Thursday, August 20, 2020

गीता को पढ़ना प्रारंभ कैसे करें?

गीता को बारहवें अध्याय से पढ़ना आरम्भ करें। वैसे तो भगवत गीता आदि से अन्त तक सभी जगह से पवित्र है। श्रीकृष्ण इस बारहवें अध्याय को अमृतधारा कहते हैं

पहले स्थूल फिर सूक्ष्म, पहले सरल फिर कठिन — इस प्रकार सब चीज़ों में भगवान को देखें, उसका साक्षात्कार करके सारे विश्व को आत्मरूप करके देखें। इसी नियम से हमें सभी चीज़ों को समझने का प्रयास करना चाहिए।

बारहवाँ अध्याय है तो यह छोटा सा, केवल 20 श्लोकों का यह अध्याय है, परन्तु अमृत की तरह मधुर है। इस अध्याय में परमात्मा श्रीकृष्ण ने भक्ति रस के बारे में बताया है। प्रयत्न मार्ग से भक्ति का मार्ग भिन्न नहीं है।

फिर उसके बाद छटे से ले कर ग्यारहवें अध्याय तक पढ़ें।

फिर दूसरे अध्याय से पाँचवें अध्याय तक पढ़ें।

फिर तेरहवें अध्याय से लेकर अठारहवें अध्याय तक पढ़े।

और फिर पहले अध्याय को पढ़ने के पश्चात सभी अध्याय पहले से अठारहवें अध्याय तक क्रमवार दुबारा पढ़ें।

गीता पढ़ने से हम यह जान पाते हैं कि जीवन की कुल योजना क्या है ओर हम अपना जन्म कैसे सफल कर सकते हैं।

ज्ञान, कर्म व भक्ति का जीवन में क्या स्थान है यह हम भलीभाँति भागवत गीता में छानबीन कर समझ पाते हैं।

ईश्वर करे आपका जीवन दिव्य प्रेम, शान्ति व परमानन्द से भर जाये! आमीन! आमीन! आमीन!

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