Wednesday, August 5, 2020

क्या यह सच है कि भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना को आगे बढ़ाने के लिए अपनी बेटी सरस्वती से विवाह किया?

ब्रह्मा जी ने अपनी खुद की पुत्री सरस्वती से विवाह क्यों किया |

ये एक ऐसा अंधविश्वास वाला सवाल है जिसका उपयोग अधिकांश तौर पर वामपंथी या फिर दूसरे मजहब के लोग करते है ताकि वे सनातन धर्म का मज़ाक़ उड़ा सके |

अगर आप उनको यह बात साबित करने को कहे तब उनके तोते उड़ जाते हैं |

अगर आप भी उन वामपंथी एवं मज़हबी लोगों में से हैं तो आप एक पढ़े लिखें मुर्ख के अलावा और कुछ भी नहीं | क्यूकी एक पढ़ा लिखा व्यक्ति प्रमाण (सबुत) मांगता हैं |

ख़ैर छोड़िये |

मैं स्वयं को हिन्दु नहीं बल्कि एक सनातनी [सनातन धर्म का] समझता हूँ जो तर्क पर विश्वास रखता है क्युकि सनातन धर्म का आधार ही तर्क हैं |

भारतीय संस्कृति के अनुसार परमात्मा एक हैं जो समस्त बर्ह्मांड का स्वामी हैं | परमात्मा के अनेक गुणवाचक नाम है जिसमे तीन प्रमुख है जैसे ब्रह्मा, बिष्णु, महेश |

परमात्मा के अन्य नाम और भी है जैसे सरस्वती, गणेश, वरुण, शिव, रूद्र, काली, इत्यादि | अगर आप परमात्मा के और भी नाम जानना चाहते है तो आप बिष्णु सहस्त्र्नाम पढ़ सकते है | Wikipedia

परमात्मा के इतने नाम उनके गुणों के आधार पर दिया गया है | क्यूकी इस प्रश्न में ब्रह्मा और सरस्वती का उल्लेख हुआ हैं इसलिए हम इन दोनों गुणों के बारे में समझेंगे |

ईश्वर ने ही इस समस्त ब्रह्माण्ड का रचना किया है इसलिए ईश्वर का नाम ब्रह्मा हैं | इस संसार का कोई भी तत्व निराकार या साकार उनसे अलग नहीं हैं |

ईश्वर सभी विद्वान का भी विद्वान है अर्थात संसार में उनसे ज्यादा ज्ञानी और कोई भी नहीं है | विद्वानो का विद्वान होने के कारण ईश्वर का नाम सरस्वती हैं |

हमारे देश के ऋषि मुनिओं ने ईश्वर के नियमों का वर्णन वेद में किया है | इसलिए वेद का अर्थ होता है ज्ञान (Knowledge) | और ज्ञान की देवी सरस्वती को समझा जाता है |

वैदिक पुस्तकों में ब्रह्मा और सरस्वती को दाम्पत्य कहा गया है | दाम्पत्य जीवन का अर्थ होता है पति-पत्नी का जीवन जिसमे वह अपनी पुरी ज़िन्दगी साथ-साथ रहते है |

ईश्वर [ब्रह्मा] से ज्यादा विद्वान संसार में और कोई भी नहीं है | ईश्वर आदि है इसीलिए उनका ज्ञान [सरस्वती] भी सनातन है | ईश्वर और उनका ज्ञान अदि सृष्टि से है और सदैव रहेगा |

इसलिए इससे ये स्पष्ट होता है की यहाँ वेद को ब्रह्मा और उसमे अंकित ज्ञान को सरवस्ती कहा जा रहा है | क्युकि ईश्वर का ज्ञान सनातन [जो प्रारम्भ से है और सदैव रहेगा |] है |

ये तो रही सठिक बाते जो मैंने कई वर्षो की परिश्रम से जाना है | अगर आपको मेरा जवाब पसंद आया तो लाईक करना ना भूले | मैंने ये सब ज्ञान दादाजी श्री सत्यनारायण सिंह जी [जो की मेरे पड़ोसी हैं | ] प्राप्त करा है जो २० वर्षो से संस्कृत का अध्यन कर रहे है |

हालांकि ब्रह्मा का एक अर्थ हमारा Milky Way भी है | भागवत गीता के chapter नंबर 8 और verse नंबर 17 में जिस ब्रह्मा का उल्लेख मिलता है उसका अर्थ Milky Way है | इस Endless Universe में सेकड़ो ब्रह्मा अर्थात Milky Way है जिसकी आयु 31,10,40,00,00,00,000 human years माना गया हैं | इसका प्रमाण आप नीचे दी गयी भागवत गीता के श्लोक में देख सकते है

सहस्रयुगपर्यन्तमहर्यद्ब्रह्मणो विदुः।
रात्रिं युगसहस्रान्तां तेऽहोरात्रविदो जनाः।।8.17।।

No comments:

Post a Comment

वर्तमान समय की सबसे बड़ी समस्या: दोषारोपण की प्रवृत्ति

प्रणाम मित्रो वर्तमान समय में मनुष्य की सबसे बड़ी समस्या यह है कि वह अपने जीवन में उत्पन्न होने वाली अधिकांश समस्याओं और विकृतियों के लिए स्...