Wednesday, October 24, 2018

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बीज मंत्र क्या है ? सभी देवों के बीज मंत्र और उनके उच्चारण से होने वाले लाभ

परमपिता परमेश्वर की कृपा से इस संसार में हर जीव की उत्पत्ति बीज के द्वारा ही होती है चाहे वह पेड़-पौधे हो या फिर मनुष्य योनी | बीज को जीवन की उत्पत्ति का कारक माना गया है | बीज मंत्र भी कुछ इस तरह ही कार्य करते है | हिन्दू धरम में सभी देवी-देवताओं के सम्पूर्ण मन्त्रों के प्रतिनिधित्व करने वाले शब्द को बीज मंत्र/Beej Mantra कहा गया है | सभी वैदिक मंत्रो का सार बीज मंत्रो को माना गया है | हिन्दू धरम में सबसे बड़ा बीज मंत्र ” ॐ ” है | अन्य शब्दों में बीज मंत्र किसी भी वैदिक मंत्र का वह लघु रूप है जिसे मंत्र के साथ प्रयोग करने पर वह उत्प्रेरक का कार्य करता है | बीज मंत्रों(Beej Mantra kya hai Beej Mantro ke Labh)को सभी मन्त्रों के प्राण के रूप में जाना जा सकता है जिनके प्रयोग से मन्त्रों में प्रबलता और अधिक हो जाती है |

बीज मंत्र कुछ इस प्रकार होते है :- ॐ, क्रीं, श्रीं, ह्रौं, ह्रीं, ऐं, गं, फ्रौं, दं, भ्रं, धूं, हलीं, त्रीं, क्ष्रौं, धं, हं, रां, यं, क्षं, तं ,  ये दिखने में छोटे से बीज मंत्र अपने अन्दर बहुत से शब्दों को समाये हुए है | उपरोत्क सभी बीज मंत्र अत्यंत कल्याणकारी है जो अलग-अलग देवी-देवताओं के प्रतिनिधत्व करते है |

बीज मंत्र जप के लाभ :-

बीज मंत्रों के जप से देवी-देवता अति शीघ्र प्रसन्न होकर अपने भक्त का उद्धार करते है | बीज मंत्रों का उच्चारण आपके आस-पास एक सकारात्मक उर्जा का संचार करता है | जीवन में आने वाले घोर से घोर संकट भी बीज मंत्रों के उच्चारण से दूर हो जाते है | किसी भी प्रकार के असाध्य रोग की गिरफ्त में आने पर , आर्थिक संकट आने पर, इनके अतिरिक्त समस्या कोई भी हो, बीज मंत्रों के जप से लाभ अवश्य प्राप्त होता है | बीज मंत्रों के नियमित जप से सभी पापों से मुक्ति मिलती है | ऐसा व्यक्ति सम्पूर्ण जीवन मृत्यु के भय से मुक्त होकर जीता है व अंत में मोक्ष को प्राप्त करता है |

बीज मंत्र /Beej Mantra :-

भगवान श्री गणेश का बीज मंत्र :-

सभी देवों में सबसे पहले पूजे जाने वाले देव श्री गणेश का बीज मंत्र ” गं ” है | इस बीज मंत्र के नियमित जप से बुद्धि का विकास होता है और घर में धन संपदा की वृद्धि होती है |

भगवान शिव का बीज मंत्र :-

भगवान शिव का बीज मंत्र है : – ” ह्रौं ” भगवान शिव के इस बीज मंत्र के जप से भोलेनाथ अतिशीघ्र प्रसन्न होते है | इस बीज मंत्र के प्रभाव से अकाल मृत्यु से रक्षा होती है व रोग आदि से छुटकारा मिलता है |

भगवान श्री विष्णु का बीज मंत्र :-

भगवान श्री विष्णु का बीज मंत्र ” दं ” है | जीवन में हर प्रकार के सुख और एश्वर्य की प्राप्ति हेतु इस बीज मंत्र द्वारा भगवान श्री विष्णु की आराधना करनी चाहिए | 

भगवान श्री राम का बीज मंत्र :-

भगवान श्री राम का बीज मंत्र ” रीं ” है जिसे भगवान श्री राम के मंत्र के शुरू में प्रयोग करने से मंत्र की प्रबलता और भी अधिक हो जाती है भगवान श्री राम के बीज मंत्र/Beej Mantra को इस प्रकार से प्रयोग कर सकते है : रीं रामाय नमः 

हनुमान जी का बीज मंत्र :-

भगवान श्री राम के परम भक्त हनुमान जी आराधना कलियुग के समय में शीघ्र फल प्रदान करने वाली है | ऐसे में बीज मंत्र द्वारा उनकी आराधना आपके सभी दुखों को हरने में सक्षम है | हनुमान जी का बीज मंत्र है :  ” हं ” |

भगवान श्री कृष्ण का बीज मंत्र :-

भगवान श्री कृष्ण का बीज मंत्र “ क्लीं ” है जिसका उच्चारण अकेले भी किया जा सकता है व भगवान श्री कृष्ण के वैदिक मंत्र के साथ भी | इस बीज मंत्र का प्रयोग  इस प्रकार से करें : ” क्लीं कृष्णाय नमः ” |

माँ दुर्गा का बीज मंत्र :-

शक्ति स्वरुप माँ दुर्गा का बीज मंत्र ” दूं ” जिसका अर्थ है : हे माँ, मेरे सभी दुखों को दूर कर मेरी रक्षा करो |

माँ काली का बीज मंत्र :-

जीवन से सभी भय , ऊपरी बाधाओं , शत्रुओं के छूटकारा दिलाने में माँ काली के बीज मंत्र द्वारा उनकी आराधना विशेष रूप से लाभ प्रदान करने वाली है | माँ काली का बीज मंत्र है : ” क्रीं ” |

देवी लक्ष्मी का बीज मंत्र :-

देवी लक्ष्मी को स्वाभाव से चंचल माना गया है इसलिए वे अधिक समय के लिए एक स्थान पर नहीं रूकती | घर में धन-सम्पति की वृद्धि हेतु माँ लक्ष्मी के इस बीज मंत्र द्वारा आराधना से लाभ अवश्य प्राप्त होता है | देवी लक्ष्मी का बीज मंत्र है : ” श्रीं ”  |

देवी सरस्वती का बीज मंत्र : –

माँ सरस्वती विद्या को देने वाली देवी है जिनका बीज मंत्र ” ऐं ” है | परीक्षा में सफलता के लिए व हर प्रकार के बौद्धिक कार्यों में सफलता हेतु माँ सरस्वती के इस बीज मंत्र/Beej Mantra का जप प्रभावी सिद्ध होता है | 

परमपिता परमेश्वर ब्रह्म का बीज मंत्र :-

कुछ बीज मंत्र(Beej Mantra kya hai Beej Mantro ke Labh) ऐसे भी है जो सूचक है उस परमपिता परमेश्वर के जो समस्त ब्रम्हांड के रचियता , पालनकर्ता और रक्षक है | ये बीज मंत्र इस प्रकार है : ” ॐ ” खं ” कं ” | ये तीनों बीज मंत्र ब्रह्म वाचक है 

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🌹 *बीज मंत्रो से उपचार :*🌹

🌹 *खं*– हार्ट-टैक कभी नही होता है | हाई बी.पी., लो बी.पी. कभी नही होता | ५० माला जप करें, तो लीवर ठीक हो जाता है | १०० माला जप करें तो शनि देवता के ग्रह का प्रभाव चला जाता है |

🌹 *कां*– पेट सम्बन्धी कोई भी विकार और विशेष रूप से आंतों की सूजन में लाभकारी।

🌹 *गुं*– मलाशय और मूत्र सम्बन्धी रोगों में उपयोगी।

🌹 *शं*– वाणी दोष, स्वप्न दोष, महिलाओं में गर्भाशय सम्बन्धी विकार औेर हर्निया आदि रोगों में उपयोगी ।

🌹 *घं* – काम वासना को नियंत्रित करने वाला और मारण-मोहन-उच्चाटन आदि के दुष्प्रभाव के कारण जनित रोग-विकार को शांत करने में सहायक।

🌹 *ढं*– मानसिक शांति देने में सहायक। अप्राकृतिक विपदाओं जैसे मारण, स्तम्भन आदि प्रयोगों से उत्पन्न हुए विकारों में उपयोगी।

🌹 *पं*– फेफड़ों के रोग जैसे टी.बी., अस्थमा, श्वास रोग आदि के लिए गुणकारी।

🌹 *बं*– शूगर, वमन, कफ, विकार, जोडों के दर्द आदि में सहायक।

🌹 *यं*– बच्चों के चंचल मन के एकाग्र करने में अत्यत सहायक।

🌹 *रं* – उदर विकार, शरीर में पित्त जनित रोग, ज्वर आदि में उपयोगी।

🌹 *लं*– महिलाओं के अनियमित मासिक धर्म, उनके अनेक गुप्त रोग तथा विशेष रूप से आलस्य को दूर करने में उपयोगी।

*🌹मं*– महिलाओं में स्तन सम्बन्धी विकारों में सहायक।

*🌹धं* – तनाव से मुक्ति के लिए मानसिक संत्रास दूर करने में उपयोगी ।

*🌹ऐं*– वात नाशक, रक्त चाप, रक्त में कोलेस्ट्राॅल, मूर्छा आदि असाध्य रोगों में सहायक।

*🌹द्वां*– कान के समस्त रोगों में सहायक।

*🌹ह्रीं*– कफ विकार जनित रोगों में सहायक।

*🌹ऐं*– पित्त जनित रोगों में उपयोगी।

*🌹वं*– वात जनित रोगों में उपयोगी।

*🌹शुं*– आंतों के विकार तथा पेट संबंधी अनेक रोगों में सहायक ।

*🌹हुं*– यह बीज एक प्रबल एन्टीबॉयटिक सिद्ध होता है। गाल ब्लैडर, अपच, लिकोरिया आदि रोगों में उपयोगी।

*🌹अं* – पथरी, बच्चों के कमजोर मसाने, पेट की जलन, मानसिक शान्ति आदि में सहायक इस बीज का सतत जप करने से शरीर में शक्ति का संचार उत्पन्न होता है।

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