१- कृपा क्या है ?
हम अपनी शक्ति, बुद्धि और जानकारी से जो कुछ भी प्राप्त कर सकते हैं, वह हमारा कर्म फल है, किंतु जब हमारे किए गए कर्मों का फल कयी गुना मिलता है, तो हमें ज्ञात होता है कि यह सब हमें कृपा से मिल रहा है । कृपा अर्थात बिना किसी लाभ की आशा के दूसरे की भलाई के लिए किया गया कार्य । स्वयं मनन करें कि आप पर किसने कृपा की है और आपने किस पर कृपा की है ।२- कृपा से क्या होगा ?
किसी भी काम को करने के तीन मार्ग है - परिश्रम, छल, कृपा
परिश्रम से किए गए कार्य का फल उतना ही प्राप्त होता है जितना का हमने परिश्रम किया ।
छल से किए हुए कार्यों का परिणाम कई गुना घट जाता है ।
कृपा से जो हमें परिणाम प्राप्त होते है वह कई गुना बढ़ जाते हैं । अतः कृपा सर्वश्रेष्ठ माध्यम है अपने कर्मार्जीत पुण्यों को कई गुना बढ़ाने के लिए ।
३- कृपा कब होती है ?
कोई भी व्यक्ति चाहे मंदिर में जाकर कितना ही माथा टेके, उसको भगवान नहीं मिलेंगे। भगवान न ही अकारण किसी पर कृपा करते हैं और न ही अकारण करुणा करते हैं। जब तक मन, बुद्धि अपने इष्ट को समर्पित नहीं करता तब तक वह शुद्ध ज्ञान और भगवान की कृपा का पात्र नहीं बन सकता।
४- किसकी कृपा अनिवार्य है ?
हमारे मनुष्य जन्म के पीछे कई कारण विद्यमान है जिस पर अलग से विस्तृत चर्चा होनी आवश्यक है । किंतु यदि हम यहां जीवन के मूल उद्देश्य आत्मज्ञान की बात करें तो इसे प्राप्त करने के लिए ईश्वर कृपा और गुरु कृपा अनिवार्य है । अब महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि ईश्वर या सद्गुरु हम पर कृपा क्यों करेंगे तो यहां यह भी समझ लेना अनिवार्य है कि जब हम अपने आश्रित लोगों पर कृपा करते हैं तब ईश्वर और गुरु भी हम पर कृपा करते हैं ।
५- हमें यह कैसे पता चलेगा कि कृपा हम पर है ?
कृपा पाने का उद्देश्य निश्चित ही उच्चतम लक्ष्य की प्राप्ति के लिए होना चाहिए । आपको यह लगता है कि कृपा के द्वारा आपकी सारी इच्छायें, पूरी हो जायें । आपकी यह वही पुरानी आदत है कि मंदिर जा कर भगवान से अपनी इच्छाएं बताते हैं । अगर वो आपकी इच्छा पूरी न करें तो आप अपने भगवान ही बदल देते हैं । यहां यह बात ध्यान देने योग्य है कि यदि हम अपने जीवन के उच्चतम शिखर अर्थात अपने जीवन के मूल्य उद्देश्य को पाने की तरफ बढ़ रहे हैं तो निश्चित ही हम पर कृपा है ।
६- कृपा न मिलने का कारण क्या है ?
ज्यादातर लोगों के साथ यही समस्या रहती है कि राग द्वेष और अपनी पूर्व की मान्यताओं और विचारधारा में बंधे रहते हैं , वे इसे त्यागने को तैयार नहीं रहते । यदि आपके अंदर, अगर कोई खाली जगह है जहाँ सद्गुरु या ईश्वर के संदेश ग्रहण करने की संभावना हो तो आपकेजीवन में कृपा की संभावना हो सकती है ।
नोट- दिए गए लेख को अच्छी तरह पढ़े ! अपनी जिज्ञासा शंकाओं के समाधान के लिए चर्चाओं में शामिल हों । इसके बाद प्रश्न पत्र में पूछे गए प्रश्नों का उत्तर अपनी समझ अनुसार भरकर सबमिट करें । इसके लिए आपको 2 दिन का समय मिलेगा
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