👉अक्षर ब्रह्म की प्राप्ति के लिए, जपमाला में (108 ) मणियाँ क्यों पिरोई जाती हैं।
बीजगणित की पद्धति से ब्रह्म का परिगणन करें तो अँकों का योग 108 आता है।
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अ आ इ ई उ ऊ ए ऐ ओ औ रि ऋ अं अः
1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14
क ख ग घ ड०
1 2 3 4 5
च छ ज झ यँ
6 7 8 9 10
ट ठ ड ढ ण
11 12 13 14 15
त थ द ध न
16 17 18 19 20
प फ ब भ म
21 22 23 24 25
य र ल व श
26 27 28 29 30
ष स ह क्ष त्र ग्य
31 32 33 34 35 36
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ब्रह्म= ब्+ र्+ ह्+ म्
क से ब तक= 23
क से र तक = 27
क से ह तक= 33
क से म तक = 25
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योग= 108 योग= 9
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108 के अंक का योग= 1+0+8= 9 पूर्ण सँख़्या है।
अंक- 1= व्यापक है।
अंक- 0= व्यापक है।
अंक 8= माया है।
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योग= 9 का अंक पूर्ण है।
पूर्ण अंक 9 से, व्यापक अंक 1+0=10 तक के किसी भी अंक में, गुणा करने पर, गुणनफल का योग पूर्ण संख्या 9 ही अाती है।जैसेः-------
9*1= 9,
9*2=18,-8+1=9
9*3=27-2+7= 9
9*4 =36-3+6=9
9*5=45-4+5=9
9*6=36-3+6=9
9*7=63-6+3=9
9*8=72-7+2=9
9*9=81-8+1=9
9*10=90-9+0=9
इसी प्रकार से 8अंक की संख्या, जिसे की माया कहते हैं।
उससे 1से10 तक की संख्या में, गुणा करने पर, 5 तक तो योग एक-एक अंक घटता है , फिर एकाएक बढ़कर फिर घटने लगता है। जैसे ः-------
8*1=08- 0+8=8 अब गुणनफल का योग एक-एक अंक घटेगा
8*2=16- 1+6=7
8*3=24- 2+4=6
8*4=32- 3+2=5
8*5=40- 4+0=4
8*6=48- 4+8=12- देखिए मान बढ़ गया
8*7=56- 5+6=11- अब फिर घटेगा
8*8=64- 6+4=10
8*9=72- 7+2=09
8*10=80- 8+0=08
इसी प्रकार माया भी घटती- बढ़ती रहती है।
परन्तु जब (पूर्ण,व्यापक) संख्या 1,0 से गुणा या सम्पर्क होता है , तो न घटता है , न तो बढ़ता है। सदा एक सा रहता है।
जब माया का गुणा पूर्ण से होता है, तो योग पूर्ण ही आता है। जैसे ः---- 8*9= 72-7+2= 9
इसीलिए 108 मनके की माला से जप करने से माया समाप्त हो जाती है।
सारांश यह की माला में 108 मणिकाएँ आदिशक्ति और ब्रह्म दोनो का बोध कराती हैं।
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