथा हनुमान चालीसा का जाप शुरू कर दे। इस साधना में आपको श्रीहनुमान चालीसा के 108 पाठ करने हैं। आप हनुमान चालीसा पढ़ते जाएं और हर एक बार पाठ पूर्ण होने के बाद एक चना या रेवड़ी हनुमानजी के यन्त्र/चित्र/विग्रह को समर्पित करते जाएं। इस प्रकार 108 बार पाठ करने पर 108 चने या रेवड़ियाँ समर्पित करनी चाहिए।

108 पाठ पूरे होने के बाद साधक पुनः "हं" बीज मंत्र का थोड़ी देर उच्चारण करे तथा जाप को हनुमानजी के चरणों में समर्पित कर दे। यह साधना 21 दिनों की है। 21 वें दिन आपके द्वारा पूरे 108 पाठ करके चने या तिल की रेवड़ी जब चढ़ा दी जाए, तब उसके बाद साधना पूर्ण होने पर अन्तिम दिन मन्दिर जाएं और भगवान हनुमानजी के दर्शन करे। साथ ही साथ साधना के दौरान भी आप हनुमत दर्शन करते रहें ।

६- सावधानियां 
  •  अध्यात्मिक अनुशासन के बिना :- हनुमान चालीसा को पढ़ते समय ध्यान केंद्रित रखें। यह बिना किसी व्यक्तिगत अभ्यास या अध्यात्मिक अनुशासन के किया जा सकता है, लेकिन ध्यान के साथ पढ़ने से इसके लाभ अधिक होते हैं.
  • अशुभ स्थितियों में :- अगर आप किसी अशुभ स्थिति में हैं, जैसे कि उद्विग्नता, क्रोध, या दुख, तो हनुमान चालीसा का पाठ करने से बेहतर है यह न करें। आपको शांत और स्थिर होने के लिए अपनी मानसिकता को पहले शुद्ध करने की कोशिश करनी चाहिए.
  • अनिष्ट फलका इंतजाम :- हनुमान चालीसा का पाठ व्यक्तिगत या सामाजिक लाभ के लिए करना नहीं चाहिए, बल्कि इसे भक्ति और सेवा का हिस्सा मानना चाहिए।
  • अनिष्ट अथवा नास्तिकता :- अगर कोई व्यक्ति हिन्दू धर्म के खिलाफ है या हनुमान चालीसा का पाठ करने में नास्तिक है, तो उसे इसे न करना चाहिए।

बहुत से लोग बस हनुमान चालीसा रट लेते हैं और बस बोलते जाते हैं । बोलने से हनुमान चालीसा सिद्ध नहीं होगी, जप करने से होगी।
जप का अर्थ होता है शब्द पर ध्यान देना। आप जो भी नाम का जप कर रहे हैं या यहाँ हम हनुमान चालीसा की ही बात कर लेते हैं, आपको अर्थ पता होना बहुत ही आवश्यक है। अक्सर देखने में आया है लोग हनुमान चालीसा को बोल रहे होते हैं, जप नहीं करते।

हनुमान चालीसा बोलते हुए आपके मन में एक-एक शब्द का अर्थ आना चाहिए। धीरे - धीरे पढ़ें और अर्थ स्मरण करते रहे।

हनुमान चालीसा के यह अर्थ आपका जीवन बदल देंगे क्यूंकि हनुमान चालीसा हमें जीवन में दिशा देने के लिए ही लिखी हुई है।

यदि आपके जीवन में कोई लक्ष्य नहीं है तो हनुमान चालीसा का अर्थ सहित जाप आपको अपना लक्ष्य पहचानने में सहायता करेगा।

यदि आप अपने जीवन में दुखी हैं तो हनुमान चालीसा का अर्थ सहित जाप आपको दुखों से मुक्ति देगा।

यदि आप पूरी तरह से परिस्थितियों के सामने घुटने टेक चुके हैं तो हनुमान चालीसा का अर्थ सहित जाप आपको शक्ति देगा फिर से जीवन में आने वाली विपत्तियों से जीतने के लिए।

आपको कोई भी समस्या हो, कोई रोग हो, तकलीफ हो, दर्द हो, सब धीरे धीरे ठीक हो जाएगा। 

साधक को यह साधना शुरू करने से एक दिन पूर्व से लेकर साधना समाप्त होने के एक दिन बाद तक कुल २३ दिन तक ब्रह्मचर्य का पालन करना अनिवार्य है। कुछ भी हो, कैसा भी संकट आए, आपने साधना शुरू कर दी तो छोड़ना नहीं। प्रभु आपकी परीक्षा भी ले सकते हैं। साधना से विचलित करेंगे ही, पर आप दृढ़ रहें, क्योंकि भक्ति में अटूट शक्ति है और एक बार आपने यह साधना कर ली तो जो आनन्द और जीवन में उत्साह का प्रवाह होगा - उसका वर्णन मैं अपनी तुच्छ बुद्धि से नहीं कर सकता। फिर भी इतना कह सकता हूँ कि इस साधना से निश्चित ही आप की अभिलाषा की पूर्ति होगी। क्योंकि तुलसीदास जी ने कहा है ना - कवन सो काज कठिन जग माही, जो नही होहि तात तुम पाहि। 

👉साधना का क्रम यही रहेगा २१ दिन तक, तथा प्रतिदिन जो १०८ चने आप ने प्रभु को अर्पण किए थे, वो आप ही को खाना है, किसी को देना नही है । आपकी यह श्री हनुमान चालीसा साधना सफल हों और आपको भगवान हनुमानजी का आशीर्वाद प्राप्त हों ।

हनुमानचालीसा से लाभ 
हनुमानजी की भक्ति सबसे सरल और जल्द ही फल प्रदान करने वाली मानी गई है। यह भक्ति जहाँ हमें भूत-प्रेत जैसी न दिखने वाली आपदाओं से बचाती है, वहीं यह ग्रह-नक्षत्रों के बुरे प्रभाव से भी बचाती है।
  • हनुमान चालीसा का जाप करने से नकारात्मकता के क्षणों में सांसों में सांत्वना मिलती है.
  • हनुमान चालीसा का जाप करने से किसी भी तरह के वात-विकार को नियंत्रित किया जा सकता है. 
  • हनुमान चालीसा के पाठ से भय दूर होता है और क्लेश मिटते हैं.
  • इससे मन में श्रेष्ठ ज्ञान के साथ भक्तिभाव जागृत होता है.
  • हनुमान चालीसा का सात बार रोज़ाना पाठ करने से घर में सुख-समृद्धि बढ़ती है.
  • इससे आर्थिक स्थिति मज़बूत होती है और मनोकामनाएं पूरी होती हैं 
८- हनुमान चालीसा सिद्ध ना होने के क्या कारण है ?
अक्सर हम सब ने यह है अनुभव किया होगा कि कोई भी मंत्र या कोई भी चालीसा हर किसी व्यक्ति से सिद्ध नहीं होता । 
उसके कई कारण हो सकते हैं जैसे -
- गुरु दीक्षा विहीन व्यक्ति का कभी भी कोई कार्य सिद्ध नहीं होता ।
- किताबों से पढ़कर किया गया जप कभी सिद्ध नहीं होता ।
- यूट्यूब वीडियो में सुनकर किया गया जप कभी सिद्ध नहीं होता  ।
- बिना गुरुदीक्षा के किसी से भी मंत्र सुनकर किया गया जब कभी सिद्ध नहीं होता । 
स्मरण करने योग्य तथ्य यह है कि गुरु पुत्र के ही सभी कार्य सिद्ध होते हैं ।

No comments:

Post a Comment

वर्तमान समय की सबसे बड़ी समस्या: दोषारोपण की प्रवृत्ति

प्रणाम मित्रो वर्तमान समय में मनुष्य की सबसे बड़ी समस्या यह है कि वह अपने जीवन में उत्पन्न होने वाली अधिकांश समस्याओं और विकृतियों के लिए स्...