🔻श्री राम 12 कलाओं के तो भगवान श्री कृष्ण सम्पूर्ण 16 कलाओं के ज्ञाता हैं. आखिरकार ये 16 कलाएँ होती क्या है?
🌿उपनिषदों के मानें तो 16 कलाओं से युक्त व्यक्ति ईश्वर तुल्य माना जाता है. 16 कलाएँ वास्तव में बोध प्राप्त योगी की विभिन्न स्थितियाँ हैं.
🌿जिस सोलह कला का उल्लेख भगवान् श्री कृष्ण हेतु हुआ है उसका संदर्भ अंश से है न कि किसी '#आर्ट' से.
🌿कलाओं के संबंध में वैदिक तथा पौराणिक दो मान्यताएं हैं. पूर्णावतार, ये ईश्वर के सोलह अंश (कला) से परिपूर्ण होता है.
🌿सामान्य मनुष्यों में ईश्वर के पाँच अशों (कलाओं) का समावेश होता है और यही मनुष्य तन की पहचान भी है.
🔸पाँच कलाओं से भी कम होने की स्थिति में पशु, वनस्पति आदि का शरीर बनता है एवं पाँच से आठ कलाओं से तक होने की स्थिति में श्रेष्ठ मनुष्य की श्रेणी बनती है.
🔸अवतार नौ से लेकर सोलह कलाओं से युक्त हुआ करते हैं
🔸पन्द्रह कलाओं तक #अंशावतार ही हैं.
🔸राम #बारह तथा कृष्ण #सोलह कलाओं से पूर्ण हैं.
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▶️1 से लेकर 16 कलाओं को विस्तार से समझें
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🌿बुद्धि का निश्चयात्मक हो जाना.
🌿अनेकों जन्मों की याद आने लगती है.
🌿चित्त की वृत्तियाँ नष्ट हो जाती है.
🌿अहंकार समाप्त हो जाती है.
🌿संकल्प-विकल्प आदि ख़त्म हो जाते हैं, खुद के स्वरुप का ज्ञान होने लगता है.
🌿पंच तत्वों में से एक आकाश तत्व में पूर्ण नियंत्रण प्राप्त हो जाता है. कहा गया हर शब्द सही होता है.
🌿वायु तत्व में भी पूरा नियंत्रण हो जाता है. केवल स्पर्श कर देने से ही रोग मुक्त कर देता है.
🌿अग्नि तत्व पर पूरा नियंत्रण प्राप्त हो जाता है. केवल दृष्टि से ही कल्याण करने की शक्ति प्रकट हो जाती है.
🌿जल तत्व पर सम्पूर्ण नियंत्रण हो जाता है. जल में चलने पर जल अपने स्थान से हट जाता है और चलने के लिए जगह छोड़ देता है. नदी, समुद्र, झील आदि किसी तरह की बाधा नहीं रहती.
🌿पृथ्वी तत्व में भी पूरा नियंत्रण प्राप्त कर लिया जाता है. हर वक़्त देह से सुगंध आने लगती है, नींद, भूख तथा प्यास नहीं लगती.
🌿जन्म, मृत्यु तथा स्थिति अपने काबू में हो जाती है.
🌿सभी भूतों से एक रूपता हो जाती है तथा सब पर नियंत्रण प्राप्त हो जाता है. जड़-चेतन इनके इच्छानुसार ही कार्य करते हैं.
🌿समय पर भी नियंत्रण हो जाता है. शरीर की बढ़ना रुक जाता है या अपनी इच्छा के अनुसार बढ़ता-घटता है.
🌿सर्वव्यापी हो जाता है यानि एक ही समय में हर स्थान पर पहुँच संभव हो जाता है. एक साथ अनेकों रूपों में प्रकट हुआ जा सकता है. पूर्णता का अनुभव होता है. लोक-कल्याण हेतु संकल्प धारण कर सकता है.
🌿कारण का भी कारण हो जाता है. ये अव्यक्त अवस्था होती है.
🌿उत्तरायण कला - अपनी इच्छा के अनुसार सभी दिव्यताओं के साथ अवतार रूप में जन्म लेता है.
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