Tuesday, May 14, 2024

अपना मूल्यांकन करें

प्रिय आत्मन् 
इस ब्रह्मांड में जितना भी ज्ञान है , वह अक्षरशः सत्य है ! किंतु जहां एक भौतिकवादी व्यक्ति उस ज्ञान का प्रयोग केवल विरोध प्रदर्शित करने के लिए करता है, वहीं एक साधक उसी ज्ञान का उपयोग करके आगे के पायदान में पहुंच जाता है । हमारे गुरु जी ने बताया है की सबसे ज्यादा ज्ञान अज्ञानी लोगों के पास ही होता है उनसे जितना सीखने को मिलता है और किसी से नहीं । ऐसा ही अनुभव हमारा भी रहा है किंतु जब बात समाज की आती है तो , हमने जो अपने सामाजिक अध्ययन में लोगों की श्रेणी पाई। स्वयं मूल्यांकन करें कि हम किस श्रेणी के अंतर्गत आते हैं ।

१-भोगवादी - मूर्छा में जीवन जी रहे हैं ।

२- नास्तिक - स्थूल शरीर के स्तर पर जीवन जी रहे हैं इनके लिए इससे आगे कुछ भी नहीं है , केवल भौतिक सुख सुविधा को ही महत्व देते हैं । इनका जीवन केवल सही और गलत के स्तर पर ही रहता है ।

३- आस्तिक - उनकी कुछ श्रेणी निम्नलिखित हैं। धार्मिक , आध्यात्मिक , भक्त।

धार्मिक व्यक्ति - यह दो प्रकार के हैं ! कर्मकांडी, सकाम कर्मी ! यह नियम धर्म अर्थ काम मोक्ष के प्रारूप का अनुसरण करते हैं । यह लोग हमेशा पाप पुण्य के स्तर पर ही रहते हैं और स्वयं से कभी कोई पाप कर्म ना हो जाए इससे बचते हैं।  

अध्यात्मिक व्यक्ति - यह निष्काम कर्मी है और यह वैराग्य ,सत्य की खोज ,गुरु की प्राप्ति ,साधना उपासना और पूर्ण ज्ञान प्राप्ति । इस प्रारूप का अनुसरण करते हैं । यह सही गलत ,पाप पुण्य से ऊपर उठकर अपने लक्ष्य के प्रति अधिक संवेदनशील रहते हैं ! और उपलब्ध सभी साधनों का उपयोग करके अपने परम लक्ष्य परमानंद को प्राप्त करते हैं ।

भक्त -  यह हमेशा प्रेम भाव में रहते हैं और जिज्ञासा ,विश्वास, समर्पण ,भक्ति , प्रेम ! इस प्रारूप का अनुसरण करते हैं । 

४- सामाजिक व्यक्ति - जीवन में कोई  स्थाई गुरु नहीं, मनमानी जानकारी एकत्रित कर रखी है । कोई आध्यात्मिक इच्छा नहीं , केवल स्वयं को सही सिद्ध करने के लिए किसी भी स्तर तक जा सकते हैं ।

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