👉ग्रहों के अशुभ प्रभाव से बचाएंगे यह उपाय
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ज्योतिष के अनुसार अगर आपकी कुंडली के ग्रह नीच की स्थिति में, मंदे या फिर अपने शत्रु ग्रहों के बैठे हों इसका उपाय करना बेहद आवश्यक होता है। कुछ उपाय ऐसे भी हैं, जो इन स्थितियों में आप बगैर किसी ज्योतिषीय परामर्श के भी आजमा सकते हैं। इन उपायों को करने से ग्रहों का बुरा असर कम होता है, और आपको नुकसान नहीं उठाना पड़ता। जानिए ग्रहों के अच्छे और बुरे प्रभाव एवं उनके उपाय -
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👉 सूर्य - सूर्य जब आपकी कुंडली में सकारात्मक या उच्च स्थिति में होता है, तो समाज में मान-सम्मान दिलाता है और नौकरी व कामकाज में स्थायित्व प्रदान करता है। सूर्य का मजबूत होना पिता का पक्ष मजबूत करता है और सरकारी कार्यों में भी किसी प्रकार की कोई बाधा या परेशानी नहीं आती।
उपाय - अगर आपको इन सभी मामलों में नकारात्मक परिणाम मिल रहे हैं, तो यह सूर्य के नीच स्थिति में बैठने के कारण हो सकता है। इसके उपाय के तौर पर पिता की सेवा और उन्हें सम्मान देना चाहिए। पैर छूकर पिता का आशीर्वाद लें। इसके अलावा सूर्य को जल चढ़ाना और विष्णु भगवान की पूजा करना श्रेष्ठ होता है। बहते पानी में गेहूं और बाजरा प्रभावित करने और मुंह मीठा कर घर से निकलने से भी सूर्य का प्रभाव सकारात्मक होता है।
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👉 चंद्रमा - कुंडली में चंद्रमा का शुभ प्रभाव होने से जातक की माता का जीवन सुखमय होता है और उसे किसी प्रकार की परेशानी नहीं आती। चंद्रमा का उच्च स्थिति में होना, जातक को माता पक्ष जैसे- नानी, मौसी से भरपूर प्रेम दिलाता है और जातक इनके द्वारा संपत्ति अर्जित करने वाला होता है। ऐसे व्यक्ति के जीवन में मानसिक शांति होती है और और घर में प्रेम बना रहता है। इस स्थिति में घर में संपन्नता और सम्मान भी भरपूर होता है।
उपाय -इसके विपरीत परिणाम मिलने का कारण कुंडली में चंद्रमा की कमजोर स्थिति हो सकती है। अगर आपकी कुंडली में चंद्रमा कमजोर है, तो मां, दादी की सेवा और सम्मान करें। बुजुर्ग और विधवा औरतों की मदद करना चाहिए। इनके प्रति अपना व्यवहार विनम्रतापूर्वक बनाए रखें और सात्विक जीवन जीने को प्रमुखता दें। घर में गंगाजल जरूर रखें। समय-समय पर मंदिर में दूध और चावल का दान करते रहें और चांदी का एक चौकोर टुकड़ा अपने पास रखें।
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👉 मंगल - मंगल का शुभ प्रभाव होने पर जातक को दोस्तों और भाइयों से भरपूर स्नेह और आदर मिलता है और वे हर मुसीबत में साथ देते हैं। मंगल के शुभ होने पर जातक की कार्यक्षमता बढ़ती है और कम उम्र में ही उन्नति शुरू हो जाती है। ऐसे व्यक्ति के घर में मांगलिक कार्य होते रहते हैं और विवाह भी सही समय पर हो जाता है।
उपाय -परंतु मंगल का प्रभाव अगर अशुभ है, तो आपको हनुमान जी की उपासना करना चाहिए और मंगलवार के दिन मीठा प्रसाद बांटना चाहिए। भाइयों और मित्रों से प्रेमभाव रखना चाहिए और उन्हें सम्मान देना चाहिए। ऐसे में घर में सौंफ, शहद, छुआरे नहीं रखना चाहिए और गुड़ की मीठी रोटी या तंदुरी रोटी कुत्ते को खिलाना लाभकारी होता है। ऐसे जातक को दक्षिणमुखी मकान में नहीं रहना चाहिए।
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👉 बुध - बुध ग्रह जब शुभ फल प्रदान करता है तो जातक कम मेहनत करके भी अधिक कमाई करता है। जातक की बहन, बुआ और बेटी का जीवन सुखमय रहता है और आपसी प्रेम बना रहता है। इस प्रकार का जातक बुद्धिमान होता है और बुद्धि के बल पर व्यापार में उन्नति करता है। पढ़ाई-लिखाई के मामले में भी जातक अच्छा होता है।
उपाय - परंतु बुध ग्रह के अशुभ प्रभाव होने पर बहन, बुआ और बेटी का सम्मान करना सही होता है और इन्हें घर से कुछ न कुछ देकर ही विदा करें। इसके अलावा घर में गाने बजाने का सामान न रखें, जैसे ढोलक आदि। भगवान की मूर्ति रखने के बजाए उनकी तस्वीर की पूजा करें और पक्षियों को न पालें। इसके अलावा मांस और अंडे से दूरी बनाए रखें। छोटी कन्याओं का पूजन करना बुध को मजबूत करता है।
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👉 बृहस्पति - बृहस्पति जब कुंडली में उच्च अवस्था में बैठा हो, तो वह ऐश्वर्य, सुख, संपन्नता देता है। ऐसे जातक को अपने दादाजी से खूब स्नेह मिलता है। परिवार में बड़ों का सम्मान होता है और घर का माहौल आध्यात्मिक होने के साथ ही रीति-रिवाजों को निभाने वाला होता है। ऐसे व्यक्ति के जीवन में पढ़ाई को लेकर कोई बाधा नहीं आती।
उपाय -लेकिन कुंडली में बृहस्पति का अशुभ होना शिक्षा में रूकावट पैदा करता है और बुजुर्गों के सुख से वंचित करता है। ऐसा होने पर बुजुर्गों का सम्मान करें और साधु संन्यासियों को भी सम्मान दें। पीपल के पेड़ की सेवा करना और मंदिर में चने की दाल रखने से गुरू मजबूत होता है। अपने गले में सोने की चेन पहनें और दान पुण्य करें।
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👉 शुक्र - शुक्र जब उच्च स्थिति में होता है, तो जातक सुंदर होता है और जोश से भरा होता है। जातक को शयन सुख में लाभ मिलता है और वह उमंग से भरा हुआ होता है। शुक्र की स्थिति शुभ होने पर जात घूमने-फिरने का शौकीन होता है और सुंदर, साफ-सुथरे घर का स्वामी होता है। ऐसी स्थिति में वैवाहिक जीवन मधुर होता है।
उपाय -लेकिन ऐसा नहीं होने पर मान लें कि आपका शुक्र कमजोर है। शुक्र कमजोर होने पर सुबह सही समय पर उठना और साफ सुथरा रहना आवश्यक है। पत्नी का सम्मान करें और उसे सौंदर्य प्रसाधन उपहार दें। ऐसे जातक को मां लक्ष्मी का पूजन करना चाहिए और गाय की सेवा करना चाहिए। इसके अलावा काले और नीले रंग के वस्त्रों का त्याग कर स्वयं को चरित्रवान बनाए रखना चाहिए।
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👉 शनि - शनि का मजबूत होना नाक्रशाही का प्रतीक है। ऐसा होने पर आप स्वस्थ्य होते हैं और लोग आपके लिए काम करते हैं। जीवनसाथी का सहयोग मिलता है और परिवार पर किसी प्रकार की मुसीबत नहीं आती। ऐसा व्यक्ति एक से अधिक मकानों का स्वामी होता है और कम मेहनत में अधिक लाभ कमाने वाला होता है।
उपाय -शनि कमजोर होने की स्थिति में जातक को अपने चाचा की सेवा कर उन्हें सम्मान देना चाहिए। चमड़े की वस्तुओं, तवा, चिमटे आदि का दान करना चाहिए। किस से बुरा बर्तान नहीं करता चाहिए और ईमानदारी के साथ जीवन व्यतीत करना चाहिए। किसी पात्र में तेल लेकर उसमें अपनी परछाई देखें और उसे दान करें। कोयला दान करना भी अच्छा होगा।
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👉 राहु - कुंडली में राहु की अच्छी स्थिति होने पर जातक हाजिर जवाब और अच्छा सलाहकार होता है। उसे भरपूर मान-सम्मान और पद प्राप्त होता है और वह हर मुसीबत से आसानी से निकल भी जाता है। ऐसे व्यक्ति के जीवन में कोई बड़ी अड़चन नहीं आती और वह हर प्रकार के सुख भोगने वाला होता है।
उपाय -अगर आपको राहु का अच्छा प्रभाव न मिले तो किसी भी प्रकार का कबाड़ घर में न रखें। छत को साफ रखें और सीढियों पर भी सफाई रखें। अपने ससुराल वालों का सम्मान करें। अपने वजन के बराबर कच्चा कोयला बहते हुए जल में प्रवाहित करने से राहु पुष्ट होता है। इसके अलावा आपको जंग गले लोहे, तेजाब व नीली चीजों से सावधान रहना चाहिए।
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👉 केतु - केतु का शुभ होना आपकी यश और कीर्ति को फैलाता है। ऐसे व्यक्ति को बेटे व बहनोई से सुख मिलता है और पत्नी भी अच्छी मिलती है। केतु मजबूत होने पर जातक अपने जीवन में ऊंचाइयों को छूता है।राजनीति में होने पर जातक खूब तरक्की करता है। ऐसे व्यक्ति को संतान से भी सुख मिलता है और संतान भी उन्नति करती है।
उपाय -कुंडली में केतु अगर अशुभ प्रभाव दे रहा हो तो मंदिर में काला-सफेद कंबल दान करें। गले में मे सोना पहनें और कुत्ता पालें या फिर उसकी सेवा करें। केसर का टीका लगाएं।
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नवग्रहों को अनुकूल एवं बलि बनाने के कुछ आसान उपाय
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सूर्य⭐
🔹सूर्य को बली बनाने के लिए व्यक्ति को प्रातःकाल सूर्योदय के समय उठकर लाल पूष्प वाले पौधों एवं वृक्षों को जल से सींचना चाहिए।
🔹रात्रि में ताँबे के पात्र में जल भरकर सिरहाने रख दें तथा दूसरे दिन प्रातःकाल उसे पीना चाहिए।
🔹ताँबे का कड़ा दाहिने हाथ में धारण किया जा सकता है। लाल गाय को रविवार के दिन दोपहर के समय दोनों हाथों में गेहूँ भरकर खिलाने चाहिए। गेहूँ को जमीन पर नहीं डालना चाहिए।
🔹किसी भी महत्त्वपूर्ण कार्य पर जाते समय घर से मीठी वस्तु खाकर निकलना चाहिए।
🔹हाथ में मोली (कलावा) छः बार लपेटकर बाँधना चाहिए।
🔹लाल चन्दन को घिसकर स्नान के जल में डालना चाहिए।
🔹सूर्य के दुष्प्रभाव निवारण के लिए किए जा रहे उपायों हेतु रविवार का दिन, सूर्य के नक्षत्र (कृत्तिका, उत्तरा-फाल्गुनी तथा उत्तराषाढ़ा) तथा सूर्य की होरा में अधिक शुभ होते हैं।
चन्द्रमा⭐
🔹व्यक्ति को देर रात्रि तक नहीं जागना चाहिए। रात्रि के समय घूमने-फिरने तथा यात्रा से बचना चाहिए।
🔹रात्रि में ऐसे स्थान पर सोना चाहिए जहाँ पर चन्द्रमा की रोशनी आती हो। ऐसे व्यक्ति के घर में दूषित जल का संग्रह नहीं होना चाहिए।
🔹वर्षा का पानी काँच की बोतल में भरकर घर में रखना चाहिए।
🔹वर्ष में एक बार किसी पवित्र नदी या सरोवर में स्नान अवश्य करना चाहिए।
🔹सोमवार के दिन मीठा दूध नहीं पीना चाहिए।
🔹सफेद सुगंधित पुष्प वाले पौधे घर में लगाकर उनकी देखभाल करनी चाहिए।
🔹चन्द्रमा के दुष्प्रभाव निवारण के लिए किए जा रहे उपायों हेतु सोमवार का दिन, चन्द्रमा के नक्षत्र (रोहिणी, हस्त तथा श्रवण) तथा चन्द्रमा की होरा में अधिक शुभ होते हैं।
मंगल⭐
🔹लाल कपड़े में सौंफ बाँधकर अपने शयनकक्ष में रखनी चाहिए।
🔹जब भी अपना घर बनवाये तो उसे घर में लाल पत्थर अवश्य लगवाना चाहिए।
🔹बन्धुजनों को मिष्ठान्न का सेवन कराने से भी मंगल शुभ बनता है।
🔹लाल वस्त्र लेकर उसमें दो मुठ्ठी मसूर की दाल बाँधकर मंगलवार के दिन किसी भिखारी को दान करनी चाहिए।
🔹मंगलवार के दिन हनुमानजी के चरण से सिन्दूर लेकर उसका टीका माथे पर लगाना चाहिए।
🔹बंदरों को गुड़ और चने खिलाने चाहिए।
🔹अपने घर में लाल पुष्प वाले पौधे या वृक्ष लगाकर उनकी देखभाल करनी चाहिए।
🔹मंगल के दुष्प्रभाव निवारण के लिए किए जा रहे उपायों हेतु मंगलवार का दिन, मंगल के नक्षत्र (मृगशिरा, चित्रा, धनिष्ठा) तथा मंगल की होरा में अधिक शुभ होते हैं।
बुध⭐
🔹अपने घर में तुलसी का पौधा अवश्य लगाना चाहिए तथा निरन्तर उसकी देखभाल करनी चाहिए। बुधवार के दिन तुलसी पत्र का सेवन करना चाहिए।
🔹बुधवार के दिन हरे रंग की चूड़ियाँ हिजड़े को दान करनी चाहिए।
🔹हरी सब्जियाँ एवं हरा चारा गाय को खिलाना चाहिए।
🔹बुधवार के दिन गणेशजी के मंदिर में मूँग के लड्डुओं का भोग लगाएँ तथा बच्चों को बाँटें।
🔹घर में खंडित एवं फटी हुई धार्मिक पुस्तकें एवं ग्रंथ नहीं रखने चाहिए।
🔹अपने घर में कंटीले पौधे, झाड़ियाँ एवं वृक्ष नहीं लगाने चाहिए। फलदार पौधे लगाने से बुध ग्रह की अनुकूलता बढ़ती है।
🔹बुध के दुष्प्रभाव निवारण के लिए किए जा रहे उपायों हेतु बुधवार का दिन, बुध के नक्षत्र (आश्लेषा, ज्येष्ठा, रेवती) तथा बुध की होरा में अधिक शुभ होते हैं।
गुरु⭐
🔹व्यक्ति को अपने माता-पिता, गुरुजन एवं अन्य पूजनीय व्यक्तियों के प्रति आदर भाव रखना चाहिए तथा महत्त्वपूर्ण समयों पर इनका चरण स्पर्श कर आशिर्वाद लेना चाहिए।
🔹सफेद चन्दन की लकड़ी को पत्थर पर घिसकर उसमें केसर मिलाकर लेप को माथे पर लगाना चाहिए या टीका लगाना चाहिए।
🔹मन्दिर में या किसी धर्म स्थल पर निःशुल्क सेवा करनी चाहिए।
🔹किसी भी मन्दिर के सम्मुख से निकलने पर अपना सिर श्रद्धा से झुकाना चाहिए।
🔹परस्त्री / परपुरुष से संबंध नहीं रखने चाहिए।
🔹गुरुवार के दिन मन्दिर में केले के पेड़ के सम्मुख गौघृत का दीपक जलाना चाहिए।
🔹गुरुवार के दिन आटे के लोयी में चने की दाल, गुड़ एवं पीसी हल्दी डालकर गाय को खिलानी चाहिए।
🔹गुरु के दुष्प्रभाव निवारण के लिए किए जा रहे उपायों हेतु गुरुवार का दिन, गुरु के नक्षत्र (पुनर्वसु, विशाखा, पूर्व-भाद्रपद) तथा गुरु की होरा में अधिक शुभ होते हैं।
शुक्र⭐
🔹काली चींटियों को चीनी खिलानी चाहिए।
🔹शुक्रवार के दिन सफेद गाय को आटा खिलाना चाहिए।
🔹किसी काने व्यक्ति को सफेद वस्त्र एवं सफेद मिष्ठान्न का दान करना चाहिए।
🔹किसी महत्त्वपूर्ण कार्य के लिए जाते समय १० वर्ष से कम आयु की कन्या का चरण स्पर्श करके आशीर्वाद लेना चाहिए।
🔹अपने घर में सफेद पत्थर लगवाना चाहिए।
🔹किसी कन्या के विवाह में कन्यादान का अवसर मिले तो अवश्य स्वीकारना चाहिए।
🔹शुक्रवार के दिन गौ-दुग्ध से स्नान करना चाहिए।
🔹शुक्र के दुष्प्रभाव निवारण के लिए किए जा रहे उपायों हेतु शुक्रवार का दिन, शुक्र के नक्षत्र (भरणी, पूर्वा-फाल्गुनी, पुर्वाषाढ़ा) तथा शुक्र की होरा में अधिक शुभ होते हैं।
शनि⭐
🔹शनिवार के दिन पीपल वृक्ष की जड़ पर तिल के तेल या सरसो तल का दीपक जलाएँ।
🔹शनिवार के दिन लोहे, चमड़े, लकड़ी की वस्तुएँ एवं किसी भी प्रकार का तेल नहीं खरीदना चाहिए।
🔹शनिवार के दिन बाल एवं दाढ़ी-मूँछ नही कटवाने चाहिए।
🔹भिखारी को कड़वे तेल का दान करना चाहिए।
🔹भिखारी को उड़द की दाल की कचोरी खिलानी चाहिए।
🔹किसी दुःखी व्यक्ति के आँसू अपने हाथों से पोंछने चाहिए।
🔹घर में काला पत्थर लगवाना चाहिए।
🔹शनि के दुष्प्रभाव निवारण के लिए किए जा रहे उपायों हेतु शनिवार का दिन, शनि के नक्षत्र (पुष्य, अनुराधा, उत्तरा-भाद्रपद) तथा शनि की होरा में अधिक शुभ होते हैं।
राहु⭐
🔹ऐसे व्यक्ति को अष्टधातु का कड़ा दाहिने हाथ में धारण करना चाहिए।
🔹हाथी दाँत का लाकेट गले में धारण करना चाहिए।
🔹अपने पास सफेद चन्दन अवश्य रखना चाहिए। सफेद चन्दन की माला भी धारण की जा सकती है।
🔹दिन के संधिकाल में अर्थात् सूर्योदय या सूर्यास्त के समय कोई महत्त्वपूर्ण कार्य नही करना चाहिए।
🔹यदि किसी अन्य व्यक्ति के पास रुपया अटक गया हो, तो प्रातःकाल पक्षियों को दाना चुगाना चाहिए।
🔹झुठी कसम नही खानी चाहिए।
🔹राहु के दुष्प्रभाव निवारण के लिए किए जा रहे उपायों हेतु शनिवार का दिन, राहु के नक्षत्र (आर्द्रा, स्वाती, शतभिषा) तथा शनि की होरा में अधिक शुभ होते हैं।
केतु⭐
🔹भिखारी को दो रंग का कम्बल दान देना चाहिए।
🔹नारियल में मेवा भरकर भूमि में दबाना चाहिए।
🔹बकरी को हरा चारा खिलाना चाहिए।
🔹ऊँचाई से गिरते हुए जल में स्नान करना चाहिए।
🔹घर में दो रंग का पत्थर लगवाना चाहिए।
🔹चारपाई के नीचे कोई भारी पत्थर रखना चाहिए।
🔹किसी पवित्र नदी या सरोवर का जल अपने घर में लाकर रखना चाहिए।
🔹केतु के दुष्प्रभाव निवारण के लिए किए जा रहे उपायों हेतु मंगलवार का दिन, केतु के नक्षत्र (अश्विनी, मघा) शुभ है वास्तु शास्त्र के कुछ आसान उपायों द्वारा जाने कि किस काम के लिए कौन-सी दिशा होती है शुभ
वास्तु शास्त्र में ऊर्जा का विशेष महत्त्व है। वास्तु शास्त्र में हर दिशा का संबंध किसी न किसी खास ऊर्जा से माना जाता है इसलिए वास्तु के अनुसार, काम की दिशा भी हमारी सफलता-असफलता का कारण बन सकती है।
इसलिए वास्तु में हर काम के लिए एक निश्चित दिशा का महत्व माना जाता है। यदि वास्तु के इन नियमों का पालन किया जाए तो मनुष्य को हर काम में सफलता मिलती है।
1🔹पढाई करते समय विद्यार्थी का मुंह पूर्व दिशा की ओर हो तो यह सबसे अच्छा माना जाता है।
2🔹 घर के मंदिर में पूजा करते समय व्यक्ति का मुंह पश्चिम दिशा की ओर होना शुभ होता है। यदि ऐसा संभव न हो तो मुंह पूर्व दिशा की ओर भी रख सकते हैं।
3🔹 दुकान या ऑफिस में काम करते समय वहां के मुखिया का मुंह हमेशा उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। इससे काम में हमेशा सफलता मिलती है।
4🔹 खाना बनाते समय ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए कि खाना बनाने वाले का मुंह पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा की ओर हो।
5🔹 सोते समय दक्षिण दिशा की ओर सिर होना चाहिए। इसके अलावा किसी भी अन्य दिशा में सिर करके सोना अशुभ माना जाता है।
6🔹खाना खाते समय मुंह पूर्व और उत्तर दिशा की ओर होना सबसे अच्छा होता है। इससे शरीर को भोजन से मिलने वाली ऊर्जा पूरी तरह से मिलती है।
7🔹 किसी भी नए काम की शुरुआत उत्तर दिशा की ओर मुंह रखकर ही करनी चाहिए। उत्तर दिशा को सफलता की दिशा माना जाता है।
8🔹 घर में टी.वी. ऐसी जगह लगाना चाहिए कि टी.वी. देखते हुए घर के सदस्यों का चेहरा दक्षिण या उत्तर-दक्षिण दिशा की ओर हो।
9🔹घर की उत्तर ओर दक्षिण दिशा की ओर मेन गेट नहीं बनाना चाहिए?📚🖍🙏🙌
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