*कंडोम और अश्लीलता*
कंडोम की बिक्री हिंदुस्तान में 1930 से शुरू हुई और उस ज़माने में इसके विज्ञापन अंग्रेज़ी में छपते थे।
1931 में अमेरिकन आर्मी में कंडोम फ्री में बांटे गए, और 1980 में एड्स का हवाला देकर भारत के बाजारों में इसे उतारा गया।
देश का पहला कंडोम बनाने वाली सरकारी कंपनी एचएलएल लाइफकेयर यानि हिंदुस्तान लेटेक्स ने 50 साल पहले 'सेक्शुअल वेलनेस' के नाम पर करीब 8500 करोड़ रुपये सालाना कारोबार करती है।
जब पहली बार कंडोम को लॉन्च किया था - तो परिवार नियोजन की दुहाई दी गयी थी।
*फिर Aids का खौफ बनाकर Safe Sex With Any And Many Partner की छूट सुनाई गयी।*
फ्री सेक्स की मानसिक बिमारी को युवक-युवतियों के मस्तिष्क में जमकर ठूसी गयी।
फिर परिवार नियोजन की दवाई ....... चॉकलेट, स्ट्राबेरी, मौसमी, संतरा, नींबू जैसे ना जाने कितने कितने फ्लेवर के कंडोम बाजार में उतारे गए जिन्हें TV के माध्यमों से हमारे घरों में पहुँचाया गया।
अब 25% Extra डॉट्स के साथ enjoy करें", जैसे अश्लील आवाज़ में यह ज्ञान बाँटते हुये.. भारतीय नारी की नयी पहचान "पूजा बेदी, सनी लियोनी, विपाशा वशु" टाइप पोर्न एक्ट्रेस किसी भी वक्त, किसी भी शो के बीच आ धमकती है।
सोचिये क्या सही में यह Condom Adv.. हमें Educate कर रहे हैं या गलत सोच inject कर रहे हैं।
पहले शिक्षा दी.. फिर संस्कार बिगाड़े.. फिर संस्कृति बर्बाद की.. अब सभ्यता तबाह की तैयारी हो रही है .... इन सब कामों के साथ साथ से पैसे भी जमकर कमाये जा रहे हैं।
"सामाजिक अभियान कब और कैसे संस्कारी शैतान बन गया किसी को पता ही नहीं चला ?"
चैनल विज्ञापन की कमाई में मस्त हैं, बुद्धिजीवी अपनी हिस्सेदारी लेकर सब कुछ सही मनवाने की मुहिम में लग जाते हैं।
बर्बाद हमारा समाज हो रहा है।
*हमें समस्या कंडोम की उपयोगिता या उसके प्रचार से नहीं है, "बल्कि समाज में जिस वर्ग की महिलाओं को आज इसकी ज्यादा जरूरत है उन्हें क्यों विज्ञापनों में शामिल नहीं किया जाता" क्यों सिर्फ हर फूहड़ता, बदनीयती, सांस्कृतिक उन पर ही होते हैं जो पहले से अपनी जनसंख्या को नियंत्रित किये हुए हैं..?* आज एक हथियारके तौर पर पश्चिमी सभ्यता व उपभोक्ता वाद का 'प्रचार-प्रसार" किया जा रहा है..??
आप में से कुछ लोगों को मेरी बात बुरी लगेगी, पर सोचिये आज समाज में इसकी जरूरत किसे अधिक है..? केवल वेलेंटाइन डे पर प्रतिवर्ष करोड़ो कंडोम बेच दिए जाते है, लाखों गर्भपात कराये जाते है। अतः हमे इस गंदी मानसिकता का पुरजोर विरोध करना आवश्यक हो गया है। अन्यथा आने वाले समय में यूरोपियन देशों की तरह आपके बच्चों के बैगों में कंडोम की अनिवार्यता थोप दी जायेगी।।
*जागरूकता अभियान*
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