Friday, February 26, 2021

बिना संकल्प

यदि में बिना संकल्प के प्रतिदिन 1 या 2 घंटे किसी मंत्र का जाप करता हूँ तो क्या मुझे उसका फल मिलेगा या नहीं?

जी हाँ मंत्रजप का फल अवश्य ही मिलेगा लेकिन होगा क्या और कैसे, आइये सबसे पहले ये जानते हैं | जैसे की आपने कहा की 1 या 2 घंटे तो इतना वक़्त अगर आप मंत्रजप को देंगे तो काफी संभव है की मंत्र का जाप कुछ हफ्ते या महीने के बाद स्वतः अपने आप शुरू हो जाये उदाहरण के तौर पर आपका शरीर, मन-मष्तिष्क एक ऐसे टेप-रिकॉर्डर की तरह बजने लगेगा जिसमें से हमेशा आपको उस मन्त्र के उच्चारण की आवाज हर-पल-हर-सेकंड आएगी जैसे की आप कहीं भी हों, कुछ भी कर रहे हो चाहे घर पर, ऑफिस में, सड़क पर, दूकान में, मार्किट में, ड्राइविंग कर रहे हो और यकायक आपको पता चलेगा की अरे ये मेरा मंत्रजप तो अपने आप हो रहा है, कुछ दिनों के बाद यह भ्रम आपका विश्वास में बदल जायेगा की सच में ही मंत्रजप अपने आप चल रहा है अब आप चाहे उसको खुद से जपें या ना जपें, कभी अचानक आधी रात को जागने पर पता चलेगा की मंत्र-जाप चल रहा है तो कभी सुबह जागोगे तो भी यह मंत्रोच्चारण आपको चलता हुआ मिलेगा |

यह तो है मंत्र की महिमा की एक निश्चित संख्या और समय के बाद मंत्र आपके शरीर के कुछ खास चक्रों को अपना यन्त्र बना लेता है और उन केंद्रों के ईष्ट देवी देवता आपके लिए उस मंत्रजप को करते हैं तो अब आपका यह शरीर एक चलता-फिरता मंदिर बन चुका है जहाँ सदैव परम-ईस्वर का गुणगान चलता रहता है, उनकी पूजा, स्तुति चलती रहती है इस मंत्र जप के जरिये | जरा सोंचिये की कैसा लगेगा जब आपका शरीर अब मंदिर बन चूका होगा, है ना एकदम अनूठा और आश्चर्यजनक 

तो यह तो हुआ मंत्रजप का सिस्टम कैसे एक तरीके से काम करता है आपके शरीर के चक्रों के द्वारा, यही चक्र आप कह सकते हैं की कुण्डिलिनी चक्र कहलाते हैं लेकिन इसका मतलब यह नहीं की आपकी कुण्डिलिनी जागृत हो चुकी है, नहीं लेकिन हाँ यहाँ से आपकी कुंडलिनी यात्रा आरम्भ होती है | वैसे यह हर किसी व्यक्ति के साथ नहीं होता है कुछ विरले ही पैदा होते हैं, दिल के साफ़, सदाचारी, विनम्र, शांत ह्रदय के लोगों के साथ यह आध्यात्मिक सत्य घटना होने के साक्षात दर्शन और सुअवसर प्राप्त होने के चान्सेस ज्यादा होते हैं | अब आप इतना समझ लो की यह मंत्रजप और ध्यान-साधना, दोनों ही रास्ते एक मंजिल पर जाकर मिलते हैं वो है उस आदि-शक्ति से आपका मिलना और यह तय है क्यूंकि आप वह यन्त्र बन चुके हो जिसका सीधा समबन्ध इस ब्रहांड से है | तरह-तरह की ब्रहाण्डीय शक्तियों से आप रूबरू होने लगोगे, आप वो देखने लगोगे जो किसी और को नहीं दिख सकता, आप वो जानने लगोगे जो कोई और शायद सोंच भी ना पाए, आपको हरपल कुछ ऐसा होता दिखने लगेगा जोकि आपने कुछ देर पहले ही सोंचा था, तो यह बहुत आश्चर्य जनक बातें आपके साथ होने लगेंगी |

अगर आप मन से मजबूत हैं तो आप इतनी ऊर्जा को अपने आज्ञाचक्र और अनाहत पर संग्रह कर पाएंगे वरना तो ऊर्जा आपको व्यथित भी कर सकती है, आपके साथ बहुत इमोश्नल प्रपंच रचे जायेंगे, आप टूट सकने वाली सोंच में भी पड़ सकते हो क्यूंकि शायद आपकी इस आध्यात्मिक पढाई की वो हेडमास्टर परीक्षा भी लेता है शायद 

आपको इन सभी परीक्षाओं में सफल होना होगा जैसे की आपके व्यक्तिगत सम्बन्ध, पारिवारिक रिश्ते, व्यापारिक कार्य आदि सब खराब होने लगेंगे, बने-बनाये कार्य बिगड़ भी सकते हैं जिससे आपको अपनी मंत्रजप साधना से विश्वास डगमगाना पड़ सकता है, कुछ अलग तरह से भी आपके साथ हो सकता हो यहाँ नहीं लिखा है लेकिन फिर अचानक से आपको सबकुछ ठीक होने जैसा भी लगेगा तो यह ऊपर-नीचे आपके साथ चलता रहेगा और इन सबके आप इतने अभ्यस्त होते जाओगे की आपको स्वयं पता नहीं चलेगा कब आप बड़े-बड़े चक्रव्यहूों से यूँ ही निकल आये | वो कहते भी हैं ना की भगवान् भी भक्त की परीक्षा लेता है तो बड़े-बुजुर्ग सही कहावतें छोड़कर गए हैं |

खैर टॉपिक पर आते हैं, सो आपको इन सब उंच-नीच, दुःख-दर्द, रिश्ते-नाते, व्यापार-धंधे, प्रेम-घृणा जैसी प्राकृतिक भावनात्मक आपदाओं से लड़ने को तैयार रहना होगा बाकी तो मंत्रजप की शक्ति खुदबखुद ही आपको इन झंझावातों से बाहर निकाल कर लाएगी |

अब आते हैं अंत में की फल मिलेगा या नहीं तो हाँ अवश्य मिलेगा और वो कुछ धीमा प्रोसेस होगा, कार्य बनेंगे, मुश्किलें भी ख़तम होंगी और अच्छे दिन भी आएंगे लेकिन वो क्या है ना की यह जो मंत्रजाप आप कर रहे हो वो सबसे ज्यादा आपको मोक्षप्राप्ति की तरफ लेकर जाता है, कहते हैं की एक करोड़ मंत्रजप से मनुष्य शिवतत्व युक्त हो जाता है, देवतुल्य हो जाता है तो आपके साथ उसी तरह की दैवीय घटनाएं होंगी, भौतिक सुख-साधनों की प्राप्ति भी होगी लेकिन प्रारब्ध पहले आता है तो सभी केंद्रों में जो पूर्वजन्मों के कर्म संचित हैं वो काटेंगे आप, कष्ट होगा लेकिन कर्म कटेंगे जरूर |

यह ऊर्जा जिसको आप केवल और केवल आप छू पाओगे, इसको अपनी आँखों से देख पाओगे और सब नहीं तो कुछ रहस्यों से पर्दा उठ जाएगा, आपके हरे रंग की लम्बोर्गिनी कार वहीँ पास खड़ी होगी और आप सर्वोच्च के पास शिखर पर खड़े होंगे उस आदिशक्ति के पास जिसने यह मनुष्य को जनम दिया | जब ऊर्जा आये तो उसको संभालना जरूर सीखें दोस्त क्यूंकि यह होगा जरूर |

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