#कवर्धा_शुभदर्शन
ब्राह्मणत्व के icon कभी भी भगवान परशुराम और गुरु द्रोण नही हो सकते।
ब्राह्मणों के आइकॉन केवल देवगुरु बृहस्पति और ब्रह्मऋषि वशिष्ठ आदि वह ऋषि जिन्होंने ब्राह्मणत्व की मर्यादाओं को विकसित किया
जब तक ब्राह्मण समाज
बृहस्पति और वसिष्ठ की मर्यादाओं को आत्मसात नही करेगा उसे भगवान परशुराम जी को पूजने का कोई अधिकार नही।
क्योंकि
परशुराम वही बन सकता है
जो वसिष्ठ और बृहस्पति की मर्यादाओं को सूक्ष्मता से समझता हो।
भगवान परशुराम ने धर्मयुद्ध किया क्योंकि वह बृहस्पति और वसिष्ठ की मर्यादाओं से परिचित थे, श्रेष्ठता सिद्ध की थी।
ऐसा न होने पर ब्राह्मण ही परशुराम बनके मिथ्या अहंकार में अधर्म युद्ध करने लगेगा।
भगवान परशुराम के ही 3 महान शिष्य कौरवों की सभा मे एक नारी के अपमान और अधर्मप्रदत्त कार्यो पर मौन रहे।
#क्या_भगवान_परशुराम_मौन_रहते?
कदापि नही
क्योंकि उन्होने बृहस्पति और वसिष्ठ की मर्यादाओं को धारण किया आत्मसात किया।
जिसे उन मर्यादाओं का भान ही न होगा
वह परशुराम कदापि न बन पाएगा और भगवान परशुराम जी के नाम पर ब्राह्मण वर्ण का उपहास और अनादर ही करवाएगा।
आज जगह जगह फैले रावणवादी ब्राह्मण हैं जो जय परशुराम कह कह कर स्वयं को ब्राह्मण कहलवाते हैं... उन्हें गर्व होता है हमारा सर लज्जावश झुक जाता है।
परशुराम पद ही उस ब्राह्मण #भार्गव राम हेतु है
जो बृहस्पति और वसिष्ठ की मर्यादाओं के अतिक्रमण की रक्षार्थ परशु धारण करता है।
जिसे मर्यादाओं जा ही भान न हो
उससे आप कैसे अपेक्षा कर सकते हैं कि वह सदैव धर्म रक्षार्थ ही कार्य करेगा।
विनम्रता, क्षमा, शीलता आदि गुणों से बृहस्पति और वशिष्ट आभूषित हैं।
किस प्रकार वे संसार के प्रति, प्रकृति के प्रति, गौ के रति और शत्रु के प्रति भी दया का भाव रखते हैं।
ब्रह्नऋषि वसिष्ठ जो स्वयं चाहते तो भस्म कर देते विश्वामित्र को भी परन्तु अपने पुत्र की हत्या केंगे के उपरांत भी विश्वामित्र को क्षमा किया।
हर हर महादेव
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