हरियाली और शनि अमावस्या साथ, सुबह उठकर इन मंत्रों का करें जप चमक सकती है किस्मत
11 अगस्त, शनिवार को शनि अमावस्या है और हरियाली अमावस्या का भी संयोग बना है। यह एक दुर्लभ संयोग है क्योंकि सावन के महीने में शनिवार के दिन हर साल अमावस्या तिथि नहीं लगती है। इस शनि अमावस्या के दिन सूर्यग्रहण भी लग रहा जो इसके महत्व को कई गुणा बढ़ा रहा है। अच्छी बात यह है कि यह ग्रहण में नहीं दिखेगा जिससे आपको सूतक के कारण पूजा-पाठ में किसी तरह की बाधा का सामना नहीं करना होगा बल्कि इस अवसर पर आप शनि दोष, ग्रहण दोष और पितृ दोष जैसे अशुभ फल देने वाले ग्रह स्थितियों के प्रभाव से मुक्ति के उपाय कर सकते हैं।
👉इस मंत्र से मिलेगी पितृ दोष से मुक्ति
शनि अमावस्या दिन आप कुछ नहीं कर पाएं तो कम से कम शनि के इस मंत्र का जितना संभव हो जप कर लें। ‘ओम प्रां प्रीं प्रौं स: शनैश्चराय नम:’। इसके साथ ही इस अवसर पर हो सके तो उड़द दाल की खिचड़ी खाएं और दान करें। शनि दोष के साथ ही पितृदोष भी दूर होगा।
👉शनि के वैदिक मंत्र का करें जप
ग्रहण के समय आप शनिदेव के वैदिक मंत्र ‘ओम शं नो देवीरभिष्टय आपो भवन्तु पीतये। शंयोरभि स्रवन्तु न:।।’ का जप करें। इस मंत्र जप के बाद तिल के तेल से बने पकवान का दान करें। इससे शनिदेव के अशुभ दशा के प्रभाव से मिलने वाली परेशानी से राहत महसूस कर सकते हैं।
👉शनि पत्नी मंत्र से पाएं यह लाभ
ज्योतिषशास्त्र में शनि की दशा को कम करने के लिए शनि पत्नी के नाम का मंत्र जप भी लाभकारी बताया गया है। पीपल या शमी पेड़ के पास शनि महाराज की पूजा करके शनि पत्नी के नामों का जप करें। इससे गृहस्थी की बाधा दूर होती है और नौकरी-व्यवसाय के क्षेत्र में भी प्रगति होती है- शनि पत्नी मंत्र- ध्वजिनी धामिनी चैव कंकाली कलहिप्रिया। कण्टकी कलही चाथ तरंगी महिषी अजा।।
👉शनि मनोकामना पूर्ति मंत्र
शनैश्चरी अमावस्या के दिन शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए पौराणिक शनि मंत्र: ‘ओम ह्रिं नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम। छाया मार्तण्डसम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्।।’ का जप करें। इससे शनि महाराज प्रसन्न होकर मनोकामनाएं पूरी करते हैं।
👉चल रही है साढ़ेसाती तो जपें यह मंत्र
आप कुंडली में मौजूद साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव कम करने के लिए तांत्रिक शनि मंत्र: ‘ओम प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।’ का जप करें। साथ ही तेल, काला छाता, जूते-चप्पल, कंबल आदि दान कर सकते हैं। इससे ना सिर्फ साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव कम होता है बल्कि शनि की दशा का अशुभ प्रभाव भी दूर होता है।
👉 शनि अमावस्या पर शनि यंत्र की पूजा
ग्रहण के समय आप ओम भूर्भुव: स्व: शन्नोदेवीरभि टये विद्महे नीलांजनाय धीमहि तन्नो शनि: प्रचोदयात्। इस शनि गायत्री मंत्र का जप करें। साथ ही मंदिर जाकर पूजा अर्चना करना संभव न हो तो घर में शनि यंत्र की स्थापना करें और पूजन करें।
👉 सूर्यग्रहण ने बढ़ाया शनि अमावस्या का महत्व,
जानें क्यों है यह बेहद खास
हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि को पूजा-पाठ, दान-पुण्य आदि करना बेहद शुभ माना जाता है। जब शनिवार को अमावस्या पड़ती है तो उसे शनैश्चरी अमावस्या कहा जाता है। साथ ही इस दिन सूर्यग्रहण भी है, इससे इस दिन खास महत्व बढ़ जाता है। शनिदेव को न्याय का देवता माना जाता है लेकिन इन्हे कर्म का देवता भी माना जाता है। शनैश्चरी अमावस्या वाले दिन शनि देव का विशेष पूजन, अर्चन और स्तवन करना चाहिए। जिन व्यक्तियों की कुंडली में शनिदोष है वो लोग इस दिन विधि विधान के अनुसार पूजन करके उससे मुक्ति पा सकते हैं।
👉 शनि अमावस्या का महत्व
शास्त्रों में कहा गया है शनिदेव अच्छे कर्म करने पर हमेशा अपने भक्तों को अच्छा फल देते हैं और जो गलत काम करता है, उसे वह सीख भी देते हैं। उनकी कृपा मात्र से जीवन में कभी किसी चीज की कमी नहीं रहती। एक बार जिस व्यक्ति पर शनिदेव प्रसन्न हो जाते हैं उसे रंक से राजा बना देते हैं और नाराज हो जाएं तो राजा से रंक बना देते हैं। जिस व्यक्ति पर शनि की साढ़ेसाती या फिर ढैय्या चल रही हो तो कुछ उपाय करके आप इसके प्रभाव को कम कर सकते हैं। साथ ही शनि महाराज की पूजा करने से मनचाहा फल भी प्राप्त कर सकते हैं।
👉 इस तरह करें अमावस्या पर शनि महाराज की
पूजा
शनिदेव की पूजा करने के लिए सूर्योदय से पहले उठें और स्नानादि से निवृत्त होकर पीपल के पेड़ और शनिदेव की प्रतिमा पर काला तिल और तेल चढ़ाना चाहिए। इसके बाद सरसों के तेल का दीपक जलाकर उनकी प्रतिमा के आगे नहीं बल्कि मंदिर में उनकी शिला के समाने रखें। इसके बाद शनि महाराज की आरती करें। इस दिन सूर्य ग्रहण भी है इसलिए ग्रहण के बाद गरीबों को खाना खिलाएं और जरूरतमंदों का दान करें। साथ ही शनिदेव को काले तिल, काली उड़द या फिर कोई काली वस्तु भी भेंट कर सकते हैं।
आप इस दिन शनि चालिसा, मंत्र आदि का जाप करें। हिंदु पुराणों के अनुसार, शनि स्त्रोत की रचना राजा दशरथ ने शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए की थी। शनि महाराज ने राजा दशरथ को आशीर्वाद दिया था कि भविष्य में जो भी सच्चे मन से शनि स्त्रोत का पाठ करेगा, मैं उसपर प्रसन्न होउंगा। इस दिन शनि मंत्र और शनि चालिसा का पाठ अवश्य करें। साथ ही हनुमान मंदिर में जाकर हनुमान चालिसा और सुंदर कांड का पाठ भी अवश्य करें। शनि महाराज को तेल चढ़ाने से पहले इस बात का अवश्य ध्यान रखें कि इस तेल में अपना चेहरा जरूर देख लें। इससे आपके ग्रह दोष कम होते हैं और सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है।
👉 शनिश्चरी अमावस्या 2018 ये हैं शनि के
प्रकोप से मुक्ति के लिए अचूक उपाय
शनिवार का दिन शनि देव को समर्पित है। शास्त्रों के अनुसार अमावस्या के दिन जब शनिवार पड़ता है तो वह शनिश्चरी अमावस्या के नाम से जाना जाता है।
शास्त्रों में शनिश्चरी अमावस्या का अत्यधिक महत्व बताया गया है। शनिश्चरी अमावस्या के दिन कुछ शास्त्रीय उपायों को करने से शनि की साढ़ेसाती की समस्या से निजात मिलता है।
👉 शनि दोष से मुक्ति के उपाय
👉शनिश्चरी अमावस्या के दिन आप शनि के बीज मंत्र का जप करके उड़द दाल की खिचड़ी या तिल से बने पकवान गरीबों को दान करें।
👉अमावस्या की रात्रि में 8 बादाम और 8 काजल की डिब्बी काले वस्त्र में बांधकर संदूक में रखें। इससे शनि की ढैय्या खत्म हो जाएगी।
👉शनिश्चरी अमावस्या के दिन आप पीपल के पेड़ पर सात प्रकार का अनाज चढ़ाएं और सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
👉प्रतिदिन काले श्वान को मीठी रोटी खिलाएं।
घर की दहलीज में चांदी का पत्तर दबाएं।
👉 ये उपाय भी है बेहद खास
शनिदेव के दुष्प्रभाव का शमन करने के लिए प्रत्येक शनिवार के दिन काली गाय यानी श्यामा गौ की सेवा करें। पहली रोटी गाय को खिलाएं, माथे पर सिंदूर का तिलग लगाएं, सींग पर मौली बांधें और फिर मोतीचूर के लड्डू खिलाकर गौ माता के चरण स्पर्श करें।
यदि शनि की साढ़ेसाती से ग्रस्त हैं तो शनिवार के दिन अंधेरा होने के बाद पीपल पर मीठा जल अर्पित कर सरसों का तेल दीपक व धूप अगरबत्ती अर्पित करें। वहीं बैठकर क्रमशः हनुमान, भैरव और शनि चालीसा का पाठ करें और पीपल की सात परिक्रमा करें।
प्रत्येक शनिवार को वट एवं पीपल वृक्ष के नीचे सूर्योदय से पूर्व कड़वे तेल का दीपक जलाकर शुद्द कच्चा दूध एवं धूप आदि अर्पित करें। शनिवार का दिन शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए अत्यंत शुभ दिन होता है। शनि दोष से मुक्ति पाने के लिए शास्त्रों में बहुत सारे उपाय बताए गए हैं लेकिन जो शक्ति शनि मंत्र है वह अन्य किसी उपाय में नहीं है।
👉 शनि स्तोत्र
नमस्ते कोणसंस्थाय पिडगलाय नमोस्तुते। नमस्ते बभ्रुरूपाय कृष्णाय च नमोस्तु ते।।
नमस्ते रौद्रदेहाय नमस्ते चान्तकाय च। नमस्ते यमसंज्ञाय नमस्ते सौरये विभो।।
नमस्ते यंमदसंज्ञाय शनैश्वर नमोस्तुते। प्रसादं कुरू देवेश दीनस्य प्रणतस्य च।।
शनि दोष की शांति के लिए करें इन मंत्रों का जाप
वैदिक शनि मंत्र
"ऊँ शन्नोदेवीरभिष्टयऽआपो भवन्तु पीतये शंय्योरभिस्त्रवन्तुनः"
पौराणिक शनि मंत्र
"ऊँ ह्रिं नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम। छाया मार्तण्डसम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्।।
तांत्रिक शनि मंत्र
"ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः"
ll समाप्त ll
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शनिदेव को खुश करने के लिए शनिश्चरी अमावस्या को सूर्योदय से पहले जगकर पीपल की पूजा करने से शनिदेव खुश होते हैं। इस दिन पीपल के पेड़ में सरसों का तेल चढ़ाने से शनि देव अति प्रसन्न होते हैं।
इसके अलावा शनिश्चरी अमावस्या को संध्याकाल में ऊपर बताए मंत्रों के जाप से शनि का प्रकोप शांत होता है। साथ ही शनिदेव को इस मंत्र से पूजा करने से जो भी शनि की महादशा भी खत्म होती है।
पीपल की पूजा करने से क्यों मिट जाता है शनि का प्रकोप.....?
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जब किसी इंसान पर शनिदेव की महादशा चल रही होती है तो उसे पीपल की पूजा का उपाय जरूर बताया जाता है। कई बार मन में यह सवाल उठता है कि ब्रम्हांड के सबसे शक्तिशाली और क्रूर ग्रह शनि का क्रोध मात्र पीपल वृक्ष की पूजा करने से कैसे शान्त हो जाता है।
आज हम आपको बताने जा रहे हैं शनि और पीपल से सम्बंधित वह पौराणिक कथा जिसके बारे में आपने शायद ही पहले कभी सुना हो।
पुराणों की माने तो एक बार त्रेता युग मे अकाल पड़ गया था । उसी युग मे एक कौशिक मुनि अपने बच्चो के साथ रहते थे । बच्चो का पेट न भरने के कारण मुनि अपने बच्चो को लेकर दूसरे राज्य मे रोज़ी रोटी के लिए जा रहे थे।
रास्ते मे बच्चो का पेट न भरने के कारण मुनि ने एक बच्चे को रास्ते मे ही छोड़ दिया था । बच्चा रोते रोते रात को एक पीपल के पेड़ के नीचे सो गया था तथा पीपल के पेड़ के नीचे रहने लगा था। तथा पीपल के पेड़ के फल खा कर बड़ा होने लगा था। तथा कठिन तपस्या करने लगा था।
एक दिन ऋषि नारद वहाँ से जा रहे थे । नारद जी को उस बच्चे पर दया आ गयी तथा नारद जी ने उस बच्चे को पूरी शिक्षा दी थी तथा विष्णु भगवान की पूजा का विधान बता दिया था।
अब बालक भगवान विष्णु की तपस्या करने लगा था । एक दिन भगवान विष्णु ने आकर बालक को दर्शन दिये तथा विष्णु भगवान ने कहा कि हे बालक मैं आपकी तपस्या से प्रसन्न हूँ। आप कोई वरदान मांग लो।
बालक ने विष्णु भगवान से सिर्फ भक्ति और योग मांग लिया था । अब बालक उस वरदान को पाकर पीपल के पेड़ के नीचे ही बहुत बड़ा तपस्वी और योगी हो गया था।
एक दिन बालक ने नारद जी से पूछा कि हे प्रभु हमारे परिवार की यह हालत क्यो हुई है । मेरे पिता ने मुझे भूख के कारण छोड़ दिया था और आजकल वो कहा है।
नारद जी ने कहा बेटा आपका यह हाल शानिमहाराज ने किया है । देखो आकाश मे यह शनैश्चर दिखाई दे रहा है । बालक ने शनैश्चर को उग्र दृष्टि से देखा और क्रोध से उस शनैश्चर को नीचे गिरा दिया । उसके कारण शनैश्चर का पैर टूट गया । और शनि असहाय हो गया था।
शनि का यह हाल देखकर नारद जी बहुत प्रसन्न हुए। नारद जी ने सभी देवताओ को शनि का यह हाल दिखाया था। शनि का यह हाल देखकर ब्रह्मा जी भी वहाँ आ गए थे । और बालक से कहा कि मैं ब्रह्मा हूँ आपने बहुत कठिन तप किया है।
आपके परिवार की यह दुर्दशा शनि ने ही की है । आपने शनि को जीत लिया है। आपने पीपल के फल खाकर जीवंन जीया है । इसलिए आज से आपका नाम पिपलाद ऋषि के नाम जाना जाएगा।और आज से जो आपको याद करेगा उसके सात जन्म के पाप नष्ट हो जाएँगे।
तथा पीपल की पूजा करने से आज के बाद शनि कभी कष्ट नहीं देगा । ब्रह्मा जी ने पिपलाद बालक को कहा कि अब आप इस शनि को आकाश मे स्थापित कर दो। बालक ने शनि को ब्रह्माण्ड मे स्थापित कर दिया।
तथा पिपलाद ऋषि ने शनि से यह वायदा लिया कि जो पीपल के वृक्ष की पूजा करेगा उसको आप कभी कष्ट नहीं दोगे। शनैश्चर ने ब्रह्मा जी के सामने यह वायदा ऋषि पिपलाद को दिया था।
उस दिन से यह परंपरा है जो ऋषि पिपलाद को याद करके शनिवार को पीपल के पेड़ की पूजा करता है उसको शनि की साढ़े साती , शनि की ढैया और शनि महादशा कष्ट कारी नहीं होती है।
शनि की पूजा और व्रत एक वर्ष तक लगातार करनी चाहिए। शनि कों तिल और सरसो का तेल बहुत पसंद है इसलिए तेल का दान भी शनिवार को करना चाहिए। पूजा करने से तो दुष्ट मनुष्य भी प्रसन्न हो जाता है।
तो फिर शनि क्यो नहीं प्रसन्न होगा ? इसलिए शनि की पूजा का विधान तो भगवान ब्रह्मा ने दिया है।
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👉 विशेष - शनि अमावस्या व्रत तिथि व मुहूर्त
अमावस्या तिथि– 11 अगस्त 2018, शनिवार
अमावस्या तिथि आरंभ– 19:08 बजे
(10 अगस्त 2018)
अमावस्या तिथि समाप्त– 15:27 बजे
(11 अगस्त 2018)
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