Sunday, November 25, 2018

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👉अक्षर ब्रह्म की प्राप्ति के लिए, जपमाला में (108 ) मणियाँ क्यों पिरोई जाती हैं।

बीजगणित की पद्धति से ब्रह्म का परिगणन करें तो अँकों का योग 108 आता है।
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अ आ  इ   ई   उ   ऊ  ए   ऐ ओ  औ    रि     ऋ  अं   अः
1   2   3   4  5   6   7   8  9   10  11   12 13  14

क        ख        ग        घ        ड०
1          2        3        4        5
च         छ        ज        झ       यँ
6          7         8       9       10
ट          ठ        ड        ढ       ण
11      12       13     14      15
त         थ         द        ध        न
16      17       18      19     20
प         फ        ब        भ        म
21       22      23      24     25
य          र         ल       व        श
26       27      28      29      30
ष         स         ह        क्ष       त्र        ग्य
31       32      33     34       35      36
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ब्रह्म= ब्+ र्+ ह्+ म्

क से ब तक=  23
क से र तक =  27
क से ह तक=  33
क से म तक = 25
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योग=             108 योग=  9
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108 के अंक  का योग= 1+0+8= 9 पूर्ण सँख़्या है।
अंक- 1= व्यापक है।
अंक- 0= व्यापक है।
अंक  8=  माया है।
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योग= 9 का अंक पूर्ण है।

पूर्ण अंक 9 से, व्यापक अंक 1+0=10 तक के किसी भी अंक में, गुणा करने पर, गुणनफल का योग पूर्ण संख्या 9 ही अाती है।जैसेः-------

9*1= 9,
9*2=18,-8+1=9
9*3=27-2+7= 9
9*4 =36-3+6=9
9*5=45-4+5=9
9*6=36-3+6=9
9*7=63-6+3=9
9*8=72-7+2=9
9*9=81-8+1=9
9*10=90-9+0=9
इसी प्रकार से 8अंक की संख्या, जिसे की माया कहते हैं।
उससे 1से10 तक की संख्या में, गुणा करने पर, 5 तक तो योग एक-एक अंक घटता है , फिर एकाएक बढ़कर फिर घटने लगता है। जैसे ः-------
8*1=08-    0+8=8 अब गुणनफल का योग एक-एक       अंक घटेगा
8*2=16-    1+6=7
8*3=24-     2+4=6
8*4=32-     3+2=5
8*5=40-     4+0=4
8*6=48-     4+8=12- देखिए मान बढ़ गया
8*7=56-     5+6=11- अब फिर घटेगा
8*8=64-     6+4=10
8*9=72-    7+2=09
8*10=80-  8+0=08
इसी प्रकार माया भी घटती- बढ़ती रहती है।
परन्तु जब (पूर्ण,व्यापक) संख्या 1,0 से गुणा या सम्पर्क होता है , तो न घटता है , न तो बढ़ता है। सदा एक सा रहता है।

जब माया का गुणा पूर्ण से होता है, तो योग पूर्ण ही आता है। जैसे ः---- 8*9= 72-7+2= 9
इसीलिए  108 मनके की माला से जप करने से माया समाप्त हो जाती है।

सारांश यह की माला में 108 मणिकाएँ आदिशक्ति और ब्रह्म दोनो का बोध कराती हैं।

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