Sunday, August 19, 2018

ЁЯСЙрдЖрд░्рдеिрдХ рд╕्рдеिрддि рд╕ुрдзाрд░рдиे рдХे рд▓िрдП рдЙрдкाрдп

1 यदि आप व्यवसायी हैं, पुराने उद्योग के चलते नया उद्योग आरम्भ कर रहे हों तो अपने पुराने कारखाने से कोई भी लोहे की वास्तु ला कर अपने नए उद्योग स्थल में रख दें। जिस स्थान पर इस को रखेंगे वहां पर स्वस्तिक बनाएं और वहां पर थोड़े से काले उडद रखें उसके ऊपर उस वस्तु को रख दें। ऐसा करने से नवीन उद्योग भी पुराने उद्योग की तरह सफलता पूर्वक चल पड़ता है।
2 यदि आप के कर्मचारी अक्सर छोड़कर जाते हैं तो इसको रोकने के लिये आपको यदि रास्ते में पडी हुए कोई कील मिले, यदि वह दिन शनिवार हो तो अति उत्तम है। इसे भैंस के मूत्र से धो लें। जिस जगह के कर्मचारी ज्यादा छोड़ कर जाते हैं। वहां पर इस कील को गाद दें इस के फलस्वरूप कर्मचारी स्थिर हो जायेंगे। इस बात का भी ध्यान रखें कि आपके कर्मचारी इस प्रकार अपना काम करें कि काम करते समय उनका मुख पूर्व या उत्तर की ओर रहे।
3 यदि धन की कमी हो या किसी का धन कहीं अटक गया हो तो शुक्ल पक्ष के गुरूवार से अपने माथे पर केसर एवं चन्दन का तिलक लगाना आरम्भ कर दें। प्रत्येक गुरूवार को रामदरबार के सामने दण्डवत प्रणाम कर मनोकामना करें, कार्य सफल हो जाएगा।
4 यदि धन टिकता नहीं है तो प्रत्येक शनिवार को काले कुत्ते को तेल से चुपड़ी रोटी खिलाएं। रोटी खिलाने के पश्चात मनोकामना करें। ऐसा प्रत्येक शनिवार को करने से धन टिकता है।
5 आर्थिक कष्टों से निपटने के लिये किसी भी मन्दिर में सिद्ध मूहर्त में केले के दो पौधे (नर एवं मादा) लगाएं तथा इन्हें नियमित सीचें। जब यह फल देने लग जाए तो समझो आपके आर्थिक कष्ट दूर होने वाले हैं।
6 अचानक धन प्राप्ति के लिये पांच गोमती चक्र ले कर लाल वस्त्र में बाँध कर अपनी दुकान की चौखट पर बाँध दें। यह कार्य शुक्रवार के दिन शुभ मूहर्त में करें।
7 दीपावली की संध्या को अशोक वृक्ष की पूजा करें ओर उस वृक्ष के नीचे दीपक जलाएं। दूज के दिन उसी पूजित वृक्ष की जड़ का एक हिस्सा अपने पास रखें। धनागमन होगा।
8 घर में या कार्यालय में 6 मोर पंख रखें इससे आपके घर व कार्यालय पर किसी की नजर नहीं लगेगी।
9 सूर्यास्त के समय आधा किलो गाय के कच्चे दूध में 9 बूँदें शहद की डाल दें। स्नान करने के पश्चात अपने मकान की छ्त से आरम्भ कर मकान के प्रत्येक कमरे व भाग में इस दूध के छीटें लगाएं। ध्यान रहे कि घर का कुछ भी हिस्सा न बचे। अब इस में बचे हुए दूध को अपने मुख्यद्वार के सामने धार देते हुए गिरा दें। ऐसा 21 दिन तक लगातार करें। छीटें डालते समय जिस देवी देवता को आप मानते हों उससे मन ही मन अपने आर्थिक कष्टों, प्रमोशन आदि की कामना करते रहें।
10 घर या दुकान के दरवाजे पर सफ़ेद सरसों रखने से दुकान में बिक्री करते है।
11 किसी भी शुभ तिथि एवं वार वाले इन दिन यदि ज्येष्ठ नक्षत्र हो तो जामुन की जड़ निकाल कर लायें। इसे आप अपने पास रखें। आपको राज्य सम्मान मिलेगा।
12 यदि आप का धन कहीं फंसा हुआ (रुका हुआ) है तो इसको निकलवाने के लिये रोजाना लाल मिर्च के ग्यारह बीज जलपात्र में डालकर सूर्य को अर्ध्य दें। ॐ सूर्याय नमः कहते हुए अपने रुके धन की प्राप्ति की प्रार्थना करें।
13 यदि आप व्यापार के लिये बाहर जा रहे हैं तथा एक नीबों ले कर उस पर चार लौंग गाड़ दें। तथा ॐ श्री हनुमते नमः का 21 बार जप करके इस नींबू को अपने साथ ले जाएँ, व्यापार में सफलता मिलेगी।
14 गेहूं पिसवाते समय उसमें 11 पत्ते तुलसी और थोड़ा सा केसर डाल कर पिसवा लें। इसको पिसवाने से पूर्व इसमें से एक मुट्ठी मिश्रण को एक रात्रि के लिये किसी मन्दिर में रख दें। उसे अगले दिन वहां से वापस लाकर इस मिश्रण में मिला दें। इसके पश्चात ही सम्पूर्ण मिश्रण को पिसवाएं। ऐसा जब भी आप आटा पिसवाने को जाएं उससे एक दिन पूर्व करें। ऐसा करने से घर में बरकत रहेगी।
15 कारोबार में उन्नति के लिये एक टोटका यह है, किसी भी शुक्ल पक्ष की शुक्रवार को सवा किलो काले चने भिगो दें। इसे अगले दिन सरसों के तेल में बना लें इसके अब तीन हिस्से कर लें। एक हिस्सा शनिवार को ही घोड़े या भैंस को खिला दें, एक हिस्सा किसी कोढी या अंग विहीन भिकारी को दे आये तथा एक हिस्सा अपने सिर से उलटा फेर कर इसे एक दोने में रख कर किसी चौराहे पर रख दें ऐसा प्रयोग 40 शनिवार को करें।
16 एक मिटटी का बना शेर बुधवार को दुर्गा माता के आगे चढाने से सब कार्य पूर्ण हो जाते हैं।
17 व्यापार में वृद्धि के लिये एक और टोटका है। एक पीपल का पत्ता शनिवार को तोड़ कर घर ले आयें। उसे गंगा जल से अच्छी तरह धो लें। इसको 21 बार गायत्री मंत्र से अभिमंत्रित कर इसे अपने कैश बाक्स में रखें। ऐसा हर शनिवार को करें। नया पत्ता रखने पर पुराना पत्ता वहां से हटा लें। इस जल में बहा दें या पीपल पर चढ़ा दें।
🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷

No comments:

Post a Comment

рд╡рд░्рддрдоाрди рд╕рдордп рдХी рд╕рдмрд╕े рдмрдб़ी рд╕рдорд╕्рдпा: рджोрд╖ाрд░ोрдкрдг рдХी рдк्рд░рд╡ृрдд्рддि

рдк्рд░рдгाрдо рдоिрдд्рд░ो рд╡рд░्рддрдоाрди рд╕рдордп рдоें рдордиुрд╖्рдп рдХी рд╕рдмрд╕े рдмрдб़ी рд╕рдорд╕्рдпा рдпрд╣ рд╣ै рдХि рд╡рд╣ рдЕрдкрдиे рдЬीрд╡рди рдоें рдЙрдд्рдкрди्рди рд╣ोрдиे рд╡ाрд▓ी рдЕрдзिрдХांрд╢ рд╕рдорд╕्рдпाрдУं рдФрд░ рд╡िрдХृрддिрдпों рдХे рд▓िрдП рд╕्...